वेतन कटौती : अब ब्रिटानिया मज़दूरों का वेतन कटा

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सबको वेतन देने की पीएम की घोषणा मज़दूरों के लिए हवाई वायदा
रुद्रपुर (उत्तराखंड): कोरोना/लॉकडाउन के बीच 29 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी का वेतन ना कटाने का निर्देश दिया था. लेकिन तमाम कम्पनियाँ मज़दूरों के वेतन में कटौतियां बढ़ा दी हैं. ताजा घटना पंतनगर स्थित ब्रिटानिया बिस्किट कम्पनी का है, जहाँ लॉकडाउन में फंसे जो मज़दूर काम पर उपस्थित नहीं हो सके, उनके वेतन प्रबंधन ने काट लिए हैं. जबकि आवश्यक सेवा के नाम पर कम्पनी में लगातार पूरा उत्पादन हुआ.
इस सम्बन्ध में ब्रिटानिया श्रमिक संघ द्वारा जारी विज्ञप्ति हम हूबहू दे रहे हैं-
ब्रिटानिया ने लॉकडाउन का वेतन नहीं दिया और न ही श्रमिकों को कम्पनी में रहने के लिए जगह दी
पन्तनगर : कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरा विश्व भयावह स्थिति में है। इन बिषम परिस्थितियों में समाज का हर एक व्यक्ति अपने-अपने स्तर से समाज को सुरक्षित रखने व कोई भी भूखा न रहे करके प्रयास कर रहा है जिसमें पन्तनगर ब्रिटानिया कम्पनी ने भी समाज में बिस्कुट वितरण हेतु शासन-प्रशासन को लाखों रुपये के बिस्कुट दिए हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण, कोरोना वायरस के संक्रमण से भय, व ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से जो श्रमिक अपनी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पाए कम्पनी प्रबन्धन द्वारा उन श्रमिकों का वेतन काट दिया गया।
कम्पनी प्रबन्धन का कहना है कि हमारी खाद्य कम्पनी है और भारत सरकार व राज्य सरकार के आदेशनुसार जिलाधिकारी ने जो आदेश जारी किया है हम उन्हीं के आदेशों का पालन कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर बढ़ते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु यूनियन द्वारा कम्पनी प्रबन्धन से एक माह कहा जा रहा है कि हम श्रमिक कम्पनी में रहना चाहते हैं जिस पर यूनियन द्वारा एक सूची बनाकर कम्पनी को दी गयी व कहा कि छः मई से हम सभी कम्पनी में ही रहेंगे जिससे हम, हमारा परिवार, हमारा समाज सुरक्षित रहे, लेकिन जब छः मई को कुछ श्रमिक अपने कपड़े व रोजमर्रा का सामान लेकर कम्पनी पहुँचे तो कम्पनी ने श्रमिकों को पूछा तक नहीं। श्रमिक कम्पनी में प्रातः छः बजे से रात्रि दस बजे तक कम्पनी के पार्क में रुके रहे, लेकिन प्रबन्धन को अपने उत्पादन से मतलब था।
जिन श्रमिकों की लगन व मेहनत से कम्पनी ऊँचे मुकाम तक पहुँची है और पूरी दुनियाँ में ब्रिटानिया बिस्कुट का नाम है आज उन श्रमिकों से मतलब नहीं। अन्त में रात्रि दस बजे श्रमिक अपने-अपने घरों को चले गये लेकिन जिस प्रकार से कोरोना वायरस का संक्रमण सिडकुल-पन्तनगर, हल्दूचौड़, लालकुआँ, रुद्रपुर आदि क्षेत्रों में मिला है उससे कम्पनी के श्रमिकों में मन भी भय उतपन्न हो रहा है।
श्रमिकों का कहना है कि एक तरफ सरकार कहती है कि वेतन में कोई कटौती नहीं होगी। “घर पर रहें, सुरक्षित रहें” दूसरी तरफ आदेश दे रखे हैं कि श्रमिकों पर कार्यवाही की जाये। यह सरकार को दोहरी नीति है। जब पूरे देश में आवाजाही बन्द थी, कम्पनियों ने श्रमिकों को कम्पनी आने-जाने हेतु कोई वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई तो श्रमिक कैसे कम्पनी आते?
कम्पनी में रहने हेतु गणेश मेहरा, इन्द्रजीत सिंह, आनन्द उनियाल, जीवन परगाई, नितिन श्रीवास्तव, हरीश पाठक, जयप्रकाश उपाध्याय, पूरन गड़िया, उमेश चोपड़ा, डूंगर सिंह, मदन सिकदर, धरम सिंह, गुंजन जोशी, शंकर कैड़ा, अक्षय जोशी, दिनेश पांडेय, विरेन्द्र सिंह बिष्ट, नवीन तिवारी, प्रदीप रौतेला, संजय बिष्ट, राजीव बोरा, अर्जुन रावत, प्रमोद जोशी, विनोद सुयाल, खीमानंद पांडेय, दीपक दुर्गापाल, दिनेश भट्ट, पंकज जोशी, नरेश गंगवार के साथ लगभग 70-80 श्रमिक आये थे।
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