श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ 28 से दो दिवसीय हड़तल पर रहेंगे देश के मज़दूर-कर्मचारी

मोदी सरकार की हठधर्मिता और मानमानेपन के कारण दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल के चलते बैंकिंग, परिवहन, रेलवे, रक्षा, कोयला, बिजली आपूर्ति आदि के साथ निजीक्षेत्र पर असर पड़ेगा।

मोदी सरकार की जन-विरोधी आर्थिक नीतियों और श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में 28 और 29 मार्च को हड़ताल होगी। इस दौरान बैंक, डाक, बीएसएनएल, एलआईसी, बिजली विभाग, परिवहन, कोल क्षेत्र से लेकर निजी क्षेत्र के मज़दूर-कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और विभिन्न क्षेत्रों की स्वतंत्र श्रमिक यूनियनों ने दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। संघर्षशील यूनियनों-संगठनों के साझा मंच मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने इस हड़ताल का सक्रिय समर्थन किया है और हड़ताल को रसमदायगी की जगह इसे निरंतर, जुझारू और निर्णायक संघर्ष में बदलने का भी आह्वान किया है। भाजपा समर्थित बीएमएस इस हड़ताल में शामिल नहीं है और खुलकर सत्ता के पक्ष में खड़ी है। उधर संयुक्त किसान मोर्चा ने हड़ताल के समर्थन की घोषणा की है।

इसके तहत श्रम संहिताएं वापस लेने, निजीकरण पर रोक लगाने, न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपए करने, बिजली संशोधन बिल 2021 को रद्द करने, स्थायी और बारह मासी कामों क लिए ठेका प्रथा बन्द करने, समान काम पर समान वेतन और अन्य भत्ते देने, बोनस और प्रॉविडेंट फंड की अदायगी पर से सभी बाध्यता सीमा हटाने, ग्रैचुइटी का भुगतान 45 दिन प्रति साल के हिसाब से करने, आशा, अंगनबाड़ी, मिड डे मील, स्वास्थ्य मिशन जैसे स्कीम वर्कर को कर्मचारी का दर्ज देने, पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली, मानरेगा में रोजगार की गारंटी, महँगाई पर लगाम लगाने आदि माँगें शामिल हैं।

बिजली कर्मचारी भी रहेंगे हड़ताल पर

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल में देशभर के बिजली कर्मचारी भी भाग लेंगे। इससे बिजली मंत्रालय ने रविवार को सभी राज्य-संचालित उपयोगिताओं और अन्य एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने और चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति और राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने की सलाह दी है।

हड़ताल को लेकर संयुक्त मंच ने एक बयान में कहा कि एस्मा के हरियाणा और चंडीगढ़ में लागू होने की आशंका के बावजूद रोडवेज, परिवहन और बिजली विभागों के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है।

बैंकों में भी रहेगी हड़ताल

बैंक संघों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए सोमवार और मंगलवार को बैंक बंद रखने का फैसला किया है। एआईबीईए, बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) तथा ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) ने 28 और 29 मार्च को हड़ताल का नोटिस दिया है। 

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि हमारी मांग सरकारी क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को रोकना और इन्हें मजबूत करना है। साथ ही फंसे कर्ज की शीघ्र वसूली, बैंको द्वारा उच्च जमा दर, उपभोक्ताओं पर निम्न सेवा शुल्क और बैंक कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली की भी मांग है।

डाक-बीमा में भी होगी हड़ताल

हड़ताल से जरूरी सेवाएं प्रभावित होंगी। डाक कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से डाकघर से जुड़ी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी। एलआईसी व जनरल एनश्योरेंस के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे, इससे बीमा से जुड़े कामकाज भी प्रभावित रहेंगे।

कुछ राज्यों में रोडवेज का होगा छक्का जाम

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े हरियाणा के अधिकतर कर्मचारी 28-29 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे। इससे दफ्तरों में कामकाज न के बराबर होगा और बसों का चक्का जाम रहेगा। प्रदेश सरकार ने दफ्तरों में कामकाज और बसों का संचालन सुचारू बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश रद्द कर दिए हैं। डीसी को जिला मुख्यालयों, रोडवेज डिपो के आसपास धारा-144 लागू करनी होगी।

