मध्यप्रदेश : पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने के लिए आंदोलन होगा तेज -कर्मचारी संगठन

कर्मचारी आंदोलन की तैयारी में जुटे संगठन। कर्मचारी पुरानी पेंशन को अपना मानते हैं। जबकि नई पेंशन योजना से कुछ लाभ नहीं हो रहा है, यह मानवीय अधिकारों के विपरीत है।

भोपाल पुरानी पेंशन प्रणाली की बहाली के लिए कर्मचारी एकजुट हो रहे हैं। इसके लिए वाट्सएप समूह समेत इंटरनेट मीडिया के अन्‍य माध्‍यमों का भी सहारा लिया जा रहा है। समूह आडियो काल पर भी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में आने के बाद कर्मचारी पुरानी पेंशन व्‍यवस्‍था पुन: लागू करने की मांग को लेकर कभी भी आंदोलन का बिगुल फूंक सकते हैं।

कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि पुरानी पेंशन को अपना अधिकार बता रहे हैं। यह भी कह रहे हैं कि नई पेंशन योजना से कुछ लाभ नहीं हो रहा है, बल्कि जीवन भर शासकीय विभागों में काम करने के बाद बूढ़ापे में नाममात्र की पेंशन मिलती है जिसमें इलाज तक नहीं करवा पाते हैं। बच्चों के विवाह का खर्च उठाना तो दूर की बात है। निष्ठा से काम करने वाले कर्मचारियों के सामने पहाड़ जैसी मुसीबतें खड़ी हो जाती हैं।

राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संगठन के जितेंद्र सिंह, अपाक्स के अध्यक्ष भुवनेश कुमार पटेल, मप्र कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडेय, स्थायीकर्मी कर्मचारी कल्याण संघ के शारदा सिंह परिहार, मप्र श्रमिक संघ के अध्यक्ष आमोद तिवारी, प्रतिनिधि जफर अली, लघु वेतन कर्मचारी संघ के महेंद्र शर्मा का कहना है कि यदि कर्मचारी जीवन भर किसी निकाय में काम करेगा तो उम्र के अंतिम पड़ाव में आर्थिक मदद के लिए कहा जाएगा। इन कर्मचारियों को नई पेंशन योजना के भरोसे बिल्कुल भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यह मानवीय अधिकारों के विपरीत है।

वहीं इस संदर्भ में मप्र संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि संविदा और आउटसोर्स पर रखे जा रहे कर्मचारियों के हितों की चिंता भी करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शासकीय विभागों में तेजी से कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन अनुपात में भर्तियां नहीं हो रही है। विभागों में पद खाली है। काम के बोझ के कारण मौजूदा कर्मचारी दबे हुए हैं। कुछ विभागों में संविदा और आउटसोर्स पर कर्मचारियों को रखा जा रहा है। जिन्हें पर्याप्त और महंगाई के अनुपात में वेतन नहीं मिल रहा है। जब कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं तो उन्हें पेंशन नहीं मिलती है। यह शोषण है और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति को उसके आर्थिक लाभ से वंचित रखने के कारण कई तरह की स्थिति पैदा होती है और उसका खामियाजा संबंधित के परिवार को उठाना पड़ता है।

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