साहित्य/सिनेमा

मंटो के जन्म दिवस पर उनकी एक मार्मिक और जीवंत कहानी “आखि़री सल्यूट”

सआदत हसन मंटो की यह कहानी आज़ादी के बाद कश्मीर के लिए दोनों मुल्कों में…

मई दिवस अन्तेष्टि : जब मज़दूरों का हुजूम उमड़ पड़ा; सुनाई पड़ती थीं सिर्फ सांसें और क़दमों की आहट

मई दिवस के शहीदों की ऐतिहासिक अन्तेष्टि की यह कहानी मई दिवस पर केन्द्रित हावर्ड…

दलित उत्पीड़न व संघर्ष पर केंद्रित फिल्म “जय भीम” : नई सोच लेकिन सीमा भी स्पष्ट

मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस चंद्रा के एक चर्चित केस पर आधारित यह फिल्म तमिलनाडु…

“आक्रोश” : हाशिये पर खड़े लोगों के अमानवीय हालात और सत्तातंत्र के सामने लाचारी दर्शाती फिल्म

इस फिल्म को देखते हुए लगातार एहसास होता है कि किस प्रकार करोड़ों लोग प्रभुत्वशाली…

भाषाई वैमनस्य, मजदूरों के प्रति घृणा व पुलिसिया जुल्म को उकेरती फिल्म “विसरन्नई (इंटेरोगेशन)”

यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है और जिस तरह विश्वसनीय तरीके से इसने…

“एक डॉक्टर की मौत” : एक प्रतिभाशाली के दर्द और हताशा को महसूस कराती बेहतरीन फिल्म

आखिर क्यों हमारे देश के नाम कोई महत्वपूर्ण आविष्कार नहीं है? क्यों प्रतिभाओं की तलाश…

कश्मीर के हालत पर बनी एक बेहद संवेदनशील और प्यारी सी फिल्म है “हामिद”

फिल्म की कहानी जितनी संवेदनशील और ज़िंदगी की जद्दोजहद से भरपूर है, उतनी ही खूबसूरती…

भूली-बिसरी ख़बरे

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