रुद्रपुर: मज़दूर शोषण व कुप्रथाओं के खिलाफ 16 जून को डॉल्फिन मज़दूरों द्वारा सत्याग्रह आंदोलन

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। औद्योगिक केंद्र सिड़कुल की विभिन्न समस्यों और गैर क़ानूनी प्रथाओं के खिलाफ 16 जून को डॉल्फिन मज़दूर संगठन के नेतृत्व में गाँधी पार्क रुद्रपुर में मजदूर सत्याग्रह करने का ऐलान हुआ है। इसमें विभिन्न मज़दूर व सामाजिक संगठनों की भागीदारी रहेगी।

इस दौरान सिडकुल में न्यूनतम वेतनमान और बोनस कानून लागू कराने; स्थाई काम पर स्थाई रोजगार कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू कराने; ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने और ठेका प्रथा ख़त्म करने; कम्पनियों में सभी निलंबित और निष्कासित मजदूरों की कार्यबहाली कराने; समझौतों और अदालतों के आदेशों को लागू कराने; फर्जी मुकदमे वापस लेने आदि माँग बुलंद होगी।

न्यूनतम वेतन व बोनस भी नहीं

डॉल्फिन मज़दूरों की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि डॉल्फिन कम्पनी सहित पूरे सिडकुल में ज्यादातर कम्पनियों में ठेका और अस्थाई श्रमिकों को शासन द्वारा घोषित न्यूनतम वेतनमान का भुगतान नहीं किया जा रहा है। डॉल्फिन जैसी कंपनियों में तो स्थाई मजदूरों को भी न्यूनतम वेतनमान और इस मद की बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

मजदूरों को नियमानुसार बोनस भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। ठेका और अस्थाई मजदूरों को तो नाममात्र का भी बोनस भुगतान नहीं किया जाता है। जबकि इन्हें समस्त पिछला बकाया धनराशि देना न्यायहित में अत्यंत आवश्यक है। डॉल्फिन कम्पनी में तो हजारों स्थाई श्रमिक ऐसे हैं जिन्हें मात्र 300 रूपये बोनस दिया जाता रहा है।

गैर क़ानूनी ठेका प्रथा जारी

सिडकुल की करीब सभी कम्पनियों में ठेकेदारों के लाइसेंस का दुरूपयोग करके ठेका श्रमिकों को खतरनाक मशीनों और मुख्य उत्पादन क्षेत्रों में गैरकानूनी रूप से नियोजित करके जनमाल से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिससे आये दिन मजदूरों के अंग भंग होने और मारे जाने की दर्दनाक घटनाएं घटित होती रहती हैं।

डॉल्फिन कम्पनी में तो यह खुलेआम हो रहा है। परमानेंट मजदूरों से जबरदस्ती रिजाइन दिलाकर उन्हें ठेकेदार के अधिन नियोजित किया जा रहा है, जो कि ठेका श्रम अधिनियम 1970 और ठेकेदारों के लाइसेंस का खुला उल्लंघन है।

इसलिए ऐसे कम्पनी मालिकों, प्रबंधकों और ठेकेदारों के खिलाफ श्रम विभाग द्वारा सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने चाहिए और ऐसे ठेकेदारों के लाइसेंस को निरस्त किया जाना चाहिए। किन्तु इस असंवैधानिक कृत्य में शासन प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग स्वयं ही संलिप्त हैं।

गैरक़ानूनी निलंबन-निष्कासन आम बात

सिडकुल की कम्पनियों में वर्षों से कार्यरत स्थाई मजदूरों का गैरकानूनी रुप से निलंबन और निष्कासन करना आम बात हो चुकी है। डॉल्फिन, इंटरार्क, करोलिया, लुकास टीवीएस आदि अनगिनत कम्पनियों में श्रम अधिकारीयों /जिला प्रशासन की मध्यस्थता में सम्पन्न हुए समझौतों और उच्च न्यायालय, श्रम न्यायालय, और राष्ट्रीय लोक अदालतो के आदेशों का चीरहरण करके छल कपट की नीति के तहत अनगिनत मजदूरों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है। किन्तु शासन प्रशासन और श्रम विभाग इस पर मौन हैं और कम्पनी मालिकों की ढाल बने हुए हैं।

हक़ की आवाज़ पर दमन का विरोध करो!

जब पीड़ित मजदूर इस अन्याय अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं तो शासन प्रशासन और पुलिस का डंडा पीड़ित मजदूरों पर ही चलता है। अभी हाल ही में डॉल्फिन मजदूर नेता सोनू कुमार को सिडकुल पंतनगर चौकी में बंद करके पट्टे मारने, जेल भेजने और 5 जून 2024 को महिला मजदूरों के साथ छेड़खानी और अश्लील हरकतें करने वाले गुंडों के खिलाफ कार्यवाही करने के स्थान पर ट्रांजिट कैम्प पुलिस थाने में उक्त गुंडों की तहरीर पर महिलाओं का बचाव करने वाले डॉल्फिन श्रमिक नेता सोनू कुमार, वीरू, ललित, बब्लू और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश भट्ट और राजेश सक्सेना के खिलाफ ही उक्त गुंडों से दस हजार रूपये छीनने और बंधक बनाकर मारपीट करने आदि संगीन धाराएं लगाकर झूठी एफआईआर, जिसकी संख्या 162/2024 है, दर्ज कर दी गई।

महिलाओं का गुंडों से बचाव करने वालों को ही पुलिस ने लुटेरे घोषित कर दिया है और पीड़ित महिलाओं द्वारा छेड़खानी करने वाले उक्त गुंडों के खिलाफ दी गई तहरीर, कम्पनी मालिक की ऑडियो रिकॉर्डिंग, गुंडों की विडिओ रिकॉर्डिंग आदि साक्ष्य देने के बाद भी पुलिस ने गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। इससे पता चलता है कि कम्पनी मालिकों और प्रशासन की कितनी तगड़ी सांठगांठ है और इसके खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाना आज के समय में बेहद जरूरी है।

16 जून को मज़दूर सत्याग्रह में शामिल हों!

सिडकुल पंतनगर की कम्पनियों में चल रही गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने और मजदूर नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज किये गए फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर डॉल्फिन मजदूर संगठन के बैनर तले रविवार, 16 जून को सायं 4 बजे से गाँधी पार्क रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा से जुड़ी विभिन्न ट्रेड यूनियनों, सामाजिक सांगठनों के साथ में मिलकर मजदूर सत्याग्रह होगा, जिसकी लिखित सूचना जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को दी जा चुकी है।

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