एक और बड़ा रेल हादसा; कम से कम 15 लोगों की मौत, कई दर्जन यात्री घायल

पश्चिम बंगाल और बिहार की सीमा के पास दार्जिलिंग में सोमवार को हुए भयावह ट्रेन हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 60 लोग घायल हो गए है। मरने वालों में मालगाड़ी के ड्राइवर व सहायक ड्राइवर और एक्सप्रेस के गार्ड भी बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, कई लोग अभी भी डिब्बों में अंदर फंसे हुए हैं। 

खबर के अनुसार सियालदाह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) को पीछे से मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि कंचनंजगा एक्सप्रेस का एक कोच मालगाड़ी पर चढ़ते हुए आसमान की ओर उठ गया। कंचनजंगा एक्सप्रेस के तीन डिब्बे बेपटरी हो गए। और तीन बोगियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

आबी तक मृतकों की वास्तविक संख्या की जानकारी नहीं है। वैसे भी यह सच है कि हर दुर्घटना के बाद सबसे पहले सरकर व सरकारी अमला मृतकों की संख्या छुपने का काम करता है।

हादसे के बाद कई ट्रेनों को रद्द किया गया है और 19 ट्रेनों का रूट भी डायवर्ट किया गया है। ये ट्रेनें न्यू जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी जंक्शन से बगडोगरा और अलूबारी रोड रूट पर डायवर्ट कर दी गई हैं।

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम था खराब

‘आज तक’ की खबर के अनुसार रेलवे सूत्रों के मुताबिक हादसे वाले रूट पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम सुबह 5.50 बजे से खराब था। पीटीआई-भाषा ने एक रेलवे सूत्र के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया, ‘ट्रेन नंबर 13174 (सियालदह कंचनजंघा एक्सप्रेस) सुबह 8.27 बजे रंगपानी स्टेशन से रवाना हुई और सुबह 5.50 बजे ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम खराब होने के कारण रानीपतरा रेलवे स्टेशन और छत्तरहाट जंक्शन के बीच रुक गई’।

एक अन्य रेलवे अधिकारी के अनुसार, जब ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी आ जाती है, तो स्टेशन मास्टर TA-912 नाम से एक लिखित नोट जारी करता है, जो लोको पायलट (ट्रेन का ड्राइवर) को सिग्नलिंग सिस्टम काम नहीं करने की स्थिति में सभी रेड सिग्नल क्रॉस करने के लिए अधिकृत करता है। सूत्र ने कहा, ‘रानीपतरा के स्टेशन मास्टर ने ट्रेन नंबर 1374 (सियालदह कंचनजंघा एक्सप्रेस) को TA-912 जारी किया था’।

रेलवे सूत्र ने कहा, ‘एक मालगाड़ी सुबह 8.42 बजे रंगपानी रेलवे स्टेशन से रवाना हुई और सिग्नल फेल होने के कारण ट्रैक पर खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के कारण कंचनजंगा एक्सप्रेस का गार्ड कोच, दो पार्सल कोच और एक जनरल सीटिंग कोच पटरी से उतर गए’।

जबकि रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने अपने शुरुआती बयान में कहा कि मालगाड़ी के ड्राइवर ने सिग्नल का उल्लंघन किया था।

जबकि रेलवे सूत्रों ने कहा कि जांच के बाद ही पता चल सकता है कि क्या मालगाड़ी को खराब सिग्नल पार करने के लिए रंगपानी के स्टेशन मास्टर ने TA-912 नोट जारी भी किया था या फिर लोको पायलट ने खुद ही रेड सिग्नल का उल्लंघन किया था।

अगर T-912 जारी भी किया जाता है, तो भी ड्राइवर को प्रत्येक खराब सिग्नल पर ट्रेन को एक मिनट के लिए रोकना होता है और 10 किमी प्रति घंटे की गति से ही आगे बढ़ाना होता है।

यूनियन ने उठाया बड़ा सवाल

लोको पायलट संगठन ने रेलवे के इस बयान पर सवाल उठाया है कि ड्राइवर ने रेड सिग्नल का उल्लंघन किया, इस वजह से हादसा हुआ।

इंडियन रेलवे लोको रनिंगमेन ऑर्गनाइजेशन (IRLRO) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहा, ‘हादसे में लोको पायलट की मौत हो चुकी है और अभी सीआरएस जांच लंबित है। जांच पूरी होने से पहले ही लोको पायलट को हादसे के लिए जिम्मेदार घोषित करना बेहद आपत्तिजनक है’।

एक के बाद एक हो रहे हादसे के बाद भारतीय रेलवे के यात्री सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मार्च 2024 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। मोदी सरकार ने यह भी शोर मचाया था कि रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए 2017 में राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाया गया है। फिर दुर्घटनाएं रुक क्यों नहीं हैं?

दरअसल मोदी सरकार ने आम जन की सवारी रेलवे को नेस्तनाबूत कर दिया है। अलग से घोषित होने वाले रेल बजट को खत्म करने के बाद से बहुत कुछ बदल गया। रेल का निजीकरण तेज हुआ, विशेष गाड़ी, तत्काल कोटा, स्लीपर कोच घटाने व एसी कोच बढ़ाने आदि के बहाने लूट बढ़ी। वेटिंग रूम महँगा, प्लेटफ़ॉर्म टिकट महँगा…।

इधर आमजन की सवारी गाड़ी दुर्दशा का शिकार बनती गई, उधर अमीरजादों के लिए बुलेट ट्रेन, बंदे भारत, नामों भारत आदि ट्रेनों का तंत्र खड़ा करने में मोदी जमात लगी हुई है। और आमजन की ट्रेनों के हादसे बढ़ रहे हैं, दुर्घटनाओं में लोग मर रहे हैं। शुरुआती शोर-शराबे के बाद मामला ठंड पड़ जाता है और एक नया हादसा लोगों की ज़िंदगियाँ छीन रहा होता है या अंग-भंग का शिकार बनाता है।

