मोदी सरकार का क्या है नया काला कानून जिसके विरोध में देशभर में बस-ट्रक का है चक्का जाम?

औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों को बदलने की आड़ में मोदी सरकार का नया कानून हिट-एंड-रन मामलों में बाइक, कार, ट्रक, टैंकर, बस, टैंपो जैसे सभी वाहन चालकों पर लागू होगा।

नए वर्ष की शुरुआत के साथ देश भर के ट्रक-बस ड्राइवर हड़ताल पर हैं। अचानक शुरू हुई इस हड़ताल से सभी राज्यों की बस सेवा से लेकर ट्रक, टैंकर तक सब ठप्प हो गया है। निजी बसें, ट्रक, तेल टैंकर और टैक्सियां सड़कों से नदारद हैं। इससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

सोमवार से तीन दिनों के लिए शुरू हड़ताल को मोदी सरकार की हठधर्मिता से अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की तैयारी है। इस हड़ताल का राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटका, तमिलनाडु, केरला सहित पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों तक हड़ताल का व्यापक असर है।

दरअसल, भारतीय न्याय संहिता के तहत हिट-एंड-रन मामलों के लिए 7 लाख रुपए जुर्माना और 10 साल जेल की सजा के नए प्रावधान का विरोध करते हुए ट्रक, टैक्सी और बस ड्राइवरों ने देशव्यापी हड़ताल की और केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की माँग करते हुए कहा कि इससे उनका अनुचित उत्पीड़न हो सकता है।

क्या है नया क़ानून

बीते दिनों केन्द्र की मोदी सरकार ने तमाम जनविरोधी काले कानूनों को थोपने के क्रम में अयोध्या राम मंदिर शोर के बीच औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों का ‘भारतीयकरण’ करने की आड़ में तीन नए आपराधिक क़ानून- भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) क़ानून पारित किए हैं, जो दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। 

किसान विरोधी तीन कृषि क़ानूनों, मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिताओं, नई शिक्षा नीति, सार्वजनिक कंपनियों को बेचने आदि के क्रम में अब मोदी सरकार ने आनन-फानन में इन तीन आपराधिक क़ानूनों को संसद में पारित किया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी भी मिल चुकी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के बाद भारतीय न्याय संहिता भी अब कानून बन चुका है। ये कुछ ही दिनों में पूरे देश में लागू हो जाएगी। इसी क़ानून के तहत ‘हिट एंड रन’ से जुड़े मामले शामिल हैं। इसमें बहुत सारे मामलों में सजा और जुर्माने के प्रावधान बेहद कठिन हैं।

‘हिट एंड रन’ का नया प्रावधान क्यों है नामंजूर?

हिट एंड रन का सीधा सा अर्थ है कि दुर्घटना के बाद ड्राइवर का गाड़ी के साथ मौके से भाग जाना।

भारतीय न्याय संहिता में हिट एंड रन कानून में जो नए प्रावधान हैं, उसके मुताबिक अगर गाड़ी ड्राइवर हादसे के बाद पुलिस को सूचना दिए बिना फरार होता है तो उसे 10 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा 7 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है। 

इसके तहत अगर गाड़ी से टकराने वाला शख्स गलत तरीके से सड़क को पार करता है या गाड़ी के सामने आ जाता है तो ड्राइवर को अधिकतम पांच साल की सजा और जुर्माना भरना पड़ेगा। लेकिन अगर टक्कर गलत ढंग से गाड़ी चलाने की वजह से होती है तो ड्राइवर को 10 साल जेल की सजा काटनी होगी।

ये कानून दोपहिया बाइक, स्कूटी से लेकर कार, ट्रक, टैंकर, बस, टैंपो जैसे सभी वाहन चालकों पर लागू होता है।

हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने भ्रमित करते हुए संसद में कहा था कि उन चालकों के प्रति नरमी बरती जाएगी जो पुलिस को सूचना देंगे और घायल को अस्पताल ले जाएंगे।

जबकि मौजूदा कानून के मुताबिक ऐसे मामले में आईपीसी की धारा 279 में ड्राइवर की पहचान के बाद 304ए और 338 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसमें दो साल की सजा का प्रावधान है।

यह एक और जनविरोधी काला क़ानून है

औपनिवेशिक क़ानून बताकर जो नया कानून बना है, वह जन विरोधी और संविधान विरोधी होने के साथ चालकों के मूल अधिकारों का हनन है। ज्यादातर निजी वाहन के चालक गरीब परिवारों से आते हैं, इसलिए या आम जन विरोधी प्रावधान है।

