महिलाओं की मुक्ति के लिए संघर्ष को तेज करने के लिए संकल्प

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी

हरिद्वार (उत्तराखंड)। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि 8 मार्च का दिन दुनिया भर में हुए कामगार महिलाओं के संघर्षों के प्रतीक दिवस के रूप में मनाया जाता है। वक्ताओं ने इस ऐतिहासिक दिवस पर महिलाओं की मुक्ति के लिए संघर्ष को तेज करने के लिए संकल्प लिया।

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस (8 मार्च) की पूर्व संध्या पर रविवार को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील भोजन माता संगठन ,भेल मजदूर ट्रेड यूनियन द्वारा संयुक्त रूप से विचार गोष्ठी बीएच‌ईएल सेक्टर 4 में की गयी।

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की संयोजिका दीपा ने कहा कि वक्त आ गया है कि लूट और शोषण पर टिके पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष कर समाजवादी व्यवस्था की स्थापना के संघर्ष को तेज कर महिलाओं की पूर्ण मुक्ति की लड़ाई को मंजिल तक पहुंचाया जाए। महिला उत्पीड़न के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ी जाए।

इंकलाबी मजदूर केंद्र की कार्यकर्ता रंजना ने कहा कि 8 मार्च अंतरर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस दुनिया भर में हुए कामगार महिलाओं के संघर्षों के प्रतीक दिवस के रूप में मनाया जाता है। समाजवादी महिलाओं के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा लिए गए निर्णय के बाद 1911 से पूरी दुनिया में यह पर्व मनाया जाता है भारत में 1929 से इस दिवस को मनाने की परंपरा शुरू हुई।

प्रगतिशील भोजन माता का संगठन की मैना देवी ने कहा कि आज सरकार महिला सशक्तिकरण की बातें करके महिला जगत को धोखा दे रही है। कुछ शासक वर्ग की महिलाएं आजाद है गरीब मेहनतकश वर्ग की महिलाएं आज भी आर्थिक गुलाम है। सरकारी स्कूलों में भोजन माताओं को सिर्फ 2000 रूपये ही वेतन दिया जाता है, जो बेहद निंदनीय है।

भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राज किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नवरत्न संस्थानों को देशी-विदेशी पूंजीपतियों को कौड़ियों के दाम बेचा जा रहा है। 246 बचे हुए पीएसयू में से 100 पीएसयू को बेचकर 250 करोड़ रूपए जुटाने का लक्ष्य प्रधान मंत्री द्वारा खुल्लेआम स्वीकार की गयी है। अतः अब संघर्ष ही एकमात्र विकल्प है जिसमें सभी मजदूरों को अपने परिवार जनों को शामिल करना होगा। एक वृहद एकता की जरूरत समय की मांग है।

कर्मचारी संघ सत्यम ऑटो के महिपाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूर, किसान एवं महिलाओं की विरोधी है और यह सरकार  पूंजीपतियों के लिए काम करती हैं आम जनता के लिए केवल कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं है

विचार गोष्ठी में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की दीपा मालती, निशा, आकांक्षा, पूनम, प्रगतिशील भोजन माता संगठन की मैना, सुंदरी, सावित्री, नर्मदा, गंगा, शीला, शकुंतला, स्नेह लता, रजनी, हेमा, सुनीता, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रंजना, पंकज, राजू, हरीश, संतोष, प्रदीप, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के राजकिशोर, अवधेश कुमार, निशू कुमार, बृजराज सिंह, अरविंद कुमार, परिवर्तनकामी छात्र संगठन की रश्मि एवं फूड श्रमिक यूनियन आईटीसी के देवेंद्र सिंह, कर्मचारी संघ सत्यम ऑटो के महिपाल सिंह, ओमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, कृष्णा, मनोज, आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में लगे गए नारे-

  •  महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करो!
  •  पतित उपभोक्तावादी संस्कृति और पुरुष प्रधान मूल्य मान्यताओं पर रोक लगाओ!
  • मजदूरों ,किसानों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ बनाए गए काले कानून वापस लो!
  • महिलाओं को रात्रि पाली में काम कराने वाले काले कानून को निरस्त करो!
  • महिला मजदूरों को समान काम का समान वेतन देना सुनिश्चित कराओ!

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