उत्तराखंड: हिंसक पशुओं से रक्षा के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क में प्रदर्शन कर रही जनता का दमन

जनता का रोष देखकर सभी गिरफ्तार आंदोलनकारी निजी मुचलके पर रिहा हुए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त संघर्ष समिति ने माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
रामनगर, नैनीताल। बाघ और हिंसक पशुओं के आतंक के खिलाफ कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला और झिरना जोन में 31 दिसंबर को पर्यटकों की आवाजाही पूर्णतया बंद करने का ऐलान किया था। जहाँ एकबार फिर भाजपा सरकार ने दमन का सहारा लिया। गिरफ्तारियाँ हुईं, लेकिन व्यापक विरोध को देखते हुए बाद में निजी मुचलके पर सभी रिहा हुए।
आंदोलन की रणनीति के तहत सुबह ही भारी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने पर्यटकों की आवाजाही रोक दी। इस बीच भारी पुलिस बल ने आंदोलनकारियों के साथ जबरदस्ती की, महिलाओं तक को घसीटा और उन्हें गिरफ्तार करके एसडीएम कार्यालय पहुंचा दिया।
इस बीच गिरफ्तार होने की खबर सुनकर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नेता प्रभात ध्यानी ने आमरण अनशन की घोषणा कर दी इसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की रणनीति के तहत दूसरे चक्र में पुनः भारी संख्या में लोग पर्यटकों की आवाजाही रोकने पहुंच गए। पुलिस द्वारा भारी बल प्रयोग के साथ 11 लोगों को पुनः गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ़्तारी, शांतिभंग का मुकदमा, रिहाई
हिरासत में लिए गए 31 आंदोलनकारियों के खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर सीआरपीसी की धारा 107/16 के तहत शांति भंग की कार्रवाई की गई। इधर पूरे दिन चल रही धींगा-मुश्ती के दौरान गुस्साए ग्रामीणों का प्रदर्शन भी चलता रहा।
हालांकि इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर फिर से वार्ता की नौटंकी हुई जिसका कोई भी समाधान नहीं निकल सका। अंततः लोगों का रोष देखकर सभी गिरफ्तार आंदोलनकारी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। आंदोलनकारी नेताओं ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
हिंसक पशुओं के आतंक के खिलाफ आंदोलन
उल्लेखनीय है कि पूरे उत्तराखंड में इन दिनों बाघ, गुलदार, हाथी, बंदर और तमाम हिंसक पशुओं द्वारा अबोध बच्चों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों तक को शिकार बनाने की घटनाएं लगातार तीव्र होती जा रही हैं। उत्तराखंड के रामनगर स्थित कॉर्बेट पार्क से लगे ग्रामीण इलाकों में बाघ और तेंदुओं के आतंक से निजात दिलाने की मांग के साथ आंदोलित हुए।
विभिन्न संगठनों और पीड़ित जनता ने संयुक्त संघर्ष समिति बनाकर जंगली जानवरों, बंदरों से इंसानों फसलों, मवेशियों की सुरक्षा किए जाने तथा जंगली जानवरों के हमले में मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए मुआवजा व घायलों को 10 लाख रुपए मुआवजा तथा संपूर्ण इलाज की गारंटी आदि मांगों के साथ लगातार दो माह से संघर्षों का कई दौर चलाया।
सरकार प्रशासन वन विभाग द्वारा लगातार अनदेखी और बढ़ती घटनाओं, मांगों पर कोई भी विचार न करने आदि से आक्रोशित लोगों ने हिंसक पशुओं आदि जंगली जानवरों, बंदरों से इंसानों, फसलों, मवेशियों की सुरक्षा किए जाने तथा मुआवजा व संपूर्ण इलाज की गारंटी आदि मांगों को लेकर कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला और झिरना जोन में 31 दिसंबर को पर्यटकों की आवाजाही पूर्णतया बंद करने का ऐलान किया था।
इसी बीच 29 और 30 दिसंबर को प्रशासन की ओर से वार्ता की औपचारिकता भी पूरी की गई लेकिन समाधान के बारे में कुछ नहीं कहा गया। आज का यह प्रदर्शन इसी का प्रतिफल था। संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में आंदोलनरत ग्रामीणों ने आज 31 दिसम्बर को सुबह ठीक 5 बजे कॉर्बेट के ढेला-झिरना जोन को जाम कर पर्यटन गतिविधियों को ठप्प कर दिया।
हिंसक पशुओं से रक्षा की जगह आंदोलनकारियों का दमन
लेकिन आंदोलन को कुचलना के लिए कुख्यात भाजपा नीत केंद्र की मोदी और उत्तराखंड की धामी सरकार एक बार फिर दमन की राह पर है जो कि बेहद निंदनीय है और हर तरीके से इसका इसकी मुखालफत होनी चाहिए।
भाजपा सरकार की पर्यटन नीति इजारेदार पूंजीपतियों, साम्राज्यवादियों और होटल रिसोर्ट लॉबी के हितों में संचालित है। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार के इशारे पर प्रशासन ने भारी पुलिस बल लगाकर एवं बल प्रयोग कर दमन का पाटा चलाया।
तमाम संगठनों के कार्यकर्ता, एवं ग्रामीण गिरफ्तार कर लिए गए, बसों में डालकर रामनगर ले जाए गए। गिरफ्तारी का विरोध कर रहे लोगों को सडक पर घसीटा गया; पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं बक्शा और यहाँ तक कि पुलिस ग्रामीणों के घरों पर दबिश दी।
इन गिरफ्तारियों के बावजूद संघर्ष का सिलसिला जारी रहा। कार्बेट नेशनल पार्क का गेट आवाजाही के लिए दोबारा बंद करने का प्रयास और साथ ही गिरफ्तारियों के विरोध में जनता सड़कों पर उतरी।
गिरफ्तार लोगों में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, राजेंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, सूरज सैनी, महिला एकता मंच की ललिता रावत, सरस्वती जोशी, कौशल्या चुन्याल, तुलसी जोशी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्वाल एवं ग्रामीण नेता ललित मोहन पाण्डेय, सोबन सिंह तड़ियाल, राजेंद्र सिंह, राजेश सिंह, आनंद सिंह, महेश जोशी, संजय मेहता, सुमित कुमार, कैसर राणा, अजय बोरा, कपिल शर्मा, भुवन चंद, मदन मोहन, मनमोहन अग्रवाल, गोविंद अधिकारी आदि शामिल रहे।
मजदूर सहयोग केन्द्र ने आंदोलन का समर्थन और भाजपा सरकार के दमन का विरोध कर माँग कि-
★ हिंसक पशुओं से रक्षा की जगह इंसानों का दमन बंद करो!
★ हिंसक पशुओं से इंसानों फसलों, मवेशियों की सुरक्षा हो तथा इन हमले में मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए व घायलों को 10 लाख रुपए मुआवजा तथा संपूर्ण इलाज की गारंटी की न्यायपूर्ण मांग पूरी करो!
★ मोदी, धामी की भाजपा सरकार जनतांत्रिक आंदोलन पर हमले बंद करो!
★ गिरफ्तार साथियों को तत्काल बिना शर्त रिहा करो, फर्जी मुकदमे वापस लो!
★ आम जन की आवाज सुनो, न्यायसंगत मांगें पूरी करो!
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