कोरोना से मरो या काम न मिलने के डर से: यहाँ टार्गेट ही ख़ुदा है


मारुति सुजुकी फैक्टरी मानेसर में मजदूरों के स्वास्थ को नजरअंदाज करके लगातार काम करवाया जा रहा है। कई बीमार मजदूरों का न तो इलाज कराया जा रहा है और ना उन्हें छुट्टी दी जा रही। मारूति के इस प्लांट में स्थिति कितनी खराब है इसका इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि पिछले दो सप्ताह के अंदर मारुति मानेसर के 7 मजदूरों और स्टाफ़ की कोरोना वायरस से मृत्यु हो चुकी है। फिर भी मारुति प्रबंधन इसको गंभीरता से न लेकर, सावधानी के नाम खानापूर्ति कर रही है और उल्टा प्रोडक्शन के नाम पर जबरदस्ती काम ले रही है। इस वजह से मारूति में ठेके पर लगे ग्रुप फोर के सुरक्षा कर्मी बी के तिवारी की कोरोना से मृत्यु हो चुकी है।

मेहनतकश टीम से बात करते समय एक ट्रेनी वर्कर(नाम गुप्त रखा जा रहा है, ने इससे जुड़ी अपनी मजबूरी बताई। प्रवासी मज़दूर होने के कारण वो परिवार के बिना किराए के एक छोटे से कमरे में रहता है और उम्मीदों के साथ इस बड़ी संस्था में काम करने आया है। इस प्लांट में वह चार महीने से कार्यरत हैं।

फिलहाल वो 12 दिनों से बीमार है और वो लगातार अपने सुपरवाईजर और लाइन इन-चार्ज को कई बार बता चुका है कि उसे छुट्टी की सख्त जरूरत हैं। लेकिन कोई उसकी बात सुनने वाला नहीं है। उसे खांसी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द, सुंघने की शक्ति का खोना, कमजोरी – यानी कि कोरोना मरीज़ के सारे लक्षण हैं। कंपनी न तो कोरोना की जांच कर रही (सिवाए सुबह पूरे परिसर में महज़ खानापूर्ति के लिए टेम्पैरेचर चेक और सैनिटाइजेशन छोड़कर) है, ना उसे खुद डॉक्टर को दिखाने के लिए छुट्टी दे रही है।  कंपनी की पॉलिसी के तहत ट्रेनी वर्कर के लिए 1 लाख की बीमा पॉलिसी का प्रावधान है लेकिन कई बार ऐप के जरिए अर्जी लगाने के बावजूद इस मज़दूर को अभी तक वो पॉलिसी भी नसीब नही हुई है।

यह कोई एक मामला नहीं है, बल्कि कई प्लांटों में यही स्थिति है जिसकी कहीं कोई रिपोर्ट नहीं मिलेगी। मारूति में फिल्हाल 12-15 हज़ार मज़दूर और स्टाफ़ 4 शिफ़्टों (A, B, C, और जनरल) में कार्यरत है। जो रोजाना लगभग 3000 वाहनों का उत्पादन कर रहे हैं।

इस महामारी के समय उनकी जान जोख़िम में डालकर मज़दूरों से अगर काम करवाया जा रहा हैं, तो यहां उन्हें अपनी जरूरतों के लिए बोलने का अधिकार होना चाहिए और प्रबंधन और सरकार द्वारा इस बात को सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्हें छुट्टी, राशन, वेतन देकर मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना राज्य की ज़िम्मेदारी है।

इसलिए मज़दूरों के ट्रेड यूनियन अधिकार को सम्मान और गरिमा के साथ जिंदा रहने के अधिकार के साथ जोड़ते हुए मानवअधिकार में गिना जाना चाहिए।

मई 2020 में उनके पास वापस उत्पादन शुरू होने के बाद से मारुति को गाड़ियों के मूल्य में वृद्धि और कॉस्ट कटिंग और बिक्री में जबरदस्त उछाल से करीब 1785 करोड़ रूपए का मुनाफा हुआ है जो अगली तिमाही तक 23,704 करोड रुपए तक बढ़ सकता है।

प्लांट के अंदर श्रमिकों का जिस तरह से शोषण किया जा रहा है यह मुनाफा वहीं से कमाया जा रहा है।

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