बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन का सम्मेलन; वर्तमान हालत में मज़दूर वर्ग के कार्यभार पर चर्चा

धर्म तथा जातीय भावनाओं को भड़काने की साजिश के बारे में विस्तार से चर्चा हुई, मज़दूर वर्ग के बीच में इसके खिलाफ व्यापक राजनीतिक चेतना लाने का आवाहन हुआ।
पटना (बिहार)। बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन अपने वार्षिक सम्मेलन के पहले विभिन्न इकाइयों तथा इलाके का सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में 27 अगस्त को पूर्वी पटना क्षेत्र के कुंभरार- राजेंद्र तथा नगर खेमनी चक- रामकृष्ण नगर इकाइयों का संयुक्त सम्मेलन हुआ जिसमें करीब 100 से अधिक प्रतिनिधि, पर्यवेक्षक तथा अतिथियों ने भाग लिया।
सम्मेलन के पहले सत्र में देश की वर्तमान स्थिति तथा मजदूर वर्ग विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र में यूनियन के राज्य स्तरीय पदाधिकारी के अलावे करीब 20 मजदूर प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखें।
यूनियन के अध्यक्ष साथी रासबिहारी चौधरी मजदूर वर्ग को बांटने वाले पूंजीवादी सरकारों तथा पार्टियों द्वारा धर्म तथा जातीय भावनाओं को भड़काने की साजिश के बारे में विस्तार से बताया और मजदूर वर्ग के बीच में इसके खिलाफ व्यापक राजनीतिक चेतना लाने का आवाहन किया।
यूनियन के महासचिव साथी जयप्रकाश ने पिछले दशकों में पूंजीपतियों के पक्ष में मजदूर वर्ग के आर्थिक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक हितों पर किए गए प्रहार पर विस्तार से चर्चा की। श्रम सुधारों के मजदूर विरोधी चरित्र का पर्दाफाश किया।

यूनियन के उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने मजदूर वर्ग को पूंजीवादी सरकारों, पार्टियों तथा व्यवस्था के खिलाफ अपने स्वतंत्रत संघर्ष को मजबूत करने पर जोर दिया। हाल के मेवात तथा मणिपुर के दंगों में शासक वर्गों के द्वारा धर्म, जातीय पहचान और क्षेत्रीयता के नाम पर जो टकराव को बढ़ावा दिया जा रहा है और जिसके कारण सबसे ज्यादा तबाही मजदूरों की हो रही है, झुग्गी-झोपड़ियां और गरीबों की बस्तियां उजड़ी जा रही है, उसके बारे में विस्तार से बताते हुए मेहनतकशों की व्यापक एकता बनाने पर जोर दिया।
अतिथि वक्ता के रूप में भगत सिंह स्टूडेंट यूथ फ्रंट के अध्यक्ष साथी सौरभ सागर ने मजदूर और किसानों की व्यापक एकता तथा मानव समाज के लिए आवश्यक रोटी कपड़ा और मकान के निर्माता मेहनतकश किसान, कपड़ा मजदूर तथा निर्माण मजदूर की व्यापक एकता पर जोर दिया। इस क्रम में उन्होंने सूरत के बुनकर मजदूरों तथा बनारस के बुनकर कारीगरों की जीवन स्थिति और उनके बीच उभरने वाले संघर्ष की संभावनाओं को रेखांकित किया।
सम्मेलन की खासियत रही कि मजदूर प्रतिनिधि भविष्य के कार्यकर्ता तथा नेता के रूप में अपनी वैचारिक चेतना को अपने भाषणों में स्पष्ट के साथ प्रस्तुत कर रहे थे।

दूसरे सत्र में मजदूरों ने इस बीच के अपने संघर्षों तथा उसके अनुभवों के बारे में अपने विचार रखे। इनमें प्रमुख साथियों में रंजीत, धर्मेंद्र, संजय कुमार महतो, पिंटु, शंभू, विनय तथा रमेश पंडित थे। इस सत्र में पिछले दिनों संयुक्त आंदोलन विकसित करने की यूनियन की तरफ से ली गयी पहलकदमी तथा अन्य यूनियनों के द्वारा अपनाई गई संकीर्णता पर दुख प्रकट किया। मजदूर आंदोलन के इस कमजोर पक्ष पर चर्चा हुई।
दूसरी तरफ कई साथियों ने नीचे से यानी इकाइयों की तरफ से मजदूरों पर होने वाले हमले या मालिकों के खिलाफ आंदोलन तथा संघर्ष की पहलकदमी के अनुभव तथा महत्व को सकारात्मक रूप में पेश किया गया। इस बात पर इकाई के नेतृत्वकारी साथियों ने जोर दिया कि हमें सुधारवादी यूनियन की तरह केंद्रीय नेतृत्व के ही भरोसे नहीं रहना है, बल्कि अपनी पहल पर चौक चौराहों पर अपनी लड़ाई लड़ने की तैयारी होनी चाहिए और जहां कहीं भी हम काम में हैं या चौक पर बैठे हैं मजदूरों से यूनियन तथा मजदूर वर्ग के विचारधारा की चर्चा जारी रखनी चाहिए।
सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने मार्क्स, एंगेल्स लेनिन, स्तालिन तथा भगत सिंह को उद्धारित करके ईश्वर के अस्तित्व के खिलाफ और धर्म के मानव विरोधी चरित्र को मजबूती से रखा। सम्मेलन तथा यूनियन की कमेटी मीटिंग में भी अब यह माहौल बन गया है कि जो मजदूर धार्मिक आडंबर से घिरे हैं उन्हें मुंह छिपाना पड़ता है। सभी सक्रिय मजदूर कार्यकर्ता मोटे तौर पर धार्मिक विश्वास से आगे कदम बढ़ा चुके हैं। ऐसे समय में जब अन्य प्रदेशों में मजदूरों के ऊपर सत्ताधारी धार्मिक उन्माद पैदा करने वाली पार्टी के द्वारा मजदूर तथा किसानों में भी सांप्रदायिक जहर भरा जा चुका है, यूनियन से जुड़े मजदूर व उनके आसपास के लोग इस धार्मिक कट्टरता के खिलाफ मुखर होकर बोलने लगे हैं।
सम्मेलन में स्पार्टक्स के नेतृत्व में हुए गुलाम विद्रोह, तथा मजदूर वर्ग के संघर्षों के इतिहास, पेरिस कम्यून के पहले मजदूर राज्य तथा 1917 की रूसी समाजवादी क्रांति पर भी चर्चा हुई। मजदूरों के राज्य सोवियत संघ तथा हिटलर के खिलाफ मजदूरों के राज्य के नेतृत्व में हुए संघर्ष पर भी कई वक्ताओं ने विचार रखें। सम्मेलन गगन भेदी नारा तथा इंटरनेशनल गीत के साथ समाप्त हुआ।