9 सितंबर 2019 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

‘नए लेबर कोड’ के जरिए मजदूर वर्ग पर मोदी सरकार का खतरनाक हमला – श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव, सिर्फ 178 रुपए दैनिक न्यूनतम मजदूरी की घोषणा, स्थाई रोजगार का खात्मा, लगातार निजीकरण और छंटनी के खिलाफ


मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर


9 सितंबर 2019 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में भाग लें! इसको सफल करें!

मोदी सरकार द्वारा श्रम सुधार के बहाने मजदूरों पर हमले तेज हो गए हैं। मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने 3 मार्च, 2019 को इसके खिलाफ संसद मार्च भी किया था। तमाम विरोधों के बावजूद उसने मज़दूर विरोधी श्रम संहिता बिल पास भी कर दिया और राष्ट्रपति का अनुमोदन भी ले लिया। अन्य संहिताएँ भी पारित होने की प्रक्रिया में हैं। इसके खिलाफ मासा ने 9 सितम्बर 2019 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस अवसर पर मासा द्वारा निकले गए पर्चे का एक हिस्सा हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं-

1947 के बाद भारत के मजदूर वर्ग पर सबसे खतरनाक हमले का यह भयावह दौर है। मालिक वर्ग और सरकार का नापाक गठबंधन खुलकर सक्रिय है। देशी विदेशी पूंजीपतियों द्वारा देश के मजदूरों का बेइंतहा शोषण करने के लिए पूंजीवादी गुलामी की जंजीरों को और भी कसा जा रहा है। इस समय बेरोजगारी 45 सालों में अपने चरम पर है। रेलवे, टेलीकॉम, ऑर्डिनेंस, खदान सहित सरकारी क्षेत्र का निजीकरण और ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल व अन्य निजी क्षेत्र में उत्पादन में गिरावट से लगातार हजारों और लाखों की तादाद में मजदूरों की छंटनी जारी है। मजदूर संगठनों को कमजोर किया जा रहा है। मालिकों के हित में मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में श्रम कानूनों में जो गंभीर बदलाव शुरू किये थे उन्हें अब अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मजदूरों के दशकों लंबे संघर्ष,कुर्बानी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के दबाव में सरकार और मालिक वर्ग को मजदूरों के यूनियन के गठन, जायज मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा, सम्मानजनक काम का माहौल, सामाजिक सुरक्षा आदि अधिकारों को कुछ मान्यता देनी पड़ी थी और 44 श्रम कानून बने थे उन्हें मोदी सरकार समाप्त करके 4 मजदूर विरोधी श्रम सहिताएं बना रही है।यह संहिताएं हैं – मजदूरी पर श्रम संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, सामाजिक सुरक्षा व कल्याण श्रम संहिता तथा व्यवसायिक सुरक्षा एवं कार्य दिशाओं की श्रम संहिता।


मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव करने का मूल उद्देश्य है – ‘हायर एंड फायर’ यानी देसी विदेशी कंपनियों को मजदूर रखने निकालने की खुली छूट देना और बेहद सस्ते दाम पर मजदूर उपलब्ध कराना, स्थाई प्रकृति के रोजगार को समाप्त करके फिक्स्ड टर्म करना, कौशल विकास के नाम पर फोकट के मजदूर नीम ट्रेनी भर्ती करना, ठेका मजदूरों की जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदार की बताकर मालिक के खिलाफ ठेका मजदूरों की मांग उठाने का कानूनी आधार खत्म करना, स्थाई प्रकृति के काम में भी ठेका मजदूर लगाने की छूट देना, समान काम समान वेतन का प्रावधान खत्म करना, मालिकों को निरीक्षण और श्रम कानूनों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्यवाही के प्रावधान से मुक्त करना, मनमाने काम के घंटे तय करना, अपने अधिकारों के लिए मजदूरों को संगठित होकर लड़ने और यूनियन बनाने से रोकना आदि।

आज पूरे देश में योजनाबद्ध तरीके से धार्मिक कट्टरता और उन्माद, अंध राष्ट्रवाद और युद्धोन्माद का जहर फैलाकर पर्दे के पीछे से देश की आम जनता, खासकर मजदूरों पर इतने बड़े-बड़े हमले तेज हुए हैं।

आज रेलवे, रोडवेज, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के मजदूर निजीकरण के खिलाफ संघर्षरत हैं, ऑटोमोबाइल, आईटी के मजदूर छंटनी के खिलाफ संघर्षरत हैं, आंगनवाडी, मिड-डे-मील, आशा वर्कर पक्का कर्मचारी घोषित किए जाने और मनरेगा मजदूर काम दिए जाने व मजदूरी बढ़ाये जाने के सवाल पर संघर्षरत हैं।

  • श्रम कानूनों में सभी मजदूर विरोधी बदलाव रद्द करवाए जानेऔर मजदूर हितों में कानूनी सुधार के लिए
  • श्रम कानूनों को संगठित-असंगठित-अनौपचारिक सभी मजदूरों के लिए लागू करवाने के लिए
  • महीने में 25000 रुपए न्यूनतम मजदूरी, 15000 रुपए बेरोजगारी भत्ता और 15000 रुपए पेंशन के लिए
  • ठेका प्रथा खत्म करके स्थाई काम पर स्थाई मजदूरी के लिए
  • 8 घंटे काम और डबल ओवरटाइम, सामाजिक सुरक्षा, संगठित होने के अधिकार के लिए-

मासा की अपील है कि सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ तथा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपने- अपने इलाके में, कंपनी में प्रचार करें, मजदूरों को सचेत करें, संगठित करें और संघर्ष के लिए तैयार करें।

मासा के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ आगामी 9 सितंबर 2019 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लें।

इसे भी देखें- https://mehnatkash.in/tag/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be/

इसे भी देखें- https://www.youtube.com/watch?time_continue=39&v=e_dfM8gslv0

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान ( मासा)

मासा द्वारा जारी पर्चे से

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