सैन्य प्रमुख सरकार के समक्ष अग्निपथ योजना में बदलाव का मांग रखने का कर रहे हैं विचार -रिपोर्ट

नई दिल्ली: वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का कहना है कि सशस्त्र बल सरकार को यह सुझाव दे सकते हैं कि अग्निपथ में शामिल होने वालों के लिए आयु सीमा को 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष किया जाए और चार साल के बाद 25% से बढ़ाकर कम से कम 50% को सेवा में बरकरार रखा जाए.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, सशस्त्र बल सरकार के समक्ष सबसे पहला प्रस्ताव यह रखने का विचार कर रहे हैं जिसके तहत सेना में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 कर दिया जाए. यह संशोधन इसलिए ताकि सेना में स्नातकों को शामिल किया जाए, जिन्हें तीनों सेवाओं में तकनीकी नौकरियों के लिए तैयार किया जा सकता है.

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘दूसरा प्रस्ताव ये कि विशेष क्षेत्रों में सैनिकों की कमी से बचने के लिए वर्तमान 25% की तुलना में कम से कम 50% अग्निवीरों को सेवा में जारी रखा जाए.’

पहले अधिकारी ने कहा, ‘ये बदलाव युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं. तीनों सेनाएं  पुरानी भर्ती प्रणाली के तहत बड़ी संख्या में स्नातकों की भर्ती करती थी. इसलिए स्नातकों को आवेदन करने की अनुमति देने के लिए आयु सीमा दो वर्ष बढ़ाने की आवश्यकता है.’

शुरुआत से ही अग्निपथ योजना देश भर में आलोचना का विषय रही है, और माना जाता है कि 2024 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस योजना के चलते उत्तर भारत में कुछ वोटों का नुकसान हुआ है.

अग्निवीर योजना के अंतर्गत केवल साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के युवा पुरुष और महिलाएं ही इस योजना के तहत आवेदन डाल सकते हैं, और केवल चार वर्षों के लिए उनकी भर्ती हो सकती है. इनमें से केवल 25% को अगले 15 वर्षों के लिए नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है.

पुरानी भर्ती प्रणाली के तहत साढ़े 17 से 23 वर्ष की आयु के आवेदक तकनीकी पदों के लिए आवेदन कर सकते थे.

पुरानी भर्ती प्रणाली के तहत भर्ती किए गए सैनिक पेंशन और अन्य लाभों के साथ सेवानिवृत्त होने से पहले लगभग 20 वर्षों तक सेवा करते हैं, जो चार साल के बाद सेवानिवृत किए जाने वाले अग्निवीरों को नहीं मिलते हैं.

एक तीसरे अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, ‘यदि कुछ अग्निवीरों को एक विशेष तकनीकी क्षेत्र का दायित्व दिया जाता है और उनमें से कोई भी अंतिम 25 प्रतिशत में जगह नहीं पाता, तो इससे उस क्षेत्र में बड़ा  खालीपन पैदा होगा. इसलिए हमें अधिक संख्या में अग्निवीरों को अंतिम भर्ती में जगह देनी होगी.’

इस योजना को लेकर विवाद गुरुवार को तब और गहरा गया जब पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल केबी सिंह ने भर्ती मॉडल की आलोचना करते हुए कहा कि यह सेना की युद्ध प्रभावशीलता को कम कर देगा.

उन्होंने  एक्स पर यह भी कहा कि, अग्निपथ को चलाने वाली एकमात्र प्रेरणा पेंशन बिल को कम करना है.

केबी सिंह की टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह अग्निपथ प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में से थे और सरकार द्वारा जून 2022 में योजना की घोषणा करने से कुछ महीने पहले नवंबर 2021 में शीर्ष पद से सेवानिवृत्त हुए थे.

यह योजना हाल ही में संसद में भी गहन बहस के केंद्र में था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने कांग्रेस पर अग्निपथ के बारे में झूठ फैलाने का आरोप लगाया था. सदन में राहुल गांधी ने इस योजना को लेकर सरकार पर हमला किया था.

इस योजना की घोषणा के समय सरकार ने कहा था कि यह योजना सशस्त्र बलों की आयु प्रोफ़ाइल को कम करेगी, एक फिट सेना सुनिश्चित करेगी और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम तकनीकी रूप से कुशल युद्ध बल तैयार करेगी.

हालांकि, सरकार के इन तमाम दावों के बावजूद अग्निपथ योजना देश भर में आलोचना का विषय रही है. द वायर हिंदी ने लोकसभा चुनावों से पहले कई राज्यों के उन इलाकों का दौरा किया था जिन्हें ‘सैनिकों का गांव’ कहा जाता है.

द वायर हिंदी की टीम ने अग्निपथ योजना पर अपनी इस श्रृंखला के दौरान बिहार के बांका जिले के निवासी अनूप यादव से मुलाक़ात की थी.

अग्निपथ योजना के लागू होने के बाद पहली भर्ती में 23 वर्षीय अनूप यादव नियुक्ति पत्र पा गए थे, लेकिन परिजनों की हिदायत पर उन्होंने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया और सेना की नौकरी पर कभी नहीं गए.

द वायर से साभार

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