विकट बारिश में लुकास टीवीएस मज़दूरों का धरना स्थल पानी में डूबा, लेकिन प्रशासन बना रहा अंधा

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। भयावह बारिश का कहर चौतरफा जारी है। इन्हीं हालात में गांधी पार्क रूद्रपुर में धरनारत लुकास टीवीएस के मज़दूरों का संघर्ष के 140वें दिन सोमवार, 8 जुलाई को पूरा धरना स्थल, टेंट, बिस्तर, लंगर सब कुछ पानी में डूब गया। लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार और उसका प्रशासन अंधा-बहरा बना रहा, मज़दूरों की कोई सुध लेने वाला नहीं था।

उल्लेखनीय है कि अपनी कार्यबहाली, यूनियन की मान्यता और मांग पत्र के समाधान के लिए लुकास टीवीएस के साथी लंबे समय से संघर्षरत हैं। और उनके न्याय संगत मांगों के समाधान की जगह श्रम विभाग और प्रशासन चुप्पी मारे बैठा है। इसबीच बारिश से तबाही के बीच सोमवार को ही एएलसी की मध्यस्थता में सम्पन्न वार्ता प्रबंधन की हठधर्मिता से फिर बेनतीजा रही।

मज़दूरों के दमन के लिए तत्पर प्रशासन इस संकट में कहाँ है?

यह वही जिला प्रशासन है, वही पुलिस है जो लोकसभा चुनाव की तिथियां घोषित होते ही चुनाव आचार संहिता के बहाने लुकास टीवीएस के मज़दूर के धरना को जबरिया उठाव दिया था। लेकिन आज झाँकने तक नहीं आया कि मज़दूर किस हालत में हैं।

ध्यान रहे कि चुनाव के दौरान मज़दूरों का धरना स्थगित रहा लेकिन, बेखौफ प्रबंधन ने यूनियन से जुड़े सभी मज़दूरों को गैर कानूनी रूप से बर्खास्त कर दिया। सरकार व प्रशासन के नाक के नीचे यह सब कुछ चलता रहा। उधर एएलसी महोदय मज़दूरों को गुमराह करते रहे और चोरी से यूनियन के विवाद को श्रम न्यायालय भेज दिया।

आज जब बारिश की मार से मज़दूर भयानक रूप से पीड़ित थे, खुद भीग रहे थे, समान भीग रहा था, ना रुकने का ठिकाना, न खाने का ठिकाना। तो वही प्रशासन मज़दूरों को आपदा राहत के लिए भी नहीं दिखा! वे खुश होंगे कि मज़दूर परेशान होकर बैठ जाएंगे!

स्पष्ट है कि राज्य की भाजपा सरकार, उसकी पुलिस, उसका प्रशासन, उसके श्रम अधिकारी मालिकों की सेवा में तो पूरी तरह से तत्पर हैं और मज़दूरों को दुर्दशा की ओर धकेल दिए हैं।

जाहिरात तौर पर यह एक बेहद कठिन चुनौतीपूर्ण दौर है। एक कारखाने के थोड़े से मज़दूरों के लिए मलिक-प्रशासन-सरकार के गठबंधन से जूझना कठिन है। फिर भी मज़दूर पूरे हिम्मत के साथ डटे हुए हैं। ऐसे में आंदोलन को जुझारू रूप से आगे बढ़ाने और इलाके के अन्य मज़दूरों के साथ मिलकर संघर्ष को मुकाम पर पहुंचाना वक़्त की जरूरत है।

यह बुनियादी हक़ का संघर्ष है!

ज्ञात हो कि लुकास टीवीएस के मज़दूरों ने अपनी यूनियन बनाई थी। वह यूनियन सत्ताधारी पार्टी से जुड़ी भारतीय मजदूर संघ से संबंध है। लेकिन प्रबंधन खुलेआम मज़दूरों को डराता धमकता रहा, यूनियन खत्म करने का दबाव बनाता रहा, यूनियन के तमाम नेताओं और उससे जुड़े मज़दूरों को अविधिक रूप से बर्खास्त करता रहा। लेकिन सरकार के क्या कान पर जूं तक नहीं देखी रेंगी।