साल 2023 में रेल हादसे, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई…

  • 29 अक्टूबर, 2023: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम दो ट्रेनों के टकराने से कम से कम 14 यात्रियों की और 54 से अधिक यात्री घायल।
  • 25 अक्टूबर, 2023: आगरा में पातालकोट एक्सप्रेस के 3 जनरल कोच आग लगने से पूरी तरह जल गए। कुल 13 लोग घायल हो गए थे। कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर जान बचाई। हादसा रेल मंडल में भांडई रेलवे स्टेशन के पास शाम 3.45 बजे हुआ। उस समय ट्रेन की स्पीड 70 से 80 किमी के बीच थी।
  • 10 अक्टूबर, 2023: बक्सर में दिल्ली से गुवाहाटी जा रही नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस (12506) हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन की सभी 21 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिनमें एसी-3 टियर की दो बोगियां पलट गईं। इस हादसे में 4 यात्रियों की मौत हुई, जिनमें दो पुरुष, मां और बेटी (8) शामिल हैं।
  • 2 जून, 2023: ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे में 275 लोगों की जान चली गई थी। जिस रूट पर हादसा हुआ, वहां गाड़ियों के बीच टक्कर रोकने वाला एंटी कोलिजन सिस्टम ‘कवच’ मौजूद नहीं था। मरने वालों के आंकड़ों को हिसाब से देखें तो, ये देश का तीसरा सबसे बड़ा रेल हादसा था। हादसे की वजह गलत सिग्लन देना था।

देश की कुछ अन्य महत्वपूर्ण रेल दुर्घटनाएं

  • 13 जनवरी 2022 को बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस के कम से कम 12 डिब्बे पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार क्षेत्र में पटरी से उतर गए, जिससे नौ लोगों की मौत हो गई थी और 36 अन्य घायल हो गए थे।
  • 29 सितंबर, 2017 को मुंबई के एलफिंस्टन रोड रेलवे स्टेशन पर एक फुट ओवर ब्रिज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 29 यात्रियों की मौत हो गई थी।
  • 23 अगस्त 2017 को दिल्ली की ओर आ रही कैफियत एक्सप्रेस के नौ डिब्बे उत्तर प्रदेश के औरैया के पास पटरी से उतर गए, जिससे कम से कम 70 लोग घायल हो गए थे।
  • 18 अगस्त 2017 को पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर में पटरी से उतर गई। इसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 60 अन्य घायल हो गए थे।
  • 20 नवंबर, 2016 को कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 152 लोगों की मौत हो गई थी और 260 घायल हो गए थे।
  • 26 मई 2014 को गोरखपुर की ओर जा रही गोरखधाम एक्सप्रेस उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद स्टेशन के पास रुकी मालगाड़ी से टकरा गई थी। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हो गए थे।
  • 22 मई 2012 को एक मालगाड़ी और हुबली-बैंगलोर हम्पी एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के करीब टकरा गई थी। ट्रेन के चार डिब्बों के पटरी से उतरने और उनमें से एक में आग लगने के कारण लगभग 25 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 43 घायल हो गए थे।
  • 28 मई, 2010 को मुंबई जा रही जनेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन झारग्राम के पास पटरी से उतर गई थी और फिर एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिससे 148 यात्रियों की मौत हो गई थी।
  • 29 अक्टूबर 2005 को हैदराबाद के निकट वेलिगोंडा में पुल के बाढ़ में बह गए हिस्से को पार कर रही ट्रेन सवारों समेत पानी में समा गई। इस हादसे में लगभग 114 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए।
  • 14 दिसंबर, 2004: जम्मू तवी एक्सप्रेस और जालंधर-अमृतसर पैसेंजर ट्रेन आपस में टकरा गई थीं। ये हादसा होशियारपुर, पंजाब के पास हुआ जिसमें 39 यात्रियों की मौत हो गई थी।
  • 9 सितंबर, 2002 को हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस रफीगंज में धावे नदी पर एक पुल के ऊपर पटरी से उतर गई थी, जिसमें 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
  • वर्ष 2001 में केरल के कोझीकोड के पास कदलुंडी नदी रेल पुल हादसे में 57 से अधिक लोगों की जान गई थी, लगभग 300 लोग घायल हुए थे।
  • दो अगस्त, 1999 को ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में 285 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक घायल हो गए।
  • 26 नवंबर, 1998 को जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस पंजाब के खन्ना में फ्रंटियर गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी, जिसमें 212 लोगों की मौत हुई थी।
  • 14 मई, 1995: मद्रास-कन्याकुमारी एक्सप्रेस सलेम के पास एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें 52 लोगों की मौत हो गई थी।
  • 20 अगस्त, 1995 को फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस घटना में 305 लोगों की मौत हुई थी।
  • 27 जनवरी, 1982: आगरा के पास घने कोहरे में एक मालगाड़ी और एक एक्सप्रेस पैसेंजर ट्रेन की आमने-सामने टक्कर हो गई थी, जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी।
  • छह जून, 1981 को बिहार में पुल पार करते समय एक ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी, जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जाती है।
  • 23 दिसंबर, 1964 को पंबन-धनुस्कोडि पैसेंजर ट्रेन रामेश्वरम चक्रवात का शिकार हो गई थी, जिससे ट्रेन मे सवार 126 से अधिक यात्रियों की मौत हो गई।

1 thought on “एक और बड़ा रेल हादसा; कम से कम 15 लोगों की मौत, कई दर्जन यात्री घायल

Comments are closed.

भूली-बिसरी ख़बरे