जुझारू, निरंतर व निर्णायक संघर्ष के आह्वान के साथ एमएसके उत्तराखंड का सम्मेलन सम्पन्न

मज़दूर सहयोग केंद्र, उत्तराखंड का पहला सम्मेलन

किसान आंदोलन की सफलता के बीच मज़दूर सहयोग केंद्र के सम्मेलन में मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं, निजीकरण, दमन आदि के विरोध के साथ मज़दूर हक़ की आवाज़ बुलंद हुई।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। 21 नवंबर, 2021 को रुद्रपुर में मज़दूर सहयोग केंद्र का पहला सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन में मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेने, सरकारी सार्वजनिक संम्पत्तियो को बेचना बन्द करने, जनविरोधी कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा के अनुपालन सुनिश्चित कर किसान संकट का मुकम्मल समाधान करने, मज़दूर नेताओं, राजनीतीक कार्यकर्ताओं का दमन बन्द करने, फर्जी आरोपों में बंद मज़दूरों व नेताओं की रिहाई,आदि का प्रस्ताव पारित किया।

मज़दूर सहयोग केंद्र, सन 2014 में अपनी स्थापना के समय से इस क्षेत्र के संघर्षरत ट्रेड यूनियनों और मज़दूर आंदोलनों के समर्थन में निरंतर सक्रीय रहा है।

नई जिम्मेदारियों के साथ नई कार्यकारिणी गठित

सम्मलेन के आंतरिक सत्र द्वारा केंद्र की नयी कार्यकारिणी का चयन हुआ जिसमें संरक्षक अमर सिंह, अध्यक्ष मुकुल, कार्यकारी अध्यक्ष दीपक सनवाल, उपाध्यक्ष दर्शन लाल, महासचिव धीरज जोशी, संयुक्त सचिव राजू सिंह, कोषाध्यक्ष महेंद्र राणा, प्रचार सचिव हरेंदर सिंह, संगठन सचिव चन्द्रमोहन लखेड़ा व कार्यालय सचिव गोविन्द सिंह का निर्वाचन किया गया ।

मज़दूर संगठन, ट्रेड यूनियन और सामाजिक कर्मी के साथ किसान संगठन भी शामिल

दोपहर 1 बजे से दुर्गा मंदिर परिसर, रविन्द्र नगर में आयोजित सम्मलेन के खुले सत्र में देश, प्रदेश व क्षेत्र के विभिन्न मज़दूर संगठन, ट्रेड यूनियन और सामाजिक कर्मी शरीक हुए।

किसान संघर्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रसिद्द जनकवि और भारतीय किसान यूनियन (उग्रहाँ) के उत्तराखंड राज्य महासचिव बल्ली सिंह चीमा ने संबोधित किया और जन गीत प्रस्तुत किए। साथ ही किसान-मज़दूर एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

सम्मेलन में भागीदारी के लिए उत्तराखंड और राज्य के बहार से भी विभिन्न मज़दूर संगठनों और यूनियनों के प्रतिनिधि पहुंचे। इनमें मज़दूर सहयोग केंद्र गुड़गांव से अमित; जन संघर्ष मंच हरियाणा से सोमनाथ; इंकलाबी मज़दूर केंद्र से दिनेश; मज़दूर पत्रिका बिहार से संतोष; इफ्टू सर्वहारा से सिद्धांत; देश विदेश पत्रिका से मोहित; मारुती सुजुकी वर्कर्स यूनियन, प्रोविजनल कमेटी, मानेसर, गुड़गाँव से राम निवास; डाइडो यूनियन, नीमराना (राजस्थान) से अमित; क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से शक्ति सरकार; वर्कर्स यूनिटी से संदीप व उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी सी तिवारी ने सम्मलेन को संबोधित किया।

