मज़दूरों पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ 1 दिसंबर को भुवनेश्वर में मज़दूर कन्वेंशन

मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं, रेलवे, सहित सरकारी उपक्रमों को बेचने, छंटनी-बंदी-दमन के ख़िलाफ़ मासा का आह्वान

मोदी सरकार द्वारा मजदूर अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ 1 दिसंबर को भुवनेश्वर में होने वाले मज़दूर कन्वेंशन में हिस्सा लें! मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ तथा अपने अधिकारों की रक्षा हेतु जुझारू संघर्ष खड़ा करने के लिए संघर्षशील ताक़तों के साथ आगे आएं!

मोदी सरकार द्वारा श्रम सुधार के बहाने मजदूरों पर हमले तेज हो गए हैंमजदूरों के दशकों लंबे संघर्ष व कुर्बानी से हासिल मजदूरों के यूनियन गठन, जायज मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा, सम्मानजनक काम का माहौल, सामाजिक सुरक्षा आदि अधिकारों को ख़त्म किया जा रहा है, 44 श्रम क़ानूनी अधिकारों को छीन कर 4 संहिताओं में बांधकर मज़दूरों को अधिकार विहीन बंधुआ बनाया जा रहा है।

दूसरी ओर जनता के खून-पसीने से खड़े सार्वजानिक उद्योगों-निगमों को औने-पौने दाम पर देशी-विदेशी मुनाफाखोरों को सौपने का काम तेज हो गया है। इसी के साथ पूरे देश में छंटनी-बंदी तेज हो गई है। सरकारी विभागों में भी 30 साल नौकरी या 50 साल उम्र के बहाने जबरिया निकलने की भी रफ़्तार भी तेज हो गई है।

मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव करने का मूल उद्देश्य है – ‘हायर एंड फायर’ यानी देसी विदेशी कंपनियों को मज़दूर रखने निकालने की खुली छूट देना और बेहद सस्ते दाम पर मज़दूर उपलब्ध कराना, स्थाई प्रकृति के रोजगार को समाप्त करके फिक्स्ड टर्म करना, कौशल विकास के नाम पर फोकट के मजदूर नीम ट्रेनी भर्ती करना, स्थाई प्रकृति के काम में भी ठेका मज़दूर लगाने की छूट देना, समान काम समान वेतन का प्रावधान खत्म करना, मालिकों को निरीक्षण और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्यवाही के प्रावधान से मुक्त करना, मनमाने काम के घंटे तय करना, अपने अधिकारों के लिए मजदूरों को संगठित होने और यूनियन बनाने से रोकना आदि।

ख़तरनाक़ वेतन संहिता पारित हुई, रेलवे निजी हाथों में गया, आर्थिक संकट गहराने के साथ तमाम फैक्ट्रियां छँटनी-बंदी की शिकार हैं। ठीक इसी दौर में कश्मीर फिर अयोध्या मसले पर जिस तरीके से एजेण्डे लागू हुए वह इस दौर की भयावहता की बानगी। आज पूरे देश में योजनाबद्ध तरीके से धार्मिक कट्टरता और उन्माद, अंध राष्ट्रवाद और युद्धोन्माद का जहर फैलाकर पर्दे के पीछे से देश की आम जनता, खासकर मजदूरों पर इतने बड़े-बड़े हमले तेज हुए हैं।

आज रेलवे, रोडवेज, बीएसएनएल, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के मज़दूर निजीकरण के खिलाफ संघर्षरत हैं, ऑटोमोबाइल, आईटी के मज़दूर छंटनी के खिलाफ संघर्षरत हैं, आंगनवाडी, मिड-डे-मील, आशा वर्कर नियमित कर्मचारी घोषित किए जाने और मनरेगा मज़दूर काम दिए जाने व मज़दूरी बढ़ाये जाने के सवाल पर संघर्षरत हैं।

ऐसे हालत में मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) संघर्ष को नई गति व जुझारू तेवर देने की अगली कड़ी में आगामी 1 दिसंबर को उड़ीसा के भुबनेश्वर में मज़दूर कन्वेंशन कर रही है।

मासा की अपील है कि सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ तथा अपने अधिकारों की रक्षा हेतु जुझारू संघर्ष के लिए संघर्षशील ताक़तों के साथ आगे आएं!

मासा के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ मज़दूर कन्वेंशन में हिस्सा लें!

मज़दूर कन्वेंशन

1 दिसंबर, 2019, सायं 3-8 बजे तक लोहिया एकेडमी, निकट चित्रकूट आश्रम भुवनेश्वर (उडीसा)

संघर्षशील यूनियनों-संगठनों का मंच है मासा

ज्ञात हो कि मज़दूर वर्ग विरोधी इस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर मज़दूर आंदोलन का नया और जुझारू केन्द्र बनाने और मज़दूर वर्ग के मौजूदा संघर्ष को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से देश के अलग-अलग प्रदेशों के 15 मज़दूर संगठनों ने एकजुट होकर “मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान” (मासा) का गठन किया है। इस प्रक्रिया में देश की अलग अलग जुझारू यूनियनें और संघर्षरत मज़दूर भागीदारी कर रहे हैं। पिछले 3 मार्च को दिल्ली में ‘मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली व 9 सितम्बर को देशव्यापी प्रतिरोड़ दिवस कार्यक्रम संघर्ष की शुरूआती मंज़िल रहा है।

मासा की माँग है-

  1. वेज कोड-2019 को वापस करवाने सहित मज़दूर विरोधी चारो संहिताओं को रद्द करो!
  2. लम्बे संघर्षों से हासिल श्रम कानूनी अधिकारों में हुए समस्त मज़दूर विरोधी बदलाव वापस लो!
  3. श्रम कानूनों को संगठित व असंगठित सभी मज़दूरों के लिए लागू करो!
  4. ठेका प्रथा खत्म कर स्थाई काम पर स्थाई रोजगार दो!
  5. मासिक न्यूनतम वेतन 25000 रुपए करो, 15000 रुपए बेरोजगारी भत्ता और 15000 रुपए पेंशन दो!
  6. यूनियन गठित करने तथा संगठित होने के अधिकार पर हमले बंद करो!
  7. निगिमिकरण के बहाने निजीकरण की मुहीम पर रोक लगाओ!
  8. मंदी के बहाने लगातार छटनी पर रोक लगे और सबके लिए रोजगार व सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाये।
  9. फिक्स्ड टर्म, नीम ट्रेनी जैसे मनमाने रोजगार के धंधों को बंद करके स्थाई रोजगार की गारंटी दो!
  10. असंगठित क्षेत्र, मनारेगा व निर्माण मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा दो!
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