रुद्रपुर: प्रशासन द्वारा 10 मार्च तक श्रमिक मामलों के समाधान का आश्वासन; प्रस्तावित धरना कार्यक्रम स्थगित

सक्षम श्रम अधिकारी की तैनाती और श्रमिक समस्याओं के समाधान की मांग पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा का 4 मार्च को श्रम भवन में धरना व घेराव का था ऐलान; प्रशासन ने मोर्चा से की वार्ता दिया आश्वासन।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में जहां मज़दूरों पर गैरकानूनी कार्रवाइयाँ बेलगाम हैं, निलंबन निष्कासन का मनमानापन जारी है, वहीं श्रम विभाग में किसी सक्षम अधिकारी के न होने से सारे मामले लंबित हैं। ऐसे में श्रमिक संयुक्त मोर्चा, उधम सिंह नगर ने सक्षम अधिकारी की नियुक्ति और श्रमिक समस्याओं के समाधान करने की मांग को लेकर 4 मार्च 2024 को श्रम भवन रुद्रपुर में धरना और घेराव की घोषणा की थी।

इस बीच 29 फरवरी को जिला प्रशासन ने सक्रिय पहल ली और उप जिलाधिकारी रुद्रपुर ने श्रमिक संयुक्त मोर्चा के साथ वार्ता करके उप श्रमआयुक्त को सप्ताह में 3 दिन बैठने की व्यवस्था, सक्षम श्रम अधिकारी की तैनाती तथा 10 मार्च तक मौजूदा प्रमुख श्रमिक समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

1 मार्च को रुद्रपुर के मद्रास कैफे में आयोजित प्रेस वार्ता में श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी और महासचिव चंद्र मोहन लखेड़ा ने बताया कि इस वार्ता के बाद मोर्चा ने फिलहाल 4 मार्च का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। यदि 10 मार्च तक प्रशासन के आश्वासन के अनुसार समाधान नहीं निकलता है तो पुनः श्रम भवन घेराव का कार्यक्रम हाथ में लेना हमारी मजबूरी होगी। प्रेस वार्ता में मोर्चा पदाधिकारी और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया।

मज़दूर समस्याएं विकट, न्याय के लिए परेशान मज़दूर

प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान में गैर कानूनी बर्खास्तगी और श्रमिक शोषण के खिलाफ सिडकुल की कई कंपनियों में मज़दूर संघर्षरत हैं।

लुकास टीवीएस के मज़दूर यूनियन बनाने के बाद से ही प्रबंधन के दमन के शिकार हैं, कई साथी बर्खास्त हैं और मांग पत्र भी लंबित है। पिछले 92 दिनों से लगातार धरने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

इंटरार्क पंतनगर और किच्छा प्लांट के मज़दूरों का जिला स्तरीय प्रशासनिक कमेटी द्वारा कराए गए समझौते का, यहाँ तक कि श्रम न्यायालय और लोक अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं हो रहा है उल्टे मज़दूरों कि बर्खास्तगी लगातार जारी है।

करोलिया लाइटिंग में प्रशासन व उप श्रमआयुक्त की मध्यस्थता में संपन्न समझौते के बावजूद डेढ़ साल बाद यूनियन अध्यक्ष और महामंत्री को, जो कि संरक्षित कर्मकार भी हैं, कंपनी ने गैर क़ानूनी रूप से बर्खास्त कर दिया है। पीडीपीएल/समाज ऑटो के मज़दूर लंबे समय से बाहर हैं।

ऐसे ही कई कंपनियों के मज़दूर दमन के शिकार हैं, ऑटो लाइन, हैंकल, एलजीबी, वोल्टास, बजाज मोटर्स, महिंद्रा, सीआईई इंडिया, पारले, असाल, गुजरात अंबुजा, रॉकेट इंडिया सहित तमाम कंपनियों के मज़दूर गैर क़ानूनी बर्खास्तगी झेल रहे हैं; तमाम कंपनियों के मांग पत्र लंबित हैं, लेकिन मज़दूरों को कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा है।

मोर्चा पदाधिकारी ने कहा कि राज्य का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद श्रम भवन रुद्रपुर में कोई भी सक्षम अधिकारी नहीं है, नियमित उप श्रम आयुक्त नहीं है, सप्ताह में महज एक दिन डीएलसी बैठने की घोषणा के बावजूद यह खानापूर्ति भी नहीं होती है। यहाँ लगातार ऐसे सहायक श्रम आयुक्त की नियुक्ति हो रही है जिसके पास 2 साल तक वेतन और बोनस जैसे कई विवाद सुनने का अधिकार नहीं है। मज़दूरों के सारे मामले कोर्ट भेजकर मज़दूरों को और संकट में धकेला जा रहा है। वर्तमान में श्रम विभाग महज दिखाने का दांत है। राज्य के मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद सरकार की उपेक्षा स्पष्ट है।

4 मार्च को श्रम भवन घेराव का था आह्वान

ऐसी स्थितियों में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने 4 मार्च 2024 को दिन में 2:30 बजे से श्रम भवन रूद्रपुर में धरना और घेराव का कार्यक्रम रखा था। मोर्चा की दो ही प्रमुख मांग है-

1-     श्रम भवन में नियमित उप श्रम आयुक्त की तैनाती की जाए, सक्षम सहायक श्रमआयुक्त नियुक्त हो और वार्ता द्वारा श्रमिक समस्या के समाधान की जगह श्रम न्यायालय भेजना की परंपरा बंद की जाए;

2-     तात्कालिक तौर पर विभिन्न कंपनियों के मज़दूरों की जो समस्याएं हैं उसका तत्काल निस्तारण किया जाए, मज़दूरों को न्याय मिले।

प्रशासन ने दिया समाधान का आश्वासन

मोर्चा ने बताया कि 29 फरवरी को प्रशासन की ओर से उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ने मोर्चा व यूनियन प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की जिसमें सहायक श्रमायुक्त (एएलसी) भी मौजूद थे। प्रशासन ने सभी बिंदुओं को सुना और भरोसा व आश्वासन दिया कि-

1-     सहायक श्रम आयुक्त ने कहा कि 10 मार्च तक वार्ता द्वारा लंबित सभी श्रमिक विवादों में सकारात्मक निर्णय निकाल कर जिला प्रशासन को सूचित करेंगे।

2-     श्रम भवन में सक्षम अधिकारी के बाबत जिला प्रशासन ने कहा कि सप्ताह में 3 दिन डीएलसी को बैठने हेतु पत्र शासन को तत्काल भेजा जाएगा। साथ ही नियमित डीएलसी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी। एसडीएम ने एएलसी से यह भी कहा कि जिन विवादों का उनके स्तर पर समाधान न निकले, उसे कोर्ट भेजने की जगह वे प्रशासन के पास भेजें।

3-     श्रमिक समस्याओं के समाधान हेतु मोर्चा के साथ जिला स्तरीय बैठक हर महीने करने पर भी विचार हुआ।

आज की प्रेस वार्ता को मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, महासचिव चंद्रमोहन लखेड़ा, मजदूर सहयोग केन्द्र से मुकुल, करोलिया लाइटिंग एम्पलाइज यूनियन से हरेंद्र सिंह, इंटरार्क मजदूर संगठन उधम सिंह नगर से वीरेंद्र कुमार, टीवीएस लुकास मज़दूर संघ से मनोहर, रॉकेट इंडिया कर्मचारी संघ से अभिषेक त्यागी, ब्रिटानिया कोंट्रेक वर्कर  से सूरज, नेस्ले कर्मचारी संगठन से प्रमोद ने संबोधित किया।

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