जेएनयू परिसर में जोरदार मशाल जुलूस; एबीवीपी की गुंडागर्दी के खिलाफ एकजुट हुए जेएनयू के छात्र

जेएनयू छात्र संघ चुनाव प्रक्रिया बाधित करने, आतंक फैलाने हेतु एबीवीपी द्वारा हमले में कलेक्टिव के सौर्य व प्रियम गंभीर रूप से घायल; अन्वेषा, मधुरिमा आदि को भी चोटें। विरोध में जोरदार प्रदर्शन।

दिल्ली। 29 फरवरी की आधी रात देश के प्रतिष्ठित  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र संघ चुनावों में हार जाने के डर से बौखलाए एबीवीपी के गुंडों द्वारा स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में छात्रों पर जानलेवा हमला करके आतंक का माहौल बनाया था। इसके विरोध में 1 मार्च की रात को जेएनयू परिसर में जोरदार मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में छात्रों ने भागीदारी की।

एबीवीपी की गुंडागर्दी के खिलाफ एकजुट हुए छात्रों ने जेएनयू परिसर में प्रशासन की सह पर गुंडागर्दी, आतंक, हिंसा के खिलाफ जोरदार नारे लगे, हमलावर एबीवीपी गुंडों की गिरफ़्तारी की माँग हुई। फासीवाद को नष्ट करो! लड़ेंगे, जीतेंगे! की आवाज बुलंद हुई।

जेएनयू के छात्र, कलेक्टिव के कार्यकर्ता और हमले में घायल कॉमरेड सौर्य मजूमदार ने मशाल जुलूस को संबोधित करते हुए कहा कि कल रात एबीवीपी की हिंसा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कौन छात्रों के साथ खड़ा है और कौन उनके खिलाफ है, हर कदम पर आरएसएस-भाजपा शासन की भाषा बोल रहा है।

उन्होंने कहा कि यूनियन चुनने के लिए जेएनयू छात्रों का संघर्ष पराजित नहीं होगा, एबीवीपी-आरएसएस के हर हमले में छात्र अधिक से अधिक संख्या में सामने आएंगे। यह वह ताकत है जो शक्तियों को डराती है, उन्हें हमारी आवाज को दबाने के लिए सभी हथकंडे अपनाने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे। एबीवीपी रणवीर सेना के समर्थन में नारे लगाएगी, तो जेएनयू के छात्र पूरे देश में पीड़ितों और शोषितों के लिए सामूहिक आवाज उठाएंगे।

इस हिंसक घटना के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध

इस हिंसक घटना के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार विरोध जारी है। तमाम छात्र व युवा संगठनों के अलावा जनवादी संगठनों और न्यायप्रिय जनता ने इसकी नींद की है और सत्ताधारी भाजपा-आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी की खुली गुंडई और जेएनयू परिसर के जनवादी माहौल को बर्बाद करने पर रोक लगाने की माँग की है।

29 फरवरी आधी रात चुनाव बाधित करने के लिया किया हमला

29 फरवरी की रात लगभग 1:30 बजे, एबीवीपी के गुंडों ने स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में छात्रों पर हमला किया, जहाँ स्कूल जीबीएम के सफलतापूर्वक संचालन के बाद एबीवीपी को आने वाले छात्र चुनावों में हार जाने का डर सताने लगा। सोशल मीडिया पर प्रसारित कई वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एबीवीपी के महत्वपूर्ण पदाधिकारी छात्रों पर लाठियों और स्टील की वस्तुओं से हमला कर रहे हैं। यह घटना आने वाले जेएनयूएसयू चुनाव में भाग ले रहे छात्रों पर एबीवीपी द्वारा लगातार बढ़ती हुई हिंसा का ही हिस्सा है। 

इस हमले में कलेक्टिव के दो कार्यकर्ता, सौर्य मजूमदार और प्रियम प्रियार्थ, गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें सिर और नाक में लगे गंभीर चोट के कारण एम्स के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। अन्य संगठन के कई साथियों जैसे कॉमरेड अन्वेषा और मधुरिमा को भी गंभीर चोटें आयी।

सुनियोजित हमलावर एबीवीपी कार्यकर्ता

घटना से पहले कॉमरेड दानिश (पिछले जेनयूएसयू के संयुक्त सचिव) को एबीवीपी ने जबरदस्ती बंधक बना रखा था, जिन्हे बचाने गए छात्रों पर एबीवीपी ने हाथापाई कर हमले की शुरुआत की। मौजूद छात्रों द्वारा लिए गए वीडियो में एबीवीपी (स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज) के सचिव कन्हैया कुमार को छात्रों के खिलाफ लाठियों का इस्तेमाल करते हुए साफ़-साफ़ देखा जा सकता है। प्रफुल्ल और विक्रम (दोनों कोरियाई अध्ययन केंद्र के छात्र और एबीवीपी सदस्य) को छात्रों के खिलाफ विभिन्न वस्तुओं का उपयोग द्वारा मार-पीट करते देखा जा सकता है।

रविकांत दुबे, एक और एबीवीपी के सदस्य, जो कि जेएनयू के छात्र भी नहीं हैं, कल के वीडियो में और पिछले 2 सप्ताह के विभिन्न हमलों में दिखाई दे रहे हैं।

