बरेली में मजदूरों के ऊपर केमिकल का छिड़काव

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में लॉकडॉउन के दौरान दूसरे राज्यों से वापस लौटे मजदूरों के ऊपर कोरोना वायरस के संक्रमण को दूर करने के लिए सड़कों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्लीचिंग पाउडर युक्त केमिकल का छिड़काव किया गया। यही नहीं मज़दूरों से उठक बैठक भी कराई गई। हजारों किलोमीटर पैदल चलकर 30 मार्च को जब यह मजदूर अपने अपने जिले में पहुंचे तो योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इन मजदूरों के ऊपर हानिकारक ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर दिया। कई मजदूरों को अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा है। जिनकी आंख में यह केमिकल गया है, उन्हें ज्यादा परेशानी हो सकती है। जिन कर्मचारियों ने मजदूरों के ऊपर केमिकल का छिड़काव किया, उन्होंने साफ कहा कि हमें ऊपर से अधिकारियों के आदेश मिले थे कि बाहर से आने वाले लोगों पर इस केमिकल का छिड़काव करने के बाद ही जिले की सीमा में प्रवेश करने देना है। इस मामले का वीडियो सामने आने और सोशल मीडिया में आलोचना के बाद अधिकारी, मामले की लीपापोती में लग गए।

24 मार्च को नरेंद्र मोदी ने अचानक से 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा कर दी जिसके बाद रेल बस सहित सभी प्रकार के यातायात पर रोक लगा दी गई। जिसके बाद से आम जनता में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। खासकर प्रवासी मजदूरों के भीतर भय का माहौल हो गया। उसके बाद योगी सरकार ने कहा कि मजदूरों को लाने के लिए 1000 वर्षों की व्यवस्था रखी गई है जिसके बाद दिल्ली यूपी बॉर्डर पर मजदूरों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पैदल ही अपने घरों की तरफ चल पड़े हैं और उसके बाद से आम मजदूरों के ऊपर पुलिस प्रशासन के अत्याचार की लगातार खबरें, तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। कहीं मजदूरों के ऊपर लठ्ठ बरसाया जा रहा है तो कहीं उन्हें घुटनों के बल रेंगने पर मजबूर किया जा रहा है। इस विस्थापन में 29 मजदूरों की जान चली गई है। वही वीआईपी लोगों और कार से आने जाने वालों के साथ पुलिस तमीज से पेश आ रही है।

इससे पहले गुजरात में 500 मजदूरों की भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था और 90 लोगों को हिरासत में ले लिया था। 30 मार्च को दोपहर बाद अचानक से केंद्र सरकार ने राज्य की सीमाओं को सील कर आवाजाही रोकने की घोषणा कर दी। उसके बाद मजदूरों को और भी ज्यादा परेशानी का सामना उठाना करना पड़ा। कुछ एक राज्यों को छोड़कर किसी भी राज्य में मजदूरों और प्रवासी कामगारों के खाने-पीने और ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सारी चीजें बस टि्वटर, फेसबुक और सोशल मीडिया पर चल रही है। धरातल पर भुखमरी की स्थिति आने को है।

विदेशों से लोगों को हवाई जहाज के जरिए लाया जा रहा है और मजदूरों पर ब्लीचिंग पाउडर छिड़का जा रहा है। यह बीमारी हवाई जहाज वाले लेकर आए हैं और पैदल चलने वाले लोगों पर इस बीमारी को फैलाने का इल्जाम लगाया जा रहा है। भारतीय राजव्यवस्था मेहनतकश अवाम और मजदूरों को कीड़े मकोड़े से ज्यादा कुछ नहीं समझती है। यह भारतीय राजव्यवस्था का क्रूर चेहरा है जो इस मानवीय विपदा के समय और घिनौने रूप से सामने आया है।

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