क्षेत्रीय यूनियनों में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर, रॉकेट रिद्धि सिद्धि कर्मचारी संघ, महिंद्रा सीआईई श्रमिक संगठन, नेस्ले कर्मचारी संगठन, पारले मज़दूर संघ, एडविक कर्मचारी संगठन, करोलिया लाइटिंग इंप्लाइज यूनियन, डेल्टा एम्पलाई यूनियन, बीसीएच मज़दूर संघ, एचपी मज़दूर संघ, भगवती श्रमिक संगठन, भगवती इम्पालाइज यूनियन, वोल्टास इम्पालाइज यूनियन, बीमा कर्मचारी संघ हल्द्वानी डिवीजन, गुजरात अंबुजा कर्मकार यूनियन सितारगंज, एलजीबी वर्कर्स यूनियन, एचसीएन, ऑटो लाइन इम्पालाइज यूनियन, महिंद्रा कर्मकार यूनियन, इंटरार्क मज़दूर संगठन पंतनगर, इंटरार्क मज़दूर संगठन किच्छा, आनंद निशिकावा इम्पालाइज यूनियन, रॉकेट इंडिया यूनियन आदि ने भागीदारी की।

इसके अलावा उत्तराखंड छात्र संगठन, कलेक्टिव छात्र संगठन दिल्ली, सीपीआई मज़दूर किसान संघर्ष समिति, एमकेयू आदि के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

जुझारू किसान संघर्षों से प्रेरणा लेकर मज़दूर आंदोलन को मजबूत करने पर बल

वक्ताओं ने कहा कि नवउदारवादी दौर में कॉरपोरेट पूँजी और फासीवाद के सहमेल ने मुनाफे की लूट और जनता में उन्माद को बेलगाम बनाया, जिससे राष्ट्रवाद के नाम पर देश के भगवाकरण और विकास के नाम पर पूँजी की लूट को खुली छूट की राह आसान हुई। इसीलिए मोदी सरकार मज़दूरों के हकों को छीनने, देश के उद्योगों-संपत्तियों को बेचने व महँगाई-बेरोजगारी को बेलगाम बना दिया है।

वक्ताओं ने जुझारू किसान संघर्षों से प्रेरणा लेकर मज़दूर आंदोलन को मजबूत करने पर बल दिया और हक़ के लिए मज़दूरों के संघर्षों को निरंतर, जुझारू और निर्णयक संघर्ष की धारा से जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया।

6 प्रस्ताव पारित

सम्मलेन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए नए श्रम कानूनों को रद्द कराने के साझा संघर्ष को और तेज़ करने की प्रतिज्ञा ली। साथ ही उन्होंने काले कृषि कानून और यूएपीए जैसे दमनकारी काले कानूनों को रद्द करने की मांग उठाई। सम्मलेन ने सरकारी संपत्ति व उद्योगों के निजीकरण और मज़दूर, किसान व जानवदी संघर्षों पर दमन के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद किया।

साथ ही, सम्मेलन ने उत्तराखंड और देश के मज़दूरों को जाति-धर्म-क्षेत्र के आधार पर बांटने की कोशिशों के प्रति मज़दूरों को सतर्क और सचेत करने का कार्यभार लिया व राज्य में सिडकुल क्षेत्र में चल रहे तमाम मज़दूर संघर्षों को समर्थन जताया।

कार्यक्रम का संचालन दीपक सनवाल व धीरेन्द्र जोशी ने की। प्रस्ताव अमर सिंह ने पढ़ा।

इस अवसर पर विभिन्न संगठनों की ओर से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगी थी। साथ ही मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा नई श्रम संहिताओं पर पुस्तिका और MSK के लक्ष्य-उद्देश्य की पुस्तिका भी प्रदर्शित हुई।

खुले सत्र की शुरुआत किसान आंदोलन के दौरान 750 से ज्यादा शहीद हुए किसानों, पिछले दिनों उत्तराखंड आपदा में मृतकों और कोरोना आपदा के दौरान अकाल मौत के शिकार लोगों को दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि देने से हुई। अंत में जोशीले नारों के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

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