ट्रेड यूनियन कर्मियों व जनवादी कार्यकर्ताओं का दमन बंद करो!

बढ़ाते दमन का प्रतिरोध : करनाल में सभा व जुलूस
करनाल (हरियाणा)। जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा) व डॉ भीमराव अंबेडकर शिक्षण समिति ने आशा वर्कर्स व मजदूर नेताओं पर एफआइआर, कारवां मैगजीन के पत्रकारों पर हमला, प्रगतिशील कार्यकर्ताओं और दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों को निशाना बनाने, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना आदि के ख़िलाफ़ निगदू में सभा और जुलुस निकालकर विरोध जताया।
16 अगस्त को जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा) व डॉ भीमराव अंबेडकर शिक्षण समिति के संयुक्त तत्वाधान में निगदू के चमार चौपाल में एक सभा हुई। सभा की अध्यक्षता डॉ भीमराव अंबेडकर शिक्षण समिति के प्रधान साथी कुलदीप भोला ने की।
सभा 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही आशा वर्कर्स व मजदूर नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआइआर, कारवां मैगजीन के पत्रकारों को सांप्रदायिक गालियां देने, हमला व महिला रिपोर्टर पर यौन हमला करने, भीमा कोरेगांव घटना व दिल्ली हिंसा की जांच प्रक्रिया के बहाने प्रगतिशील कार्यकर्ताओं और दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों जैसे प्रोफेसर हनी बाबू, जेनी रोवेना, पीके विजयन, राकेश रंजन, अपूर्वानंद आदि को निशाना बनाने, दवाब डालने या गिरफ्तार करने की घटना के विरोध में की गई।
सभा में सुप्रीम कोर्ट के जन पक्षीय वकील श्री प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के मुद्दे पर भी चर्चा हुई और इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यदि एडवोकेट प्रशांत भूषण को सजा दी जाती है तो भारतीय न्याय के इतिहास में यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना होगी।
सभा को संबोधित करते हुए जन संघर्ष मंच हरियाणा के जिला संयोजक कामरेड सतपाल कालड़ा ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार विभिन्न तरीके से भारत की मजदूर एकता को भंग करना चाहती है लेकिन हम मोदी सरकार को चेतावनी देते हैं कि वह ऐसी घिनौनी हरकतें बंद करें और मजदूरों को राहत प्रदान करें। मजदूर अधिकारों पर हमले करना बंद करें। आशा वर्कर, आंगनवाड़ी, मिड डे मील वर्कर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दे। मनरेगा मजदूरों को साल में कम से कम 200 दिन का काम और ₹800 दिहाड़ी दें और दमनकारी नीतियां बंद करें। जनवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने माँग की कि 9 अगस्त को आशा वर्कर और मजदूर नेताओं पर दर्ज की गई f.i.r. रद्द करो, कारवां मैगजीन के पत्रकार जो कि मस्जिद पर भगवा झंडा फहराने की घटना को कवर कर रहे थे, उन पर किए गए बहशियाना हमले और सांप्रदायिक गालियां देने वाले तथा महिला रिपोर्टर के साथ यौन हमला करने वाले तत्वों को सजा दी जाए, भीमा कोरेगांव घटना और दिल्ली दंगों की जांच के नाम पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों का दमन बंद किया जाए, सीएए विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ता डॉ कफील खान और सफूरा जर्गर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता आदि के खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द किए जाएं।
सभा के अंत में डॉ बी आर अंबेडकर शिक्षण समिति के अध्यक्ष कुलदीप भोला ने कहा कि आज देश में सांप्रदायिक हिंसा और धर्म के आपसी झगड़े, भीड़ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और जाति पाति का जहर इत्यादि असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। इन सभी गतिविधियों के बढ़ने के लिए जिम्मेदार भाजपा और संघ परिवार है। हम इन सभी असामाजिक गतिविधियों का कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर के सपनों का देश “जातिविहीन और वर्ग विहीन समाज का निर्माण करने के लिए” आज मजदूरों व दलित समुदाय को एक होकर संघर्ष करना होगा। अंधविश्वास व धार्मिक कुरीतियों का त्याग करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा। मोदी सरकार की धार्मिक कट्टरता की नीतियों का कड़ा विरोध करना होगा।
सभा के पश्चात जन संघर्ष मंच हरियाणा के राज्य सचिव कामरेड सोमनाथ और कुलदीप भोला के नेतृत्व में एक विरोध प्रदर्शन किया गया जो कि गांव की मजदूर बस्तियों में से होता हुआ पीएचसी के सामने पहुंचा और वहां समापन किया गया। इस प्रदर्शन में सोहनलाल, दीपक, सरदारा सिंह, कुलदीप, मुकेश, अरुण, रिंकू, विवेक, राजेंद्र, अमन भोला, रामबीर आदि शामिल रहे।