बिजली के निजीकरण के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

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बिजली संशोधन बिल और निजीकरण रद्द करने की माँग

नेशनल कोआर्डिनेशन कमीटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) के निर्णय के अनुसार मंगलवार को देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों, जूनियर इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 एवं पूर्वांचल विद्युत् वितरण निगम, केंद्र शासित प्रान्तों और उडीसा में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया।

कर्मियों ने स्पष्ट किया कि बिजली के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए, नहीं तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मोदी सरकार निजीकरण पर अमादा

दरअसल. मोदी सरकार जनता की गाढ़ी कमाई से खड़ा हुए सरकारी व सार्वजानिक कम्पनियों को अम्बानी-अडानी जैसे मुनाफाखोरों के हवाले करने की गति तेज कर दी है। इसी क्रम में बिजली विभाग के निजीकरण के लिए वह बिजली संशोधन बिल 2020 लाई है।

कर्मचारियों के तमाम विरोधों के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार व राज्य सरकारें विद्दुत वितरण को निजी हाथों में देने की गति तेज करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (वाराणसी) और ओडिशा में तीन अन्य सरकारी बिजली वितरण कंपनियो को निजी हाथों में देने का फैसला किया है। जबकि सीईएसयू को पहले ही टाटा पॉवर के हवाले किया जा चुका है।

तेज हो गया बिजली क्षेत्र का निजीकरण

बिजली कर्मचारियों का कहना है कि बीती तीन जुलाई को बिजली मंत्रियों की बैठक के दौरान 11 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने वादा किया था कि बिजली संशोधन बिल 2020 का नया ड्राफ़्ट पेश होगा, लेकिन अभी तक मोदी सरकार की ओर से कोई पहलकदमी नहीं ली गई है, उल्टे निजीकरण करने के फैसले लिए गए।

मोदी सरकार ने पुडुचेरी, चंडीगढ़, जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख की सरकारी वितरण कंपनियों को निजी हाथों में दे दिया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में देने का फैसला किया है जबकि ओडिशा सरकार ने सेंट्रल इलेक्ट्रीसिटी सप्लाई अंडरटेकिंग (सीईएसयू) को पहले टाटा पॉवर को दे दिया है और तीन और वितरण कंपनियों (डिसकॉम) नेस्को, वेस्को और साउथको को बेचने का फैसला किया है।

देश के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शन

देश के विभिन्न हिस्सों में कर्मचारियों ने विभिन्न तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। सभी जगह कोविड-19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए सभी कर्मचारी मास्क पहनकर तथा शासन के आदेशानुसार सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए विरोध सभा में सम्मिलित हुए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली का निजीकरण करने का फैसला लाभ कमाने के उद्देश्य से लिया गया है। कोरोना संक्रमण के दौरान भी कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं। निजीकरण से डेलीवेजरों और अस्थाई कर्मियों को नुकसान हो रहा है। ये कर्मी बीते 20 वर्षों से काम कर रहे हैं। यह फैसला किसान और उपभोक्ताओं के विरोधी है। केंद्र सरकार यूटी बनने के बाद नए-नए फैसले थोप रही है। इससे कर्मचारी हताश हैं।

बिहार

बिहार स्टेट इलेक्ट्रिक सप्लाई वर्कर्स यूनियन के बैनर तले बिजली कर्मियों ने मंगलवार को राज्य के विभिन्न बिजली कार्यालयों के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे बिजलीकर्मियों ने सरकार से बिजली कानून संशोधन विधेयक 2020 को वापस लेने की मांग की।

उत्तर प्रदेश

निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के आह्वान पर मंगलवार को लगभग सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किया गया। समिति ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव, इलेक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल 2020 को वापस लेने, केन्द्र शाषित प्रदेशो के निजीकरण की प्रक्रिया रद करने व उड़ीसा में किये गए निजीकरण को वापस लेने हेतु विरोध सभा की और एकजुटता पर जोर दिया।

