रुद्रपुर: कार्य के दौरान श्रमिक के हाथ की कटी अंगुलियां, गलत इलाज; कोर्ट के आदेश से रिपोर्ट दर्ज

Kati_ungaliyan

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। एस.इण्टरप्राईजेज कंपनी में कार्य के दौरान श्रमिक संजीत मंडल के हाथ की अंगुलियां कट जाने के बाद उसका गलत इलाज करवाने पर श्रमिक ने कोर्ट के आदेश पर कंपनी मालिक व क्लीनिक संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

गभिया सराय महाराजपुर तहसील पूरनपुर पीलीभीत यूपी हाल निवासी संजयनगर संजीत मंडल ने असगर अली उर्फ नेताजी प्रोपराइटर एस.इण्टरप्राईजेज, निकट मेडिसिटी हास्पिटल, शुक्ला फार्म कम्पाउण्ड, करतारपुर रोड, रूद्रपुर निवासी पहाड़गंज, व मोहम्मद आसिफ एसआई हेल्थ केयर क्लीनिक पहाड़गंज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।

दर्ज कराई रिपोर्ट में पीड़ित ने कहा है कि वह विगत 7-8 माह से प्लास्टिक स्क्रैप से प्लास्टिक दाना बनाने के कारखाना एस.इण्टरप्राईजेज में बतौर श्रमिक के रूप में कार्य करता आ रहा था। विगत 21 अगस्त 2024 को मशीन का ऑपरेटर ना होने के कारण असगर अली ने कंपनी की पुरानी एवं खराब मशीन पर उसको जबरन कार्य पर लगा दिया। जिससे उसका बायां हाथ मशीन में आने से हाथ की हथेली मशीन में दबकर कट गयी।

घटना के बाद कंपनी मालिक असगर उसे सरकारी अस्पताल ना ले जाकर अपने जान पहचान वाले एसआई हेल्थ केयर क्लीनिक में डॉ मोहम्मद आसिफ के पास ले गया। उसे कोई खाना खर्चा, पोषण खर्चा नही दिया गया और धमकाया गया कि इस बारे में कोई कानूनी कार्रवाई मत करना, यदि करेगा तो तेरा यह इलाज कराना भी बन्द करा दूँगा।

कंपनी का मालिक उंगलियां कट जाने के कारण न तो कोई मुआवजा दे रहा है और न ही अपनी कंपनी में नौकरी पर रख रहा है। सही ईलाज न होने के कारण उसका बायाँ हाथ बिल्कुल बेकार हो गया और वह किसी काम लायक नही रहा है।

पीड़ित के मुताबिक उसने पुलिस, प्रशासनिक व श्रम विभाग के अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। उसे मजबूरन कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

चौकी प्रभारी रम्पुरा ने मीडिया को बताया कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने कंपनी मालिक और क्लीनिक संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैं।

आए दिन होते हादसे; अधिकारी रहते मूक दर्शक

उल्लेखनीय है कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन, अकुशल मज़दूरों से कुशल मज़दूरों के काम करने से फैक्ट्रियों में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, जहाँ मज़दूर के अंग-भंग होने से लेकर जान जाने तक की घटनाएं आम हो चुकी हैं। घटनाओं के बाद मालिक-ठेकेदार कामचलाऊ इलाज करवाकर छुट्टी कर लेते हैं। या मृतक आश्रित को बगैर मुआवजे टरका देते हैं।

यही नहीं, लगातार घटती घटनाओं के बावजूद श्रम और प्रशासनिक अधिकारी मुक दर्शक बने रहते हैं। पीड़ित श्रमिकों की शिकायत के बावजूद श्रम अधिकारी मामले को टालने का ही काम करते हैं और पीड़ित मज़दूर भटकते रहते हैं।

श्रमिक संजीत मंडल ने परेशान होकर घर बैठने की जगह कोर्ट का सहारा लिया, यह तमाम पीड़ित मज़दूरों के लिए प्रेरणा है। हालांकि अभी भी लड़ाई लंबी है। पुलिस अभी जांच करेगी और पीड़ित को न्याय कब मिलेगा, यह देखने की बात है।