आंध्रप्रदेश में भीषण ट्रेन हादसा, 14 की मौत, 54 घायल: एक माह में तीसरा बड़ा हादसा

दुर्घटना में वास्तविक मौत के आँकड़े कभी सामने नहीं आते। बंदे भारत की जोर अजमाइश के बीच 5 माह में चौथे ट्रेन हादसे का सबक क्या है? किस ओर जा रही है मोदी रेल की गाड़ी?
मोदी सरकार ने आम जन की सवारी रेलवे को नेस्तनाबूत कर दिया है। अलग से घोषित होने वाले रेल बजट को खत्म करने के बाद से बहुत कुछ बदल गया। रेल का निजीकरण तेज हुआ, विशेष गाड़ी, तत्काल कोटा, स्लीपर कोच घटाने व एसी कोच बढ़ाने आदि के बहाने लूट बढ़ी। वेटिंग रूम महँगा, प्लेटफ़ॉर्म टिकट महँगा…।
इधर आमजन की सवारी गाड़ी दुर्दशा का शिकार बनती गई, उधर अमीरजादों के लिए बुलेट ट्रेन, बंदे भारत, नामों भारत आदि ट्रेनों का तंत्र खड़ा करने में मोदी जमात लगी हुई है। और दुर्घटनाओं में लोग मर रहे हैं। विगत एक माह में तीसरा और 5 माह में चौथा ट्रेन हादसा सामने है।
ताजा घटना में आंध्र प्रदेश के विजयानगरम से रायगड़ा जा रही ट्रेन के उसी मार्ग पर विशाखापत्तनम से पलासा जा रही दूसरी ट्रेन से टकराने के बाद डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में कम से कम 14 यात्रियों की जान गई है। जिन्हें अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश में हावड़ा-चेन्नई रेल लाइन पर रविवार को दो यात्री ट्रेन की टक्कर में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। मृतकों में पलासा पैसेंजर ट्रेन के गार्ड एम श्रीनिवास राव (58) तथा रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट (चालक) एस एम एस राव (52) और उनके सहायक चिरंजीवी (29) हैं।
जबकि 54 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों को विशाखापत्तनम और विजयनगरम के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पूर्व तट रेलवे (ईसीआर) के अधिकारियों ने बताया कि रविवार शाम लगभग सात बजे विशाखापत्तनम से लगभग 40 किलोमीटर दूर कांतकपल्ले में पलासा पैसेंजर ट्रेन ने रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे उसके तीन डिब्बे पटरी से उतर गए। दुर्घटना स्थल पर सभी तीन लाइन में बिजली तार, रेलवे विद्युत बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

जानकारी के अनुसार 08532 विशाखापत्तनम-पलासा पैसेंजर ट्रेन विशाखापत्तनम से अपने समय पर निकली। 08504 विशाखापत्तनम-रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन अपने समय से 15 मिनट देरी से निकली। कांटकापाली व अलमांडा स्टेशन से 200 मीटर की दूरी पर विशाखापत्तनम-पलासा पैसेंजर ट्रेन खड़ी हो गई। इसी दौरान इसी ट्रैक पर विशाखापत्तनम-रायगडा पैसेंजर ट्रेन ने विशाखापत्तनम-पलासा पैसेंजर ट्रेन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विशाखापत्तनम-पलासा पैसेंजर ट्रेन के दो डिब्बे बेपटरी हो गए। विशाखापत्तनम-रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन का इंजन बेपटरी हो गया।
समाचार एजेंसी पीटीआई को मिली रिपोर्ट के मुताबिक, ख़राब ऑटो सिग्नल पर ट्रेन को दो मिनट के लिए रुकना चाहिए था और फिर 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे टक्कर हुई।
जिस लाइन पर ये ट्रेन हादसा हुआ है, उसे हावड़ा-चेन्नई लाइन के तौर पर जाना जाता इस दुर्घटना के बाद पूर्व तट रेलवे (ईसीआर) और दक्षिणी मध्य रेलवे ने कई ट्रेन को रद्द कर दिया या उनका मार्ग परिवर्तित कर दिया गया या उनके समय में परिवर्तन किया गया है।