दुर्घटनाओं के पीछे के कारणों का समाधान करने के साथ-साथ लोगों की नागरिक चेतना बढ़ाने के बजाय, नए कानून द्वारा जेल की सजा में पांच गुना वृद्धि खुली तानाशाही है। जेल-सजा बढ़ाना दुर्घटनाओं से रोक का कोई समाधान नहीं देती है।

दरअसल, ड्राइवर किसी को मारना नहीं चाहते हैं। अधिकांश दुर्घटनाएं सड़क की स्थिति, सरकार द्वारा सिग्नलिंग और अन्य सुरक्षा आवश्यकताओं की घोर उपेक्षा के कारण होती हैं, जो सुरक्षित परिवहन के लिए आवश्यक हैं। हादसे कोहरे और जलवायु परिवर्तन के कारण भी हो सकती है। कम वेतन और लंबे समय चलाने के कारण भी दुर्घटनाएं होती हैं, जिसका जिम्मेदार भी मुख्यतः चालक नहीं होता।

कई दुर्घटनाएँ ड्राइवरों के नियंत्रण से बाहर होती हैं। और कई हिट-एंड-रन मामलों में, ड्राइवर हादसों के लिए अपनी जिम्मेदारी से बचने के इरादे से नहीं भाग रहे होते हैं। इसके बजाय, गुस्साई भीड़ और स्थानीय निवासियों द्वारा उत्पन्न संभावित खतरे से अपनी जान बचाने के लिए उनको भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

क्या कहते हैं परिवहन चालक?

ड्राइवरों के लिए आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति हो गई। विरोध करने वाले ड्राइवरों का तर्क है कि टक्कर के बाद अगर वे भागते हैं तो उन्हें नए कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी और अगर वे रुकते हैं तो मौके पर मौजूद भीड़ उन पर हमला कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि अक्सर सड़क दुर्घटना के मामले में मौके पर मौजूद भीड़ उग्र हो जाती है और गाड़ी चालक पर हमला कर देती है। कई बार यह हिंसक भीड़ सिर्फ पिटाई तक नहीं रुकती और मामला मॉब लिंचिंग का रूप ले लेता है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की परिवहन समिति के अध्यक्ष सीएल मुकाती ने कहा, हिट एंड रन के मामलों में सरकार द्वारा अचानक पेश किए गए कड़े प्रावधानों को लेकर चालकों में आक्रोश है और उनकी मांग है कि इन प्रावधानों को वापस लिया जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार को हिट एंड रन के मामलों में अन्य देशों की तर्ज पर सख्त प्रावधान लाने से पहले उनकी तरह बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष अमृतलाल मदान ने कहा कि संशोधन से पहले स्टेक होल्डर्स से राय नहीं ली गई। देश में एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल का अभाव है। पुलिस बिना जांच दोष बड़े वाहन पर मढ़ देती है। ट्रक ड्राइवर मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन की मांग कर रहे हैं।

विभिन्न संगठनों ने किया समर्थन

देश के तमाम मज़दूर व ट्रेड यूनियनों, संगठनों, किसान संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इन काले क़ानूनों का विरोध करते हुए चालकों की देशव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है।

मज़दूर सहयोग केन्द्र (एमएसके) ने कहा कि ज्यादातर परिवहन चालक गरीब परिवारों से आते हैं, जो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इसलिए यह प्रावधान रोडवेज, ट्रक व अन्य निजी चालकों और छोटे ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ तथा बड़े ट्रांसपोर्टरों, बड़े पूँजीपतियों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पक्ष में है।

एमएसके ने परिवहन व ट्रक चालकों की हड़ताल के साथ अपनी पूरी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए आम जन से इस न्यायसंगत मांग के समर्थन में आगे आने की अपील की है और इस काले कानून को रद्द करने की माँग की है।

एआईकेएमएस ने बयान जारी करके गरीब परिवारों से आने वाले ट्रक ड्राइवरों के काम पर कड़े प्रावधान लागू करने के लिए आकस्मिक मृत्यु पीड़ितों की भावनाओं से खेलने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की है।

टीयूसीआई ने भी उस काले कानून को तत्काल निरस्त करने का आह्वान किया जो मनमाने ढंग से ड्राइवरों पर सजा में 5 गुना वृद्धि करता है।

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