वाराणसी में विद्युत कर्मचारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत् वितरण निगम का निजीकरण किसी भी प्रकार प्रदेश और आम जनता के हित में नहीं है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है जबकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बिना भेदभाव के किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति कर रहा है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के अनुसार नई टैरिफ नीति में सब्सिडी और क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी और किसी को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है, जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है।

अब नई नीति और निजीकरण के बाद सब्सिडी समाप्त होने से स्वाभाविक तौर पर इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी। वक्ताओं ने कहा कि एकजुटता के जरिए ही बिजली कर्मियों की आवाज केंद्र/प्रदेश सरकार तक पहुंचाई जा सकेगी।

जम्मू-कश्मीर

पावर इंप्लाइज काआर्र्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर बिजली कर्मियों ने पूरे प्रदेश में विभाग के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। कर्मियों ने स्पष्ट किया कि बिजली के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए, नहीं तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने बिजली संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की।

निजीकरण के विरोध में बिफरे बिजली कर्मी

बिजली के निजीकरण के विरोध में पावर इम्प्लाइज कोआíडनेशन कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार को को हीरानगर रिसीविंग स्टेशन पर जोरदार प्रदर्शन के किया। उन्होंने विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

छत्तीसगढ़

विद्युत कर्मियों ने इलेक्ट्रीसिटी बिल 2020 एवं केंद्र शासित प्रदेशों उत्तर प्रदेश तथा ओडिशा में बिजली के निजीकरण के विरोध में स्थानीय बिजली ऑफिस के समक्ष काली पट्टी लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया। बिजली कर्मचारियों ने बताया कि नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रीसिटी इंजीनियर एंड पावर सेक्टर में काम करने वाले समस्त कर्मचारी व इंजीनियर इस विरोध-प्रदर्शन में सम्मिलित हुए हैं।

पंजाब

पावरकॉम की पीएसईबी इंप्लाइज सांझा फोरम की ओर से मंगलवार को सब डिवीजन कार्यालय के समक्ष गेट रैली की गई। इस दौरान बिजली कर्मियों ने उनकी मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में पावरकॉम मैनेजमेंट तथा राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रीसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर के आह्वान पर की गई इस रैली के दौरान बिजली संशोधन बिल 2020 रद करने, कोयला खानों का निजीकरण बंद करने, केंद्र शासित प्रदेशों व नगर निगमों वाले शहरों में बिजली वितरण प्राइवेट न करने, सार्वजनिक संस्थानों का निजीकरण बंद करने, पे बैंड देने, पे रिवीजन करने, महंगाई भत्ते की किश्तें जारी करने की मांग की गई।

बिजली बिल 2020 को रद करवाने सड़कों पर उतरे बिजलीकर्मी

इस दौरान राज्य के वेतन स्केलों को केंद्र सरकार के समान करने, पावरकॉम से 40 हजार पद खत्म करने के फैसले को रद करने, गुरू नानक देव थर्मल प्लांट को चालू करने, मोबाइल भत्ते में की गई कटौती वापस लेने तथा प्रोफेसनल टैक्स की वसूली बंद करने आदि की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने यह प्रदर्शन काले बिल्ले लगाकर किया।

हिमांचल प्रदेश

बिजली बिल 2020 के विरोध में उतरे बिजली कर्मी

मंगलवार को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के आनी डिवीजन ऑफिस में कार्यरत कर्मचारियों ने बिजली बिल 2020 के विरोध में प्रदर्शन किया।हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी संघ आनी के प्रधान झाबे राम शर्मा की अगुआई में राष्ट्रीय इंजीनियर एवं कर्मचारी संघ की संयुक्त कॉल पर यह प्रदर्शन दोपहर को लंच के समय मे किया गया।

झारखंड

कर्मियों ने बिजली को निजी हाथों में सौंपने का किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से राज्य में बिजली वितरण और बिलिंग निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मंगलवार को बिजली कार्यालय में विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने बिजली के निजीकरण किए जाने की तैयारी का विरोध जताया है।

हरियाणा

ऑल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के बैनर तले बिजली कर्मचारियों ने आज निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने कोयला और पेट्रोलियम कर्मचारियों की राष्ट्रीय हड़ताल का समर्थन किया।