अखिल भारतीय दो दिवसीय मज़दूर हड़ताल एक माह टली, अब 28-29 मार्च को होगी हड़ताल

पांच राज्यों में चुनाव, करोना के नाम पर सरकारी बंदिशों और फरवरी में संसद का सत्र स्थगन देखते हुए तिथि आगे बढ़ी है। रस्म अदायगी से बाहर निकलने के आह्वान के साथ मासा ने समर्थन दिया।

केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने शनिवार को कहा कि उसने महामारी की तीसरी लहर और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकारी नीतियों के खिलाफ 23-24 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल एक महीने के लिए टाल दी है।

नेशनल कन्वेंशन ऑफ वर्कर्स ने 11 नवंबर, 2021 को तय किया था कि संसद के बजट सत्र के दौरान 23-24 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल आयोजित की जाएगी।

केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों की नेताओं की 28 जनवरी को वर्चुअल मोड़ में हुई बैठक में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव, करोना के ओमीक्रोन लहर के नाम पर सरकारी बंदिशों के मद्देनजर और फरवरी में संसद का सत्र स्थगन देखते हुए फैसला किया गया कि 23-24 फरवरी की प्रस्तावित दो दिवसीय हड़ताल का तिथि विस्तार कर 28-29 मार्च 2022 को होगा।

मासा ने दिया समर्थन, रस्म अदायगी से बाहर निकलने का आह्वान

इससे पूर्व 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने ऑनलाइन मज़दूर कन्वेंशन का आयोजन कर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों की मुख़ालफ़त के साथ मज़दूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं को रद्द करने, निजीकरण-कॉरपोरेटीकरण की नीतियों को खत्म करने, महंगाई बेरोजगारी पर लगाम लगाने आदि की मांग बुलंद की। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल के आह्वान को समर्थन किया गया।

देशभर की संघर्षशील मजदूर संगठनों/यूनियनों के साझा मंच मासा ने मज़दूर आंदोलन को कुछ एक सालाना हड़तालों की रस्म अदायगी से बाहर निकाल कर निरंतर जुझारू और निर्णायक संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

केन्द्रीय यूनियनों ने तिथि बदलने का लिया निर्णय

केन्द्रीय श्रमिक संगठनों के एक संयुक्त बयान में कहा गया कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) और क्षेत्रीय कर्मचारी संघों एवं संगठनों के संयुक्त मंच की ऑनलाइन बैठक में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को 28-29 मार्च तक टालने का फैसला किया गया।

साझा बयान के अनुसार, कई राज्यों और क्षेत्रों में हड़ताल की तैयारी शुरू हो गई है, कुछ राज्यों में संयुक्त राज्य स्तरीय सम्मेलन और यहां तक कि जिला स्तरीय सम्मेलन भी हो चुके हैं। हालांकि कई राज्यों ने महामारी की तीसरी लहर के कारण हड़ताल की तैयारियों पर गंभीर बाधाओं के बारे में सूचना दी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में चौथे चरण के विधानसभा चुनाव तथा तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में स्थानीय निकाय चुनाव अगले महीने के अंत में होने हैं।

ऐसी स्थिति में आम हड़ताल की तारीखों को 28-29 मार्च, 2022 तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। उस समय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा होगा।

बयान के मुताबिक, सीटीयू का संयुक्त मंच हड़ताल को सफल बनाने के लिए मेहनतकश लोगों और उनकी यूनियनों से आह्वान करता है कि वे ‘राष्ट्र को विनाशकारी, राष्ट्र-विरोधी नीति वाले शासन से बचाएं।’’

बैठक में किसान संगठनों के साथ मिलकर पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में मिशन यूपी- उत्तराखंड का समर्थन करते हुए इस अभियान को सघन ढंग से चलाने और भारतीय जनता पार्टी को हराने के अभियान को तेज करने के कार्यक्रम चलाए जाने का आवाहन किया गया।

संघों ने कहा कि भाजपा मज़दूरों के संघर्ष से अर्जित 44 केन्द्रीय श्रम कानूनों की हत्या कर चार श्रम संहिता बनाकर मज़दूरों को पूंजी का गुलाम बनाने का कार्य किया है, किसानों के विरुद्ध कानून बनाया और समझौता लागू नहीं किया। सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों को बेंच रही है और एनएमपी के नाम पर देश के सभी ढांचागत सुविधाओं और संसाधनों को नीजी हाथों को सौंप कर राष्ट्र विरोधी, जनविरोधी कार्य कर रही है। इसलिए भाजपा के नेतृत्व की सरकारों को हराने के लिए संयुक्त अभियान सघन ढंग से चलाया जाएगा।

बैठक में श्रम संहिता को वापस लेने, पब्लिक सेक्टर का निजीकरण और डिसइनवेस्टमेंट रोकने, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन की नीतियों के माध्यम से देश की संपदा को लूटने की छूट देने और सरकारी नौकरियों को समाप्त कर अच्छे सेवा शर्त वाले नौकरियों को ही खत्म कर देने की मुखालफत तथा सरकारी क्षेत्र समाप्त कर उसमें मिलने वाले आरक्षण को भी सदा सदा के लिए समाप्त कर देने के गंभीर सरकारी षड्यंत्र के विरुद्ध बेरोजगारों के आंदोलन को भी ट्रेड यूनियन विकसित कर उसके समर्थन का निर्णय लिया।

संयुक्त मंच में इंटक, एटक एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी और स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघ एवं संगठन शामिल हैं।

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: