निरंकुशता की नई इबारत: नए संसद भवन का उद्घाटन और महिला पहलवानों पर बर्बर दमन का पाटा

न्याय माँग रही महिला पहलवानों की घसीटकर गिरफ़्तारी नए संसद भवन व भारत के पूंजीवादी लोकतंत्र की असलियत और निर्मम फासीवादी निरंकुशता की ओर बढ़ते भारत की मिसाल है!
जिस वक़्त देश के नए संसद भवन रूपी राजभवन का उद्घाटन हो रहा था, उसी वक़्त इस इमारत से चंद किलोमीटर दूर निरंकुश दमन का पाटा चल रहा था। चैंपियन व देश का मान बढ़ाने वाले अंतर्राष्ट्रीय महिला पहलवानों को सड़क पर घसीटा जा रहा था।
सत्ताधारी भाजपा का सांसद व भारतीय कुश्ती महासंघ का अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के यौन उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहीं पदक विजेता विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया समेत कई अन्य को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
यह प्रदर्शनकारी रविवार को ही नए संसद भवन के सामने ‘महिला सम्मान महापंचायत’ आयोजित करने वाले थे जिन्हें पुलिस, आरएएफ और अन्य सुरक्षा बल ने ज़बरन बसों में भर लिया।

नए संसद भवन के उद्घाटन पर भाजपा-मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र के बड़े-बड़े दावे हुए, विश्व का सबसे बड़ा और महान लोकतंत्र बताया गया। उसी दरमियान भाजपा सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह के यौन उत्पीड़न के खिलाफ न्याय की मांग के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरीं देश की बहन-बेटियों को दिल्ली पुलिस ने घसीटते हुए गिरफ्तार कर लिया।
चौतरफा बैरिकेट, जंतर मंतर बना पुलिस छावनी
दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर बैरिकेड लगे थे और जंतर-मंतर को पूरी तरह से जेल में तब्दील कर दिया गया था। पहलवानों ने अपने तय साढ़े ग्यारह बजे जैसे ही महिला महापंचायत के लिए नई संसद की तरफ कूच करने की कोशिश की चारों तरफ से पुलिस हमलावर हो गई।
बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ समर्थकों ने तिरंगा थामे जैसे ही जनपथ की तरफ बढ़ना शुरू किया पुलिस ने पहलानों से धक्का-मुक्की करते व घसीटते हुए हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस पर साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के कपड़े तक फाड़ने का आरोप लगा।
जंतर-मंतर पर जो समर्थक पहुंच पाए थे पुलिस उन्हें भी जबरन पकड़कर बसों में ठूंस लिया। इस दौरान जंतर-मंतर के चारों तरफ लगे बैरिकेड के पास नारेबाज़ी होती रही। पहलवानों के समर्थन और यौन उत्पीड़न के आरोपी बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ़्तारी के नारे लग रहे थे।
संसद भवन की तरफ जाने से रोके जाने पर पहलवान बजरंग पुनिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ‘क्या कोई सरकार अपने देश के चैम्पियंस के साथ ऐसे बर्ताव करवाती है ? हमने क्या गुनाह किया है?’

