टाटा मोटर्स में महिला श्रमिक तो रॉकेट इंडिया व महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1-1 श्रमिकों की दुखद मौत

कोविड : स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और दहशत से बढ़ा संकट

पंतनगर (उत्तराखंड)। कोरना की दूसरी लहर के साथ मेहनतकश मज़दूर साथियों की जिंदगी पर खतरा बढ़ गया है। टाटा मोटर्स में एक महिला श्रमिक कमला राठौर, रॉकेट इंडिया के एक मज़दूर राजीव कौशल की दुखद निधन की खबर मिली। बीते हफ्ते महिंद्रा एंड महिंद्रा लालपुर में सत्येंद्र कुमार कोरना की जंग हर गए। इससे पहले टाटा मोटर्स में एक मज़दूर साथी की मौत हो चुकी है।

इन सबके बीच कुछ कंपनियों में आंशिक या पूर्ण बंदी हुई तो तमाम कारखाने अविरल गति से चल रहे हैं और मज़दूरों में दहशत का माहौल बना हुआ है। उधर मज़दूरों की स्वस्थ्य के प्रति लापरवाही से दिक्कतें और बढ़ रही हैं।

टाटा मोटर्स में एक महिला श्रमिक सहित दो का निधन

टाटा मोटर्स, पंतनगर में एक महिला श्रमिक कमला राठौर (आपरेटर) का राजकीय मेडिकल कॉलेज के सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी में देहांत हो गया। कमाल राठौर बीमार होने के बाद 23 अप्रैल को सुशीला तिवारी में भर्ती हुई थीं। वे कोरोना संक्रमित थीं। ज़िंदगी की जंग वे बहादुरी से लड़ीं लेकिन अपने पीछे एक बच्चे को छोड़कर विदा हो गईं।

इससे पूर्व बीते 27 अप्रैल को टाटा मोटर्स, पंतनगर के ऑपरेटर सन्दीप ध्यानी की कोविड से मौत की ख़बर आई थी। संदीप कोविड़ पॉजिटिव आने पर सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी में भर्ती हुए थे, लेकिन अगले दिन इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

रॉकेट के मज़दूर साथी राजीव की मौत

रॉकेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मज़दूर व यूनियन सदस्य राजीव कौशल इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। बुधवार को कोविड-19 से उनका निधन हो गया।

वे कई दिनों से बीमार थे। जब तबियत एकदम बिगड़ गई, तब उन्होंने कंपनी व यूनियन को ख़बर दी। आनन-फानन में साथियों ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाया, लेकिन विलम्ब हो चुका था। अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए।

महिंद्रा के साथी सतेंद्र का निधन

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड लालपुर के ट्रांसमिशन में कार्यरत साथी सत्येंद्र कुमार की 1 मई को मेडिसिटी हॉस्पिटल में मौत हो गई।

उससे 2 दिन पूर्व कंपनी में कार्य के दौरान अचानक उनका स्वास्थ्य खराब हुआ था, ऑक्सीजन लेबल बेहद कम था, जिसके कारण उनको तुरंत मेडिसिटी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। लेकिन वह कोरोना से जिंदगी की दौड़ हार गए।

मिंडा के श्रमिक का मिला शव

मिंडा कंपनी में काम करने वाले यशपाल सिंह कुलौरा का शव बुधवार को नैनीताल जिले के भीमताल में तैरता हुआ मिला। कारण का पता नहीं चल सका है, लेकिन वह कुछ दिनों से लापता थे और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े हुए थे।

स्थितियाँ भयावह, कोविड टेस्ट नहीं, भय का माहौल

स्थितियां लगातार भयावह बनी हुई है। हालात यह हैं की उत्तराखंड सरकार तथा जिला प्रशासन द्वारा सारी कंपनियों में कोविड-19 जाँच कराने का आदेश पारित हो चुका है, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसका पालन नहीं किया।

स्थिति यह है कि कई फैक्ट्रियों में कोई मज़दूर संक्रमित मिलता है तो उसके अगल-बगल काम कर रहे दो श्रमिकों को क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता है और बाकी लोग वैसे ही काम करते हैं, ऐसे में भय का माहौल और भी ज्यादा बढ़ गया है।

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही जानलेवा

कोरोना वायरस उतना जानलेवा नहीं है, जितना खुद की लापरवाही, अस्पतालों की दुर्दशा और दहशत में यह जानलेवा साबित हो रहा है।

यह गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ कंपनियों में काम करने की मजबूरी है, वहीं तमाम मज़दूर साथी स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। वे सर्दी, जुकाम, बुखार को भी सामान्य तरीके से ले रहे हैं। अथवा झोलाछाप डॉक्टरों या मनमाने तरीके से जारी दवाइयों की सूची से दवाइयां लेने लगते हैं, या अंधविश्वास पर कायम रहने, नीम-हकीमी करने मे लगे रहते हैं।

और इस प्रक्रिया में जब वाकई हालत बिगड़ जाती है तब अस्पतालों की ओर भागते हैं। अस्पतालों की अंधी लूट के बीच ऑक्सीजन, बेड और वेंटिलेटर की भारी किल्लत का सामना करते हैं और अकाल ही मौत के शिकार हो जाते हैं।

सरकारी अकर्मण्यता, भूख और बीमारी से एक साथ जंग

ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि मेहनतकश मज़दूर साथी स्वास्थ्य को गंभीरता से लें, संक्रमण से बचने के सभी तरीकों का इस्तेमाल करें, स्वास्थ्यगत दिक्कत होने पर काम पर ना जाएं, अपने को आइसोलेट करें।  दहशत की जगह बीमारी से लड़ें, फेफड़ा खराब होने से पहले उपचार करें।

यह एक ऐसा कठिन वक़्त है जब सरकार व पूँजीपतियों के लिए आपदा अवसर बन गया है और मज़दूर-मेहनतकश तबाह-बर्बाद हो रहा है। ऐसे में सरकारी अकर्मण्यता, भूख और बीमारी, सभी से लड़ना है।

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