मानेसर तहसील पहुंचा प्रोटेरिअल ठेका मजदूरों का जुलूस

लगातार 10 महीनों से जारी है ठेका मज़दूरों का यह संघर्ष
21 अप्रैल, मानेसर | प्रोटेरिअल (हिताची) ठेका मज़दूर यूनियन के बैनर तले प्रोटेरिअल कंपनी के संघर्षरत मज़दूरों ने 21 अप्रैल को मानेसर में जोरदार जुलूस का आयोजन किया। जुलूस में मारूति मानेसर प्लांट, पॉवरट्रेन प्लांट और बेलसोनिका प्लांट की यूनियनें, मारूति के टर्मिनेटेड मज़दूर व इंकलाबी मज़दूर केंद्र और मज़दूर सहयोग केंद्र की भागीदारी रही। प्रबंधन द्वारा कंपनी गेट पर तैनात बाउंसरों की धमकियों को नाकाम करते हुए जुलूस न केवल प्रोटेरिअल बल्कि मारूति मानेसर व हौंडा इत्यादि क्षेत्र के विभिन्न कम्पनियों के गेटों पर रुकते हुए तहसील तक पहुंचा। तहसील के समक्ष विभिन्न वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया और प्रशासन को अपनी मांगें सौंपी। कार्यक्रम की तैयारी में मज़दूरों ने पूरे मानेसर क्षेत्र में अभियान चलाया, पर्चे बांटे और दीवारों पर पोस्टर चस्पा किए।








देश के श्रम कानूनों के मुताबिक़ 240 दिन लगातार किसी कंपनी में काम कर लेने पर एक श्रमिक स्थायी रोज़गार का हकदार हो जाता है। इस ज़िम्मेदारी से बचने के लिए अधिकतर कंपनियां मज़दूरों को 6-7 महीने काम करा कर उनकी छुट्टी कर देती हैं या उन्हें कुछ दिन घर बैठा कर नए कोड पर रीजॉइनिंग कराती हैं। यही कोशिश आई.एम.टी स्थित कंपनी ‘हिताची’ में हुई।
कंपनी में कुल 46 पक्के मज़दूरों के बीच 270 करीब ठेका मज़दूर हैं। ज़ाहिर हैं की उत्पादन का ज़्यादा काम ठेका मज़दूर ही करते हैं। लेकिन जहाँ पक्के मज़दूर 80,000 रु. कमाते हैं वहीं ठेका मज़दूर 12 से 13,000 रु. ही पाते हैं। जून 2022 में कंपनी का नाम बदल कर ‘प्रोटेरिअल’ रखा जा रहा था और मज़दूरों को नए कोड पर भर्ती करने की नीति प्रस्तावित की गयी। कमोबेश सभी मज़दूर 2-6 साल तक कंपनी में काम करते आएं थे। मज़दूरों ने नया कोड लेने से मना कर दिया। साथ ही उन्होंने अपना एक सामूहिक मांग पत्र भी प्रबंधन को दे दिया। इसमें स्थायी प्रकार का काम कर रहे सभी मज़दूरों के लिए स्थायी रोज़गार, वेतन में बढ़ोतरी, काम की शर्तों में सुधार इत्यादि मांगें शामिल थीं। सामूहिक मांग पत्र की एक प्रति हरियाणा श्रम विभाग में भी जमा कर दी गयी।





मज़दूरों की मांगों पर सुनवाई होने की जगह प्रबंधन ने उनके साथ दुर्व्यवहार बढ़ा दिया। प्रताड़ना के माध्यम से उन्हें उनकी मांगों से पीछे हटाने की कोशिश शुरू हो गयी। वर्करों को धरना प्रदर्शन में शामिल होने पर काम से निकाल देने की धमकी मिलने लगी। जैसे ही कोई मज़दूर छुट्टी पर जाता उसका गेट बंद कर दिया जाता। यहाँ तक कि गंभीर स्वास्थ्य कारणों या पारिवारिक समस्या के लिए छुट्टी लेने पर भी लोगों को काम से निकाल दिया गया।
मनेजमेंट की इस कार्यवाही में अब तक 25 मज़दूर बाहर हो चुके हैं। बर्ख़ास्त और कंपनी के अन्दर काम कर रहे मज़दूर संगठित हो कर मनेजमेंट की इस अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी कार्यवाही के ख़िलाफ़ संघर्षरत हैं। मज़दूरों ने गुड़गांव डीसी ऑफिस के बाहर धरना, मानेसर में जुलूस, व क्षेत्र में चल रहे अलग अलग आंदोलनों में सक्रीय समर्थन दे कर अपनी कार्यवाही को आगे बढ़ाया है। आंदोलन को भी क्षेत्र के अन्य संघर्षरत संगठनों व मज़दूरों, जैसे बर्ख़ास्त मारूति मज़दूर और बेलसोनिका मज़दूरों का समर्थन मिला है। विभिन्न संघर्षों में बढ़ते तालमेल को देख प्रबंधन ने फ़रवरी में आंदोलन शुरू होने के 8 महीनों बाद वार्ता की पहल की है लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद अब तक किसी न्यायपूर्ण समझौते पर राज़ी नहीं है।
मज़दूरों ने अपने सभी निकाले गए साथियों को पिछले वेतन के साथ पुराने कोड पर वापस लिए जाने, वेतन में बढ़ोतरी, छुट्टी और कंपनी में पक्के मज़दूरों के बराबर सुविधाओं की मांगे उठाई हैं। यह संघर्ष क्षेत्र के ठेका मज़दूरों की हौसलाअफजाई करती एक जीवंत मिसाल है!