जीपीएफ बचत में पाबंदी: मोदी के बाद योगी सरकार का कर्मचारियों के अधिकार में फिर कटौती

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जानिए क्या है भविष्य निधि- ईपीएफ, जीपीएफ व पीपीएफ? किस प्रकार यूपी सरकार केन्द्र सरकार का अनुसरण कर कर्मचारियों के हक़ को छिन रही है? एम्पालाइज फेडरेशन करेगा विरोध।

मोदी-योगी सरकार का मज़दूरों-कर्मचारियों के हकों पर डकैतियाँ लगातार जारी हैं। सरकार ने बंद की गई सुविधाओं को बहाल करने के बजाय अब शादी-विवाह, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई के उपयोग में लाई जा रही कर्मचारी सामान्‍य भव‍िष्‍य न‍िध‍ि (जीपीएफ) बचत में कटौती करके 5 लाख सीमा निर्धारित कर दी। उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी फरमान जारी कर दिया।

इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने इसकी निंदा की है। इप्सेफ ने कहा कि इससे पहले नियमित नियुक्तियां, पदोन्नतियां समय से न करने से देश भर के कर्मचारी पहले से नाराज हैं। जीपीएफ बचत की सीमा 5 लाख करने से कर्मचारी अधिक आक्रोशित हैं। सरकार निजीकरण की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है और निजी संस्थानों पूंजीपतियों को बढ़ा रही है।

केन्द्र सरकार का फरमान

दरअसल पिछले साल 15 जून को केंद्र सरकार के कार्मिक और पेंशन मंत्रालय ने एक वित्त वर्ष में किसी अंशधारक द्वारा जीपीएफ में पांच लाख रुपये की अंशदान सीमा निर्धारित की थी। इसके बाद केंद्र में एक साल में अधिकतम पांच लाख रुपये के अंशदान का प्रावधान लागू हो चुका है।

पहले जीपीएफ के तहत पैसा जमा करने की कोई सीमा नहीं थी। जीपीएफ में निवेश करने वाला कर्मचारी, बीमारी, विवाह, शिक्षा, घर बनाने, कार खरीदने आदि के कामों के लिए जीपीएफ फंड से पैसा निकाल सकता है। केंद्र सरकर ने पैसा निकासी के नियमों में बदलाव किया है।

पहले जीपीएफ में जमा राशि आयकर विभाग के टैक्स के दायरे में नहीं आती थी लेकिन 1 अप्रैल, 2022 से लागू नए नियमों के तहत एक वित्त वर्ष में जीपीएफ में 5 लाख से अधिक जमा राशि कर के दायरे में होगी। नए नियमों के मुताबिक आवास उद्देश्यों के लिए जीपीएफ निकासी को अब एचबीए नियमों के तहत निर्धारित सीमा से नहीं जोड़ा जाएगा।

योगी सरकार का भी कर्मचारी हक़ में कटौती

केंद्र सरकार की अधिसूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने भी 28 नवंबर को सामान्य भविष्यनिधि (उत्तर प्रदेश) नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य कर्मचारी अब जीपीएफ में एक वित्तीय वर्ष के दौरान 5 लाख रुपये तक जमा कर सकेंगे।

ज्ञात हो कि राज्‍य में करीब 7 लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन के दायरे में हैं। इनके ल‍िए मूल वेतन का कम से कम 10 फीसदी जीपीएफ में जमा करना जरूरी है। इससे उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन पाने वाले कर्मचारियों को झटका लगा है। इस योजना में केवल सरकारी कर्मचारी ही न‍िवेश कर सकते हैं।

नए कर्मचारी पेंशन से वंचित, पेंशनधारी पर जीपीएफ पाबंदी

दरअसल केन्द्र सरकार के कर्मचारी 2004 से नियुक्त व उत्तर प्रदेश के 2005 से भर्ती कर्मचारी-शिक्षक पुरानी पेंशन योजना से बाहर धकेले जा चुके हैं। जिसके लिए सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों का सतत आंदोलन जारी है। प्रदेश में एक अप्रैल, 2005 से पहले नियुक्त सरकारी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम लागू है। इनके लिए ही जीपीएफ की सुविधा है।

क्या है भविष्य निधि- ईपीएफ, जीपीएफ व पीपीएफ?

