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संघर्षरत मज़दूर

श्रमकानून

गुड़गांव: कमीशनखोरी, शोषण के ख़िलाफ़ “अर्बन कंपनी” में महिलाएं हड़ताल पर

देशव्यापी काला दिवस : जनविरोधी श्रम संहिताएं, कृषि क़ानून रद्द करो, निजीकरण बंद करो!

लेबर कोड विरोधी मज़दूर कन्वेंशन : 23 को काला दिवस; 27 को भारत बंद का सक्रिय समर्थन

मजदूर-विरोधी लेबर कोड के खिलाफ 19 सितंबर को दिल्ली में मासा द्वारा कन्वेंशन

श्रम संहिताएँ रद्द कराने के लिए निर्णायक संघर्ष तेज़ करें! 23 सितंबर काला दिवस के रूप में मनाएं!!

विशेष

यात्रियों से बम्पर लूट : स्पेशल ट्रेन के बहाने, प्लेटफॉर्म टिकट महँगा व पैसेंजर को एक्सप्रेस करके

कोरोना आपदा को कमाई का धंधा बनाते हुए मोदी सरकार के रेल मंत्रालय ने जीरो से नियमित ट्रेनों को स्पेशल बनाकर दस महीने में महज...

उदारीकरण के 3 दशक : मेहनतकश की चुनौतियाँ विकट, वर्गीय एकता के साथ संघर्ष बढ़ाना होगा!

धारावाहिक प्रकाशित पिछले 13 किस्तों में यह साफ तौर पर सामने आया कि नवाउदारवादी नीतियों ने देश की आम जनता पर तकलीफ़ों-तबाहियों; दंगे-फसाद का कहर...

उदारीकरण 13वीं किस्त : कॉरपोरेट पूँजी और फासीवाद के गँठजोड़ से तबाही ही बन गया तरक़्क़ी

नवउदारवादी दौर में कॉरपोरेट पूँजी और फासीवाद के सहमेल ने मुनाफे की लूट और जनता में उन्माद को बेलगाम बनाया; उत्पादन में रोबोट का प्रचालन...

उदारीकरण के तीन दशक : चुनावी मदारियों ने जनता को बनाया जमूरा; मुनाफाखोरों का हुआ वर्चस्व

एक तरफ जनता कठपुतली बना दी गई, झूठ-फ़्राड के शोर में जिंदगी के असल मुद्दे गायब होते गए, वहीं जनता की हर गतिविधि पर नजर...

उदारीकरण की बयार तेज, तीखा हुआ दमनतंत्र : हक़ की आवाज उठाओगे, लाठी-जेल पाओगे!

बीते दशकों में मुनाफे की हितसेवा में शासन अपने दमन तंत्र को मज़बूत बनाता गया। आंदोलनों को कुचलने, फर्जी मुकदमों, फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में हत्याओं...

उदारीकरण के साथ सांप्रदायिकता-जातिवाद का फन फैलाता जहरीला नाग

जैसे-जैसे देश और दुनिया के मुनाफाखोरों के लिए देश का बाजार चारागाह बनता गया, जनता की बुनियादी जरूरतों- रोजी-रोटी का संकट बढ़ता गया और सांप्रदायिक...

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