मज़दूरों ने गेट पर वोल्टास प्रबंधन का फूंका पुतला

डीएलसी की वार्ता में भी मज़दूरों की नहीं हुई कार्यबहाली, मज़दूरों ने जताया आक्रोश

पंतनगर (उत्तराखंड), 26 नवम्बर। 9 मजदूरों की गैरकानूनी गेट बंदी के संदर्भ में आज उप श्रम आयुक्त उधम सिंह नगर के समक्ष वोल्टास प्रबंधन की हठधर्मिता आज भी कायम रहने और वेतन भुगतान व कार्यबहाली ना करने से आक्रोशित वोल्टास के मज़दूरों ने कंपनी के गेट पर वोल्टास प्रबंधन का पुतला दहन किया और अपना आक्रोश प्रकट किया।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2017 में वोल्टास इम्पलाइज यूनियन द्वारा दिए गए माँग पत्र पर समझौता करने की जगह प्रबंधन लगातार मज़दूरों का दमन करता रहा है। सुविधाओं और वेतन में गैरकानूनी कटौती के साथ एक श्रमिक की गैरकानूनी निलंबन कर गेट बंदी कर दी थी और कई ठेका श्रमिकों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अपने दमन को बढ़ाते हुए प्रबंधन ने पिछले 25 सितंबर से यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री व पूर्व अध्यक्ष सहित आठ और श्रमिकों की गैरकानूनी गेट बंदी कर दी। तब से मज़दूरों का वेतन भी उसने नहीं दिया। इसके खिलाफ मज़दूर 2 महीने से कंपनी गेट पर धरनारत हैं।

इस बीच श्रम विभाग में एएलसी के बाद डीएलसी के समक्ष वार्ताएं शुरू हुई, लेकिन श्रम अधिकारियों के रुख से प्रबंधन के मनोबल और बढ़ते गए। उसी का परिणाम था कि आज की वार्ता भी असफल हुई। इससे पूर्व डीएलसी माँग पत्र का विवाद श्रम न्यायलय भेजकर प्रबंधन के मनसूबे पूरे कर चुके हैं।

सारे तथ्य स्पष्ट रूप से प्रबंधन की गैर कानूनी कार्रवाई को प्रमाणित करते हैं। श्रम अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि बगैर किसी कानूनी प्रावधान या प्रक्रियाओं को पूरा किए 8 श्रमिकों की गेट बंदी हुई और उनके वेतन काटे जा रहे हैं। जबकि प्रबंधन कथित ले-ऑफ़ की मनगढ़ंत बात कर रहा है। इसके बावजूद प्रबन्धन पर कोई कार्यवाही ना करने और मज़दूरों को न्याय ना मिलने से श्रम विभाग की भूमिका लगातार संदेहास्पद बनी हुई है।

मज़दूरों ने श्रम विभाग पर प्रबंधन से मिलीभगत का आरोप भी लगाया था, इसके बावजूद श्रम अधिकारियों की भूमिका नकारात्मक बनी हुई है। ऐसे में मजदूरों में आक्रोष बढ़ना स्वाभाविक है।

आज के पुतला दहन कार्यक्रम में मज़दूरों ने जोशोखरोश के साथ भागीदारी की और प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द सभी मज़दूरों की कार्यबहाली सहित सारी समस्याओं का वह समाधान नहीं करता है तो मज़दूरों को अपना आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

%d bloggers like this: