महिंद्रा प्रबंधन के फर्जी मुक़दमें में श्रमिक नेता अदालत से हुए दोषमुक्त; मज़दूरों में खुशी

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मज़दूर नेता अमिताभ जौहरी व इमरान अली पर कथित कूपन चोरी का लगा था आरोप। एफआईआर व बर्खास्तगी के बावजूद बनी थी यूनियन, जिसके अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष भी हैं बर्खास्त।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। ऊधम सिंह नगर के लालपुर स्थित महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (ट्रैक्टर प्लांट) के पूर्व मज़दूर नेता अमिताभ जौहरी व इमरान अली प्रबंधन द्वारा लगाए गए फर्जी मुकदमे में एसीजेएम कोर्ट रुद्रपुर से अपराध मुक्त करार दिए गए हैं। इससे मज़दूरों में खुशी व्याप्त है।

पीड़ित श्रमिक नेताओं अमिताभ जौहरी व इमरान अली ने इस जीत को मज़दूरों की जीत बताया।

ज्ञात हो कि महिंद्रा कंपनी में मज़दूरों के हक में आवाज़ उठाने व स्वतंत्र यूनियन की पहल पर दोनों मज़दूरों नेताओं को प्रबंधन ने कथित कूपन की चोरी का इल्ज़ाम लगाकर आरोपित किया था, मुक़दमा दर्ज करवाया और सेवा से बर्खास्त भी कर दिया था।

हालांकि महिंद्रा कर्मकार यूनियन के नाम से यूनियन गठित हुई, लेकिन इसके भी तत्कालीन अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष वर्ष 2017-18 में चले आंदोलन के दौरान निलंबित फिर बर्खास्त हुए, जिनका मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।

मज़दूरों के पक्ष में उठाई आवाज़, लगा फर्जी इल्ज़ाम

महिंद्रा लालपुर में प्रबंधन की वर्क्स कमेटी जैसी शिव सेना सम्बद्ध महिंद्रा कामगार सेना के नाम से यूनियन थी। उक्त यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष अमिताभ जौहरी और तत्कालीन कोषाध्यक्ष इमरान अली श्रमिकों के पक्ष में आवाज उठाते रहे, जिससे प्रबंधन नाराज था क्योंकि ये नेता प्रबंधन की शर्तों पर नहीं चलते थे। यही नहीं, इन नेताओं ने मज़दूरों की स्वतंत्र यूनियन बनाने की पहल भी ली थी।

साल 2015 में प्रबंधन ने दोनों मज़दूर नेताओं पर वार्षिकोत्सव के दौरान मज़दूरों को दिए जाने वाले कूपन की कथित चोरी का इल्जाम लगाया और मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करवाई। इसी के साथ दोनों नेताओं को 28/3/2016 को निलंबित कर दिया और कथित घरेलू जांच द्वारा आरोप सिद्ध करके दिनांक 7/6/2016 को बर्खास्त कर दिया।

उक्त बर्खास्तगी को मज़दूर नेताओं ने श्रम न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन फैसला प्रबंधन के पक्ष में आया। मामला अभी उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन है।

अदालत में नहीं साबित हुआ इल्ज़ाम

प्रबंधन की एफआईआर पर स्थानीय अदालत में पूरी सुनवाई हुई। सारे पक्षों, गवाहों, साक्ष्य और बहस में अदालत ने साफ तौर पर पाया कि उक्त कथित रूप से गायब हुए कूपन और दुकान पर कूपन कैश कराने के सम्बंध में इन नेताओं की कहीं कोई भूमिका नहीं दिखी।

प्लांट के भीतर कूपन जिस अलमारी में रखा था उसका ताला नहीं टूटा था। उक्त कथित दुकान पर इनके द्वारा कूपन बेचने का कोई साक्ष्य नहीं है। इन नेताओं की संलिप्तता का कोई आधार नहीं मिला। इस पूरी घटना का कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। प्रबंधन के सभी गवाह संदेह से प्रस्थान करके अनुमान आधारित व मनगढ़ंत तथ्यों को प्रस्तुत करते रहे।