मजदूर संगठनों के केंद्रीय संयुक्त मंच ने कहा कि हरियाणा और चंडीगढ़ में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू करने की धमकी के बावजूद रोडवेज, परिवहन और बिजली विभागों के कर्मियों ने हड़ताल में शामिल होने का फैसला लिया है।

झारखंड के 10 लाख निर्माण कामगार, चार लाख परिवहन मजदूर के अलावा दो लाख से अधिक स्कीम वर्कर भी हड़ताल में शामिल होंगे।

खदानों में भी हड़ताल

कोयला, इस्पात, कॉपर, बॉक्साइट व माइका सेक्टर के लाखों मजदूर हड़ताल पर रहेंगे। लौह अयस्क खदान में भी इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

रेल फेडरेशन ने दिया समर्थन

आम हड़ताल को ऑल इंडिया रेल फेडरेशन (एआईआरएफ) ने नैतिक समर्थन देने का ऐलान किया है। एआईआरएफ से जुड़े ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन (ईसीआरकेयू) के महामंत्री एसएनपी श्रीवास्तव ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में आम हड़ताल का रेल यूनियन समर्थन में है।

बिजली मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

बिजली मंत्रालय द्वारा जारी एक एडवाइजरी में कहा गया है कि सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) ने 28 मार्च को सुबह छह बजे से 30 मार्च, 2022 को शाम छह बजे तक देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। सभी राज्यों, सीपीएसयू (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स), सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी, नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर और रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर को एडवाइजरी जारी की गई है।

मंत्रालय ने कहा कि हड़ताल के दौरान सभी क्षेत्रीय और राज्य नियंत्रण कक्ष के अधिकारी सतर्क रहें और हाई अलर्ट पर रहें। साथ ही मंत्रालय ने सुरक्षित और विश्वसनीय ग्रिड संचालन सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने का भी सुझाव दिया है।

जनविरोधी-मज़दूर विरोधी नीतियाँ रद्द हों!

भारत सरकार ने वर्ष 1990 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संधि कर नई आर्थिक व औद्योगिक नीति उदारीकरण, निजीकरण, भूमंडलीकरण के जरिए देश को कारपोरेट घरानों व साम्राज्यवादी देशों को लूट के लिए खूली छूट दे दी है। सार्वजनिक प्रतिष्ठानों मसलन कोयला, बिजली, रेल, सेल, एयर इंडिया व बंदरगाह समेत जनता की सहूलियत के लिए बनाए गए स्कूलों-कालेजों, अस्पतालों, बैंक-बीमा क्षेत्रों को औने-पौने दामों में सरकार की ओर से निजी हाथों में धड़ल्ले से सौंपा जा रहा है या फिर उन्हें बंद कर दिया जा रहा है।

मोदी सरकार ने कारपोरेट घराने को लूट और ज्यादा मुनाफा के लिए मजदूरों के संघर्ष और बलिदान के बल पर बने 44 श्रम कानून को समाप्त कर उसे चार लेबर कोड में तब्दील कर दिया है। इससे मजदूरों को आठ घंटे काम की अवधि को समाप्त कर श्रम क़ानूनी अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है। चार लेबर कोड लागू होने से मालिकों को मनमाने तरीके से मजदूरों की छंटनी और शोषण को बड़े पैमाने पर करने का अधिकार मिल जाएगा।

कोरोना आपदा को पूँजीपतियों के अवसर में बदलकर मोदी सरकार मुनाफे की लूट को बेलगाम बना दिया है। देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई ने मेहनतकश अवाम का जीना दूभर कर दिया है। वहीं अदानियों-अंबनियों की पूँजी तेजी से बढ़ रही हैं।

ऐसे में यह हड़ताल जरूरी है। इसे मज़दूर वर्ग की व्यापक एकता से बड़े, सतत, जुझारू और निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ना होगा, तभी मुनाफे की इस लूट को खत्म किया जा सकता है।

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