भारत: बीते एक साल में 4 फीसदी घट गई नौकरियां, ग्रेजुएट बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा, वेतन घटा

देश में श्रमिकों का वेतन घटा या स्थिर है। स्थाई श्रमिकों का वेतन साल 2019 के बाद नकारात्मक स्थिति में, अस्थाई श्रमिकों को साल 2022 में न्यूनतम वेतन तक नहीं मिला।

भारतीय कंपनियों द्वारा मार्च के महीने में की गई भर्तियां पिछले साल की समान अवधि की तुलना में चार प्रतिशत घट गईं। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह आकलन पेश किया गया है। दूसरी तरफ अस्थाई और फ्रीलांस काम पर जोर बढ़ा है। कार्यबल में अहम हिस्सेदारी रखने वाले अस्थायी कामगारों का अनुपात इसी अवधि में 21 प्रतिशत बढ़ा है।

मार्च, 2023 से मार्च 2024 तक के भर्ती आंकड़ों के विश्लेषण से तैयार रिपोर्ट से पता चलता है कि ग्राहकों को अस्थायी रूप से सेवाएं देने वाले पेशेवरों या फ्रीलांस काम में एक साल पहले की तुलना में 184 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके अलावा कार्यबल में अहम हिस्सेदारी रखने वाले अस्थायी कामगारों का अनुपात इसी अवधि में 21 प्रतिशत बढ़ा है। यह व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रीलांसर और स्वतंत्र ठेकेदारों पर कंपनियों की बढ़ती निर्भरता को दिखाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, काम के आधार पर भुगतान पाने वाले अस्थायी कामगारों पर आधारित ‘गिग अर्थव्यवस्था’ में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र सबसे आगे है। गिग अर्थव्यवस्था में आईटी सॉफ्टवेयर की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो गई है जो मार्च, 2023 में 22 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2024 में 46 प्रतिशत हो गई है।

सर्वाधिक हैं शिक्षित बेरोजगार

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) की हालिया रिपोर्ट के हिसाब से भारत में ग्रेजुएट युवाओं की बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा, 29.1 फीसदी है। जो युवा पढ़-लिख नहीं सकते, उनकी बेरोजगारी दर 3.4 फीसदी है। इधर, सैकेंडरी या हाय एजुकेशन वाले युवाओं के लिए बेरोजगारी दर 18.4 फीसदी निकली।

आईएलओ का कहना है कि भारत में युवा बेरोजगारी दर अब वैश्विक स्तर से ज्यादा हो गई है।

  • आईएलओ के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था नए शिक्षित युवाओं के लिए गैर-कृषि क्षेत्रों में पर्याप्त नौकरियां पैदा करने में सक्षम नहीं है। इसी के चलते बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है।

इंडिया एंप्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024. रिपोर्ट इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (IHD) ने जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के बेरोजगारों में 83 फीसदी युवा हैं।

वेतन घटा घटा, न्यूनतम वेतन भी नहीं

आईएलओ की रिपोर्ट रिपोर्ट के अनुसार देश में श्रमिकों का वेतन ज्यादातर एक जैसा रहा है, या ये घटा है। नियमित श्रमिकों और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों के वेतन में साल 2019 के बाद नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई है। इतना ही नहीं बिना स्किल वाले श्रमिकों को साल 2022 में न्यूनतम वेतन तक नहीं मिला है।

टेक्नोलॉजी से नौकरी पर खतरा

टेक्नोलॉजी से जुड़े बदलावों ने कौशल और रोजगार के प्रकारों की मांग को भी प्रभावित किया है। रिपोर्ट के अनुसार उच्च और माध्यम स्किल वाली नौकरियों और गिग अर्थव्यवस्था में युवाओं का बेहतर प्रतिनिधित्व है। हालांकि, इन क्षेत्रों में नौकरी की असुरक्षा अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

महिलाओं का रोजगार चुनौतीपूर्ण

रिपोर्ट महिला श्रम बल भागीदारी की कम दर के साथ श्रम बाजार में बढ़ते जेंडर गैप पर भी प्रकाश डालती है। रिपोर्ट के मुताबिक युवा महिलाओं, विशेषकर उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं को रोजगार हासिल करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

आईएलओ की रिपोर्ट का सार

  • साल 2000 में 15-29 साल के बेरोजगार भारतीयों की कुल हिस्सेदारी 88.6 फीसदी थी, 2022 में ये गिरकर 82.9% हो गई।
  • आंकड़े बताते हैं कि पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 76.7 फीसदी है, जबकि पुरुषों की संख्या 62.2 फीसदी है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी ज्यादा है।
  • वयस्कों के मुकाबले युवाओं में बेरोजगारी ज्यादा है।
  • भारत में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर दुनिया में सबसे कम, लगभग 25 फीसदी है।
  • आईएलओ ने कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के चलते कर्मचारियों और सेल्फ इप्लॉयड लोगों के बीच का अंतर साफ नहीं हो पा रहा है और इससे नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं।

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