अदालत ने किया दोषमुक्त

एसीजीएम अदालत ने दो तथ्यों पर गौर किया- क्या कोई चोरी हुई थी? और क्या यह चोरी लिपिक अथवा सेवक होते हुए मालिक अथवा नियोक्ता के कब्जे से की गई थी? अदालत ने पूरी सुनवाई के बाद पाया कि अभियोजन द्वारा संदेह से परे इसे साबित नहीं किया जा सका।

अदालत ने कहा कि अभियोजन द्वारा संदेह से इतर साक्ष्य प्रस्तुत न किए जा सकने के कारण अभियोजन कथानक किसी भी प्रकार से साबित नहीं होता है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त गण को दोष मुक्त किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

दिनांक 06/07/2023 के अपने आदेश में एसीजीएम, रुद्रपुर माननीय श्वेता पांडेय ने स्पष्ट रूप से लिखा कि अभियुक्त गण अमिताभ जौहरी एवं इमरान अली को अंतर्गत धारा 381 भारतीय दंड संहिता के आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है।

प्रायः मज़दूर हित में आवाज़ उठाने का पहलकारी मज़दूर नेताओं को दंड भोगना पड़ता है। जबतक सच सामने आता है, तबतक मज़दूरों की उम्र का एक हिस्सा चला जाता है, जिस अपुरणीय क्षति का कोई मोल नहीं है। लेकिन हिम्मत के साथ संघर्ष और जीत हासिल करना केवल बेगुनाही साबित करना नहीं होता, बल्कि यह मालिक वर्ग की साजिशों के खिलाफ मज़दूर वर्ग की जीत होती है।

इस मामले में भी मज़दूर नेताओं का आपराधिक मामले से दोषमुक्त होना, बरी होना, महिंद्रा के मज़दूरों की ही नहीं बल्कि मज़दूर वर्ग की एक जीत है।

मज़दूरों ने बनाई स्वतंत्र यूनियन, नेता अभी भी बर्खास्त

ज्ञात हो कि उपरोक्त श्रमिक नेताओं के निलंबन फिर बर्खास्तगी के बावजूद मज़दूरों ने महिंद्रा कर्मकार यूनियन के नाम से यूनियन गठित की और वर्ष 2017 में पंजीकृत भी करवाया। उसके बाद से मज़दूरों को कई दौर के विकेट संघर्षों से गुजारना पड़ा।

संघर्षशील आंदोलन के दौर में इस यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष वीरेंद्र पाल और कोषाध्यक्ष अमित सक्सेना निलंबित फिर बर्खास्त हुए। वर्तमान में इनका मामला औद्योगिक न्यायाधिकरण हल्द्वानी में विचाराधीन है और कार्यबहाली के लिए इनका संघर्ष जारी है।

पूर्व श्रमिक नेता अमिताभ जौहरी एवं इमरान आली का मामला उच्च न्यायालय नैनीताल में गतिमान है। क्योंकि वह पूरा मामला इस कथित कूपन घोटाले से जुड़ा हुआ है जिसमें यह दोनों नेता आपराधिक न्यायालय से बाइज्जत बरी हो चुके हैं और प्रबंधन का उक्त मामला फर्जी साबित हो चुका है। इसलिए अब इस दोष मुक्ति के बाद उच्च न्यायालय से भी मजदूरों के हित में फैसला आने की उम्मीद ज्यादा बलवान हुई है।

इस जीत से महिंद्रा के मज़दूरों में खुशी की लहर व्याप्त है और जल्द ही प्रबंधन द्वारा बर्खास्त किए गए सभी चार नेताओं की कार्यबहाली की उम्मीद मजबूत हुई है। फिलहाल कोर्ट का संघर्ष जारी है।