लॉकडाउन से पैदा स्थिति में एक युवक ने की आत्महत्या

ख़ुदकुशी से पहले लिंगदोह ने फेसबुक पर लिखा- ‘मोदी ने सभी रास्ते बंद कर दिए… मालिक ने निकाल दिया…’

जहाँ एक तरफ वैश्विक कोविड 19 (कोरोना) संक्रमण से लोग संकटग्रस्त हैं, मर रहे हैं, वहीँ सरकारों द्वारा अचानक बगैर उचित व्यवस्था लॉकडाउन की घोषणा, आवागमन व्यवस्था ठप्प कर देने से उससे ज्यादा लोग संकट में घिर गए हैं और मर रहे हैं। ताजा मामला आगरा में शिलाँग निवासी एल्ड्रिन लिंगदोह के दुखद आत्महत्या के रूप में सामने आया है। जहाँ वह यूपी के एक मंत्री के रेस्ट्रोरेन्ट में काम करता था।

ख़ुदकुशी से पहले युवक ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ‘आप सभी से मानवता के आधार पर एक मदद चाहिए… मेरे मरने के बाद मेरी बॉडी को मेरे अपने शहर तक पहुँचा दीजिए…भगवान के लिए मेरी मदद करें ताकि मैं वहाँ पहुँच कर आराम कर सकूं।’

यह विचलित करने वाली ख़बर उत्तर प्रदेश के आगरा की है। यहाँ एल्ड्रिन लिंगदोह नमक युवक ने 30 मार्च को आत्महत्या कर ली। मिडिया में छपी ख़बर के अनुसार लॉकडाउन से पहले यह युवक जिस रेस्ट्रोरेन्ट में काम करता था वहाँ के मालिक ने लॉकडाउन के बाद उसे निकाल दिया था। इसके कारण यह युवक काफी परेशान था। रेस्ट्रॉन्ट यूपी सरकार के राज्यमंत्री के बेटे का बताया जा रहा है।

मृतक एल्ड्रिन

जानकारी के अनुसार मेघालय के शिलॉन्ग के रहने वाले एल्ड्रिन लिंगदोह सिकंदरा इलाके में स्थित रेस्ट्रॉन्ट में नौकरी करता था। उसकी लाश रेस्ट्रॉन्ट की छत पर टिनशेड में फंदे से लटकी बरामद की गई।

एल्ड्रिन ने मंगलवार को शिलॉन्ग में रहने वाले अपने परिजन को वॉट्सऐप पर सुइसाइड नोट भेजा। अंग्रेजी में लिखे नोट में उसने अपनी पूरी कहानी और हालातों का जिक्र करते हुए बताया कि वह एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था और कुछ करने की चाहत में घर से निकल आया था। एल्ड्रिन ने नोट में लिखा, ‘मैं आगरा में कारगिल पेट्रोल पंप के पास रेस्ट्रॉन्ट में काम कर रहा था। मोदी जी ने मेरे लिए सारे रास्ते बंद कर दिए। कोई जगह ऐसी नहीं थी जहाँ मैं जाता।’

आत्मघाती कदम उठाने से पहले उसने फेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखा था। युवक ने फेसबुक पर लिखा था कि ‘मैं यहाँ आगरा में काम करता हूँ। मोदी ने मेरे लिए सभी रास्ते बंद कर दिए… मैं कहीं नहीं जा सकता। मेरे मालिक को भी मेरी कोई परवाह नहीं है।

“उन्होंने मुझसे कहा कि जाओ जहाँ जाना है। इसलिए मैं कहाँ जाऊंगा और कृपया कर मेरी मदद करें… मैं नहीं जानता हूँ कि कहाँ जाना है… मुझे सिर्फ एक ही रास्ता नजर आता है आत्महत्या का। आप सभी से मानवता के आधार एक मदद चाहिए… मेरे मरने के बाद मेरी बॉडी को मेरे अपने शहर तक पहुँचा दीजिए… भगवान के लिए मेरी मदद करें ताकि मैं वहाँ पहुँच कर आराम कर सकूं।’

मेघालय पुलिस के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ‘UNI’ से बातचीत करते हुए बताया कि आगरा पुलिस ने एल्ड्रिन लिंगदोह का शव उनके घर से बरामद किया है। पुलिस ने बताया कि एल्ड्रिन लिंगदोह के डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के बाद डीप फ्रीज में रखा जाएगा। हम लोग उनके शरीर को लॉकडाउन के बाद ही ले पाने में सक्षम हो पाएंगे। हम शिलॉन्ग में एल्ड्रिन लिंगदोह के रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।’

दरअसल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। लोगों से सरकार ने अपील की है कि जो जहाँ हैं अभी वहीं रुकें। इस दौरान जरुरी सेवाओं को छोड़ कर अन्य सभी कार्यालयों तथा चीजों की आपूर्ति बंद कर दी गई है।

बगैर किसी व्यवस्था और उचित इन्तेज़ामात के अचानक लॉकडाउन और ट्रेन-बस परिवहन व्यवस्था ठप्प हो जाने से पूरे देश में भारी अफरा-तफरी व्याप्त हो गई है। लाखो मेहनतकश जनता भारी कष्ट उठाकर पैदल ही अपने घरों को निकाल पड़ी। मानवीय पलायन का सबसे त्रासदपूर्ण हालात पैदा हो गए। इसमे कितने लोग बीमार पड़े, कितने अकाल मौत के शिकार हुए।

इसके बावजूद कोई व्यवस्था करने की जगह सरकार ने एक और तुगलकी फरमान जारी करके जो जहाँ है, वहीँ रुकने का आदेश दे दिया। अमानवीयता की हद यह कि उत्तरप्रदेश के बरेली जिले के डीएम ने घर जा रहे गरीबो पर केमिकल का छिड़काव करने का अपराधिक कृत्य तक किया।

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लिंगदोह की आत्महत्या अचानक बेरोजगार और बेघरबार हुए मेहनतकश आवाम की त्रासदी की बानगी मात्र है। जो आत्महत्या नहीं, निरंकुश मुनाफाखोर व्यवस्था और मोदी सरकार की गलत नीतियों से हुई हत्या है।

चूंकि रेस्ट्रोरेन्ट उत्तरप्रदेश के एक मंत्री के बेटे का है, इसलिए ज्यादा संभव है कि मामले को दबा दिया जाए और एक और ग़रीब मज़दूर का हत्यारा बच जाए!

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