यही नहीं श्रम अधिकारी द्वारा दो साल पूर्व अपने ही कराए गए समझौते का अनुपालन नहीं कराया जा सका। ऐसे में मजबूरी में मज़दूरों ने श्रम भवन पर धरना शुरू किया। 70 दिन लगातार धरना के बाद भी समाधान न निकालने और प्रबंधन की बढ़ती ज्यादती से तंग मज़दूर 5 फरवरी, 2024 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।

इधर न्याय दिलाने की जगह पर पुलिस और प्रशासन ने श्रम भवन से मज़दूरों का धरना जबरिया उठवा दिया और गांधी पार्क में ठेल दिया। फिर चुनाव आचार संहिता के बहाने गांधी पार्क से भी मज़दूरों को हटाया। चुनाव के बाद पुनः धरना शुरू हुआ। अब जब मज़दूर पानी में डूब-उतरा रहे थे, तो प्रशासन की संवेदनहीनता इस कदर बनी रही कि मज़दूरों की राहत के लिए भी कहीं नहीं दिखा।

बारिश से तबाही के ठीक पूर्व धरनारत मज़दूर

“हम मज़दूर हैं, कोई भी आफत हमारे मनोबल को नहीं डिगा सकता”

लुकास टीवीएस मज़दूर संघ के महामंत्री बसन्त गोस्वामी ने हालात का बयान करते हुए बताया कि पिछले 140 दिन से चल रहे धरने के दौरान शासन-प्रशासन के साथ मौसम के भी विकट मार से मज़दूर जूझते हुए भी आंदोलन में जुटे हुए हैं और रात-दिन का धरना जारी है।

लेकिन कई दिनों से जारी बारिश से पूरा गांधी पार्क जलमग्न हो गया। धरने के टेंट में पानी भर गया, जिससे दरी-बिस्तर, बर्तन आदि पूरी तरह से पानी में डूब गया। मज़दूर बमुश्किल भीगते हुए अपने अस्तित्व को बचाते रहे।

यूनियन उपाध्यक्ष राजेश चन्द्र ने श्रमिकों का मनोबल बढ़ाया और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आखिर कब होगा श्रमिक समस्याओं का समाधान? कहाँ गयी वह सरकार जो प्रदेश में हर बच्चें को शिक्षा देने के खोखले वादे करती है, लेकिन संघर्षरत श्रमिक अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं दे पा रहे हैं, और वह खामोश है।

हरीश चंद्र ने कहा कि सरकार ने पहले श्रमिकों का पहाड़ों से पलायन कराया, फिर जिन उद्योगपतियों को संवारा आज इनके उधोग अच्छे चल रहे और वर्षों से जिन श्रमिकों ने अपना बहुमूल्य समय दिया आज उन्हीं श्रमिकों को नौकरी से निकाला जा रहा है। उन्होंने पूछा कि वर्तमान सरकार के पैर क्यो श्रमिक समस्याओं का समाधान कराने में फूल रहे हैं?

अध्यक्ष मनोहर सिंह मनराल ने कहा कि हम मज़दूर हैं, कोई भी आफत हमारे मनोबल को नहीं डिगा सकता। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कि हमें न्याय नहीं मिलता, सभी मज़दूरों की कार्यबहाली, यूनियन की मान्यता और हमारे न्याय संगत मांगों का समाधान नहीं हो जाता।

धरना स्थल ठीक करते मज़दूर, सहयोग में आए अन्य फैक्ट्री के मज़दूर

इस बीच धरना स्थल को फिर से तैयार करने में यूनियन पदाधिकारियों के साथ दीवान सिंह, देवेन्द्र मनराल, बसन्त सिंह, अर्जुन सिंह, महावीर सिंह, बलवन्त सिंह, दीपक सिंह, प्रदीप कुमार, मातवर सिंह, विनोद सिंह, सुरेन्द्र सिंह आदि मज़दूर लगे हुए हैं।

इस बीच इंटरार्क मज़दूर संगठन के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने गुरुद्वारा से मज़दूरों के लिए लंगर की व्यवस्था कारवाई। श्रमिक संयुक्त मोर्चा और उससे जुड़ी यूनियन तथा मज़दूर संगठन संकट की इस घड़ी में पीड़ित मज़दूरों के समर्थन-सहयोग में खड़े रहे।

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