गिरता उत्पादन, बढ़ती बेरोजगारी

वाहनों से लेकर बुनियादी उद्द्योगों तक में कामबंदी

मोदी सरकार द्वारा कंपनियो को भारी पैकेज देने के बावजूद उद्द्योगों की हालत लगातार ख़राब बनी हुई है। बुनियादी उद्दोगों हो या ऑटो क्षेत्र, उत्पादन लगातार गिर रहा है, कंपनियो में कामबंदी अभी भी जारी है। लगातार छंटनी की भयावहता बनी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक अबतक करीब पांच लाख अस्थायी और कैजुअल नौकरियां जा चुकी हैं और दस लाख लोगों की नौकरी खतरे में है। फिर भी मोदी सरकार की जय-जयकार है…!

बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में साढ़े तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट

देश के 8 बुनियादी उद्योगों को इस साल अगस्त में सालाना आधार पर 0.5 फीसदी नीचे रहा। यह पिछले साढे तीन साल में आई सबसे बड़ी गिरावट है।

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आठ प्रमुख उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।पिछले साल अगस्त में इन क्षेत्रों का उत्पादन सालाना आधार पर 4.7 थी ऊंचा रहा था।

वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2019 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, सीमेंट और बिजली क्षेत्र में क्रमशः 8.6 फीसदी 5.4 फीसदी, 3.9 फीसदी, 4.9 फीसदी और 2.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

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वाहनों की बिक्री में बड़ी गिरावट

ऑटो वाहनों की बिक्री इस माह भी काफी नीचेदूसरी तरफ सितंबर 2019 में कारों व दुपहिया वाहन की बिक्री में कमी का सिलसिला लगातार जारी रहा। देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी की बिक्री में 24 फ़ीसदी की गिरावट आई है।

दूसरी बड़ी कार कंपनी हुंडई की घरेलू बिक्री में 14.8 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री में 21 फीसदी की गिरावट रही, टाटा मोटर्स की बिक्री में 48 फ़ीसदी, टोयोटा की 17 फ़ीसदी और होंडा कार्स की बिक्री में 37 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।

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इसी तरह से दो पहिया वाहन का बाजार भी मंदी की चपेट में रहा। बजाज ऑटो की बिक्री में 20 फ़ीसदी तो टीवीएस मोटर्स की बिक्री में 25 फीसदी की गिरावट आई।महिंद्रा एंड महिंद्रा के ट्रैक्टरों की बिक्री 2 फ़ीसदी घटी है और कंपनी को निर्यात बाजार में बड़ा झटका लगा है क्योंकि वहां 41 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई है।

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भारी वाहन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी अशोक लेलैंड ने बताया कि उसके वाहनों की बिक्री में 55 फ़ीसदी की गिरावट आई है। सितंबर में कंपनी सिर्फ 8780 वाहनों की बिक्री कर सकी है।

मारुति सुजुकी ने सितंबर में उसने 1,22,640 कारों की बिक्री की है, जबकि सितंबर 2018 में कंपनी ने 1,62,290 कारों की बिक्री की थी। इसमें निर्यात शामिल है। निर्यात को अलग हटा दे तो घरेलू बिक्री में गिरावट की दर बढ़कर 26.7 फ़ीसदी हो जाती है।

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जुलाई में वाहनों की घरेलू बिक्री 18.71% घटी, दिसंबर 2000 के बाद सबसे तेज गिरावट

ऑटो सेक्टर में 19 साल में यह सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले इसी तरह की गिरावट 2008-09 और 2013-14 के आसपास के समय में देखी गई थी।

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10 लाख नौकरियों पर लटकी तलवार

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक देश में सभी तरह के व्हीकल्स की सेल में भारी कमी आई है। पिछले साल जुलाई की तुलना में इस साल जुलाई में कारों की बिक्री 35.95 फीसदी गिरी है. वहीं कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री 37.48 फीसदी घटी है। सभी तरह के यात्री वाहनों की बिक्री 30.98 फीसदी घटी है जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री 16.82% घटी है।

सियाम के अनुसार अबतक करीब साढ़े तीन लाख अस्थायी और कैजुअल नौकरियां जा चुकी हैं और दस लाख लोगों की नौकरी खतरे में है।

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