जंतर-मंतर से तंबू भी उखाड़ दिए
एक तरफ पुलिस पहलवानों, उनके समर्थकों, मीडिया कर्मियों को हिरासत में ले रही थी वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर धरना स्थल पर लगे तंबूओं को उखाड़े जाने का भी सिलसिला शुरू हो गया।
दोपहर एक बजे के करीब पहलवान साक्षी मलिक ने लिखा, ‘सभी पहलवानों और बुजुर्गों माताओं को हिरासत में लेने के बाद अब पुलिस ने जंतर मंतर पर हमारा मोर्चा उखाड़ना शुरू कर दिया है। हमारा सामान उठाया जा रहा है। ये कैसी गुंडागर्दी है?’
दिल्ली के सभी बार्डर जेल में तब्दील
दमनकारी यह माहौल केवल जंतर-मंतर का ही नहीं था, बल्कि दिल्ली समेत पूरे एनसीआर को आज लगभग जेल में तब्दील कर दिया गया था। दिल्ली के सभी बॉर्डर सील थे और भारी पुलिस बंदोबस्त था। टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर कहीं से भी आंदोलनकारी पहलवानों के समर्थकों, ख़ासकर किसानों और खाप पंचायत के सदस्यों को बॉर्डर से बहुत पहले रोक लिया गया और हिरासत में लेकर वापस भेज दिया गया।
दिल्ली से लगे सिंघु, ग़ाज़ीपुर व टिकरी बॉर्डर भी छावनी में तब्दील कर दिया गया। बड़े-बड़े पत्थरों, बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल के ज़रिए किसानों में डर पैदा करने की कोशिश की गई। महिला किसानों का जत्था टिकरी बॉर्डर पहुंचा तो पुलिस ने उन्हें बॉर्डर पार नहीं करने दिया। लेकिन किसानों ने वहीं बॉर्डर पर बैठ कर ज़बर्दस्त प्रदर्शन किया।
हालात ये थे कि महिला महापंचायत के लिए आ रहे उनके ढेरों समर्थक किसान, महिला व छात्र संगठनों के लोगों को शनिवार रात से ही हिरासत में लिया जाने लगा था।
शाम को रिहाई, धरना फिर शुरू
खबर है कि लगातार बढ़ते दबाव के बीच शाम को सभी गिरफ्तार पहलवानों को रिहा कर दिया गया। वे वापस अपने धरना स्थल जंतर मंतर पर पहुँच गए हैं।
रविवार शाम छह बजे के करीब एक ट्वीट में साक्षी मलिक ने बताया कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी पहलवानों को रिहा कर दिया गया है और वे वापस जंतर-मंतर वापस पहुंच गए हैं।
क्यों आंदोलित हैं अंतर्राष्ट्रीय पहलवान, दमन क्यों?
ज्ञात हो कि बीते जनवरी महीने में पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था।
हफ्तों विरोध के बाद बीते 23 जनवरी को मामले की जांच के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय के आश्वासन और ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज मैरी कॉम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति के गठन के बाद पहलवानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया था। इस दौरान बृजभूषण को महासंघ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया था।
हालांकि कोई कार्रवाई न होने के बाद बीते 23 अप्रैल को बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक समेत अन्य पहलवानों ने अपना प्रदर्शन दोबारा शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारी पहलवानों के दिल्ली पुलिस द्वारा बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर न दर्ज करने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 28 अप्रैल को उसके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई। इनमें से एक यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत और दूसरी महिला के शील भंग का प्रयास से संबंधित है।
लेकिन सत्ताधारी भाजपा अपने लाडले सांसद को बचाने में लगी रही और आजतक उसकी गिरफ़्तारी नहीं हुई। जिससे आक्रोश लगातार बढ़ता गया और अब यह जनआन्दोलन में तब्दील हो गया है।
संसद का उद्घाटन और दमन निरंकुशता की नई गवाही
28 मई निरंकुशता के एक नई इबारत की शुरुआत है। दिल्ली में एक तरफ महिला पहलवानों और महिला सम्मान पंचायत में जुटे समर्थक नागरिकों पर बर्बर कार्रवाई हो रही थी, दूसरी तरफ नए संसद भवन के उद्घाटन में लोकतंत्र के कसीदे पढे जा रहे थे।
पीएम मोदी राजतन्त्र के प्रतीक सेंगोल को सलामी दे रहे थे और उनकी बर्बर पुलिस पहलवान लड़कियों का दमन कर रही थी। आरोपी ब्रज भूषण शरण सिंह संसद भवन में फोटो खिंचवाते हुए ऐश कर रहा था तो देश की बहन-बेटियां न्याय की मांग पर दिल्ली पुलिस की ज्यादती का शिकार हो रही थी।
यह नए संसद भवन व संसदीय राजनीति के नए दौर की गवाही है। असल में यही है भारत के पूंजीवादी लोकतंत्र की असलियत और आने वाले दौर में निर्मम फासीवादी निरंकुशता की ओर बढ़ते भारत की मिसाल!
मोदी सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘खेलो इंडिया’, ‘महिला सशक्तीकरण’ और ‘मातृ शक्ति’ जैसे खोखले नारों की यही सच्चाई है।