एक माह में तीसरा, चार माह में चौथा हादसा
एक के बाद एक रेल हादसे और यात्रियों की मौत आम बात हो चुकी है। जून माह में उड़ीसा के बालेश्वर जिला अंतर्गत बाहानगा स्टेशन से दो किमी दूर हुए भयावह रेल दुर्घटना के बाद महज इस अक्टूबर माह में यह तीसरी दुर्घटना मौत का तांडव लेकर आई है।

2023 में विगत चार माह में हुई इन दुर्घटनाओं पर एक नजर-
- 29 अक्टूबर: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम दो ट्रेनों के टकराने से कम से कम 14 यात्रियों की और 54 से अधिक यात्री घायल।
- 25 अक्टूबर: आगरा में पातालकोट एक्सप्रेस के 3 जनरल कोच आग लगने से पूरी तरह जल गए। कुल 13 लोग घायल हो गए थे। कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर जान बचाई। हादसा रेल मंडल में भांडई रेलवे स्टेशन के पास शाम 3.45 बजे हुआ। उस समय ट्रेन की स्पीड 70 से 80 किमी के बीच थी।
- 10 अक्टूबर: बक्सर में दिल्ली से गुवाहाटी जा रही नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस (12506) हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन की सभी 21 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिनमें एसी-3 टियर की दो बोगियां पलट गईं। इस हादसे में 4 यात्रियों की मौत हुई, जिनमें दो पुरुष, मां और बेटी (8) शामिल हैं।
- 2 जून: ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे में 275 लोगों की जान चली गई थी। जिस रूट पर हादसा हुआ, वहां गाड़ियों के बीच टक्कर रोकने वाला एंटी कोलिजन सिस्टम ‘कवच’ मौजूद नहीं था। मरने वालों के आंकड़ों को हिसाब से देखें तो, ये देश का तीसरा सबसे बड़ा रेल हादसा था।