जेएनयूएसयू चुनाव प्रक्रिया रोकने हेतु एबीवीपी लगातार हिंसा पर उतारू

9 फरवरी के बाद से पिछले 2 हफ्तों में, जेएनयूएसयू चुनाव प्रक्रिया को रोकने के लिए एबीवीपी लगातार हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है। 9 फरवरी को भी एबीवीपी ने विश्वविद्यालय की जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) की बैठक को हिंसक रूप से बाधित किया था। 12 फरवरी को आयोजित यूजीबीएम और अन्य स्कूल स्तर के जीबीएम में, जेएनयू के छात्रों ने छात्र-संघ के अपने अधिकार का दावा करते हुए बड़ी संख्या में भाग लिया है, परन्तु एबीवीपी ने सिर्फ उन्हें परेशान करने और बाधित करने की ही कोशिश की।

छात्रों की लोकतांत्रिक दावेदारी को देखते हुए एबीवीपी अपनी हिंसक रणनीति पर उतर आई है जबकि यह साफ दिख रहा है कि आम छात्रों के बीच उनका कोई समर्थन नहीं है। वे समझ गए हैं कि जेएनयू में कोई भी वास्तविक लोकतांत्रिक चुनाव केवल उनकी हार में ही समाप्त होगी।

एबीवीपी, प्रशासन और पुलिस का गँठजोड़

घटना के बाद जारी प्रेस विज्ञाति के माध्यम से कलेक्टिव ने बताया कि हम साल दर साल देखते आ रहे हैं कि जब भी छात्र अपनी जायज मांगें उठाते हैं तो एबीवीपी, प्रशासन और पुलिस मिलकर उनके खिलाफ कदम उठाते हैं। जेएनयू हमेशा से देश में एक मॉडल रहा है जहां हाशिए की पृष्ठभूमि के छात्र गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा में प्रवेश कर पाते हैं और अलग अलग तपकों के छात्रों को साथ पढने का मौका मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में, उस मॉडल को नष्ट करने के लिए विभिन्न तरीकों से सत्तारूढ़ शासन द्वारा ठोस हमलों को देखा गया है।

फ़ीसें बढ़ाने, सार्वजनिक शिक्षा नष्ट करने की तैयारी

2020 से, HEFA द्वारा 900 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया गया है, जिसे शुल्क वृद्धि के माध्यम से वसूल किया जाएगा, जिससे शिक्षा की कीमत का भोझ छात्रों पर डाला जाएगा। इसके अलावा, 2014 के बाद से, जेएनयू प्रशासन ने कई संकाय सदस्यों को नियुक्त किया है जो आरएसएस के करीबी या उसके आधिकारिक सदस्य हैं, अन्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया है जो समान पदों के लिए ज्यादा योग्य हैं। इन सभी कदमों ने धीरे-धीरे जेएनयू में सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नष्ट कर दिया है।

विश्वविद्यालयों में नवउदारवादी-फासीवादी डिज़ाइन को लागू करने वाले समान कदमों ने सार्वजनिक शिक्षा का सपना बहुत दूर कर दिया है। दिल्ली के विभिन्न परिसरों में, डीयू से लेकर जामिया और एयूडी तक, एबीवीपी-आरएसएस-प्रशासन गठजोड़ ने शिक्षा को नष्ट कर दिया है, चाहे फीस वृद्धि के माध्यम से या दक्षिणपंथी नियुक्तियों या पूरी तरह से हिंसा के माध्यम से।

हमलावरों पर सख्त और तत्काल कार्रवाई हो!

कलेक्टिव दिल्ली स्टेट कमिटी ने माँग की है कि जेएनयू में कल रात हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त और तत्काल कार्रवाई जरूरी है। परिसरों में एबीवीपी की गुंडागर्दी, नवउदारवादी-फासीवादी हमले और लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष आज एक समझौताहीन राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन के माध्यम से लड़ना होगा।

जयपुर में भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने किया था हमला

पिछली 13 फ़रवरी को फैज़ अहमद फैज़ की जयंती पर शहीद भगत सिंह डिस्कशन सर्किल द्वारा आयोजित ‘ओपन माइक’ कार्यक्रम पर एबीवीपी (अखिल भारतीय विधार्थी परिषद) के गुंडों द्वारा राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ मारपीट, महिला साथी के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलोज़ की गई थी।

इन तत्वों ने खुली गुंडई के साथ बुक्स स्टॉल में लगी भगत सिंह, पाश, फैज़, प्रेमचंद, गाँधी, अम्बेडकर, साहिर लुधियानवी, महादेवी वर्मा, रुक्क्य्या बेगम, सर्वेश्वर दयाल, गोरख़पाण्डेय, नागार्जुन आदि साहित्यकारों, कवियों, लेखकों की किताबों को ‘देशद्रोही’ और ‘राष्ट्रविरोधी’ बताने, जबरन बुक स्टॉल की किताबों को बिखेरने-फेकने, ओपन माइक के बैनर, दरी, किताबों के साथ थोड़-फोड़ करने की दुस्साहसी घाटन हुई थी।

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