भविष्य निधि एक निवेश कोष है जो स्वेच्छा से नियोक्ताओं और कर्मचारियों द्वारा किसी व्यक्ति की सेवानिवृत्ति का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक बचत के रूप में सेवा करने के लिए स्थापित किया जाता है।

विभिन्न प्रकार के भविष्य निधि हैं जिनका उपयोग संगठनों द्वारा कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता है जैसे निजी क्षेत्र में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), सरकारी कर्मचारियों के लिए सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) व अन्य लोगों के लिए सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) है।

सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ)

जीपीएफ का पूरा रूप सामान्य भविष्य निधि है। यह एक बचत योजना है जो भारत में सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करती है। 1960 में पेश किए गए इस निधि को सरकार संचालित करती है, कर्मचारी और सरकार इसमें योगदान देते हैं।

इस फंड का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति आय का निर्भर स्रोत प्रदान करना है। जीपीएफ सुविधाजनक है, कर्मचारियों को विवाह, शिक्षा और मेडिकल एमरजेंसी जैसे विभिन्न कारणों से फंड से पैसे निकालने की अनुमति देता है।

जीपीएफ की योगदान दर कर्मचारी की बेस‍िक वेतन के 6% पर तय होती है। फ‍िलहाल 7.1 फीसदी की दर से ब्‍याज म‍िल रहा है। केन्द्र सरकार की तरफ से प‍िछली कई त‍िमाही से ब्‍याज दर में क‍िसी प्रकार का बदलाव नहीं क‍िया गया, जिसका भी नुकसान कर्मचारियों को हो रहा है।

एम्पलाइज फेडरेशन ने जताया विरोध

इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने केन्द्र सरकार द्वारा इपीएफ के बचत की सीमा 5 लाख तक निर्धारित करने की व्यवस्था को गलत बताया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र ने खेद व्यक्त किया कि पुरानी पेंशन की बहाली महंगाई भत्ते की काटी गई चार किस्तों की बहाली, सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों में से कई सुविधाएं बंद करने के बाद अब सरकार के इस व्यवस्था से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले नियमित नियुक्तियां, पदोन्नतियां समय से न करने से देश भर के कर्मचारी वैसे ही नाराज एवं दुखी हैं। जीपीएफ बचत की सीमा 5 लाख करने से कर्मचारी अधिक आक्रोशित हैं।

राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचंद ने कहा कि भारत सरकार कर्मचारी सुविधाएं बंद करके कर्मचारियों की जेब काटती जा रही है। सरकार कभी नहीं सोचती है कि भीषण महंगाई में वह अपना परिवार का भरण पोषण पढ़ाई लिखाई कैसे कर पाएगा।

अंग्रेजों के समय से चली आ रही पेंशन को समाप्त करके भत्तों में कटौती करना, बायोमेट्रिक हाजिरी दो बार लगाने से कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी की गतिविधियों पर बंदिश लगाने से साफ जाहिर होता है कि सरकार निजीकरण की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है और धीरे-धीरे तमाम विभाग समाप्त करके निजी संस्थानों को पूंजीपतियों को देने की तैयारी कर रही है। कर्मचारी संगठनों की गतिविधियों को समाप्त की रणनीति उसी का हिस्सा है जिससे कर्मचारी अपनी पीड़ा की आवाज भी ना उठा सके।

राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी जीपीएफ में पाबंदी तथा पुरानी पेंशन बहाली न करने व भत्तों में कटौती करके केन्द्र सरकार का अनुसरण कर रही है। इस पर गंभीर विचार करने के लिए इप्सेफ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक दिल्ली में बुलाई गई है।