देश की कुछ महत्वपूर्ण रेल दुर्घटनाएं
- 13 जनवरी 2022 को बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस के कम से कम 12 डिब्बे पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार क्षेत्र में पटरी से उतर गए, जिससे नौ लोगों की मौत हो गई थी और 36 अन्य घायल हो गए थे।
- 29 सितंबर, 2017 को मुंबई के एलफिंस्टन रोड रेलवे स्टेशन पर एक फुट ओवर ब्रिज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 29 यात्रियों की मौत हो गई थी।
- 23 अगस्त 2017 को दिल्ली की ओर आ रही कैफियत एक्सप्रेस के नौ डिब्बे उत्तर प्रदेश के औरैया के पास पटरी से उतर गए, जिससे कम से कम 70 लोग घायल हो गए थे।
- 18 अगस्त 2017 को पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर में पटरी से उतर गई। इसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 60 अन्य घायल हो गए थे।
- 20 नवंबर, 2016 को कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 152 लोगों की मौत हो गई थी और 260 घायल हो गए थे।
- 26 मई 2014 को गोरखपुर की ओर जा रही गोरखधाम एक्सप्रेस उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद स्टेशन के पास रुकी मालगाड़ी से टकरा गई थी। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हो गए थे।
- 22 मई 2012 को एक मालगाड़ी और हुबली-बैंगलोर हम्पी एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के करीब टकरा गई थी। ट्रेन के चार डिब्बों के पटरी से उतरने और उनमें से एक में आग लगने के कारण लगभग 25 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 43 घायल हो गए थे।
- 28 मई, 2010 को मुंबई जा रही जनेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन झारग्राम के पास पटरी से उतर गई थी और फिर एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिससे 148 यात्रियों की मौत हो गई थी।
- 29 अक्टूबर 2005 को हैदराबाद के निकट वेलिगोंडा में पुल के बाढ़ में बह गए हिस्से को पार कर रही ट्रेन सवारों समेत पानी में समा गई। इस हादसे में लगभग 114 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए।
- 14 दिसंबर, 2004: जम्मू तवी एक्सप्रेस और जालंधर-अमृतसर पैसेंजर ट्रेन आपस में टकरा गई थीं। ये हादसा होशियारपुर, पंजाब के पास हुआ जिसमें 39 यात्रियों की मौत हो गई थी।
- 9 सितंबर, 2002 को हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस रफीगंज में धावे नदी पर एक पुल के ऊपर पटरी से उतर गई थी, जिसमें 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
- वर्ष 2001 में केरल के कोझीकोड के पास कदलुंडी नदी रेल पुल हादसे में 57 से अधिक लोगों की जान गई थी, लगभग 300 लोग घायल हुए थे।
- दो अगस्त, 1999 को ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में 285 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक घायल हो गए।
- 26 नवंबर, 1998 को जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस पंजाब के खन्ना में फ्रंटियर गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी, जिसमें 212 लोगों की मौत हुई थी।
- 14 मई, 1995: मद्रास-कन्याकुमारी एक्सप्रेस सलेम के पास एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें 52 लोगों की मौत हो गई थी।
- 20 अगस्त, 1995 को फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस घटना में 305 लोगों की मौत हुई थी।
- 27 जनवरी, 1982: आगरा के पास घने कोहरे में एक मालगाड़ी और एक एक्सप्रेस पैसेंजर ट्रेन की आमने-सामने टक्कर हो गई थी, जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी।
- छह जून, 1981 को बिहार में पुल पार करते समय एक ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी, जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जाती है।
- 23 दिसंबर, 1964 को पंबन-धनुस्कोडि पैसेंजर ट्रेन रामेश्वरम चक्रवात का शिकार हो गई थी, जिससे ट्रेन मे सवार 126 से अधिक यात्रियों की मौत हो गई।
रेलवे की बढ़ती दुर्दशा
देश में मोदी युग में एक तरफ सेमी व हाई स्पीड ट्रेनों की बखान हो रही है, वहीं आम जन की ट्रेनें लगातार दुर्दशा की शिकार बन रही हैं। हालात ये हैं कि कोविड के दौरान से अबतक सामान्य ट्रेनों का संचालन लगातार बुरी स्थिति में पहुंचता गया है। कई बार ट्रेनें अपनी दिशा भटक गईं और अपने गंतव्य से हजारों मील दूर दूसरी जगह पहुँच गईं।
देश के सबसे बड़े इस सार्वजनिक क्षेत्र को निजीकरण की ओर तेजी से धकेल जा रहा है।
हालत ये हैं कि बंदे भारत, नमो भारत जैसी ट्रेनों पर मोदी सरकार का जोर है, हालांकि वे भी दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं। जबकि सामान्य ट्रेनें राम भरोसे हैं। यह तब है जब पूरा तंत्र अत्याधुनिक माध्यमों से लैस बताया जा रहा है।
दूसरी ओर भारतीय रेलवे में कर्मचारियों की भारी कमी के चलते रनिंग स्टाफ तक को उचित आराम नहीं मिलता है। जिसके चलते कर्मचारी भारी शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दबाव में रहते हैं। रेलवे में नई स्थाई नियुक्तियों की जगह अंधाधुंध आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी अप्रशिक्षित मज़दूरों से बेहद तकनीकी व सुरक्षा कार्यों में लगाया जाता है।
सरकार के घड़ियाली आँसू
घटना के बाद हर बार की तरह देश के प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, मुख्यमंत्री शोक-संवेदना जाता रहे हैं, मुआवाजों और जांच की घोषणाएं हो रही हैं। हालांकि तमाम आम यात्रियों की लाश भी शायद ना मिले! हर हादसे की तरह आंकड़ों में मृतकों की संख्या घटाने का का प्रयास जारी है।
फिलहाल वक़्त के साथ सब ठंड पड़ जाएगा। और फिर एक नई दुर्घटना के साथ यही सब दुहराया जाएगा। सवाल यह है कि यह सब आखिर कब तक होता रहेगा?
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