एक साल में आईटी क्षेत्र के 60,000 आउटसोर्स अनुबंध कर्मियों ने नौकरी गंवाई: रिपोर्ट

आईटी क्षेत्र में फ्लेक्सी कर्मचारियों की भर्ती 6 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही कम हो गई। सॉफ्टवेयर उद्योग में अगली कुछ तिमाहियों में अनुबंध श्रमिकों की भर्ती कमजोर रह सकती है।

नई दिल्ली: एक भर्ती निकाय ने मंगलवार को कहा कि कंपनियों द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से काम पर रखे गए फ्लेक्सी कर्मचारियों की नौकरियों में एक साल पहले की तुलना में 7.7 प्रतिशत कम हो गईं और लगभग 60,000 आउटसोर्स अनुबंध कर्मियों ने मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नौकरी खो दी.

एनडीटीवी के मुताबिक, देश भर में 120 से अधिक भर्ती एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के अध्यक्ष लोहित भाटिया ने कहा, ‘आईटी फ्लेक्सी स्टाफिंग सेक्टर के भीतर नई रोजगार सृजन में गिरावट आईटी हायरिंग में वैश्विक मंदी को दर्शाती है.’

उन्होंने कहा कि हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और रिटेल सेक्टर में हायरिंग मजबूत रही, जिसे घरेलू कंज्यूमर डिमांड से मदद मिली.

रिपोर्ट के अनुसार, 194 बिलियन डॉलर के आईटी क्षेत्र, जिसकी सॉफ़्टवेयर सेवाओं ने व्यवसायों को महामारी के दौरान ऑनलाइन खरीदारी और दफ्तर से बाहर काम करने की आदतों को अपनाने में मदद की, इस वर्ष मंदी का सामना कर रहा है.

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों की एक रिपोर्ट ने पिछले सप्ताह चेतावनी दी थी कि बढ़ती महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दे और यूक्रेन युद्ध के चलते भारत की आईटी सेवाओं में महामारी के दौरान देखी गई खत्म हो जाएगी।

भाटिया ने कहा कि आईटी क्षेत्र में फ्लेक्सी कर्मचारियों की भर्ती मार्च तिमाही में 6 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही कम हो गई. उन्होंने यह भी जोड़ा कि सॉफ्टवेयर उद्योग में अगली कुछ तिमाहियों के लिए तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के माध्यम से अनुबंध श्रमिकों की भर्ती कमजोर रह सकती है.

मुंबई स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, अप्रैल में देश की बेरोजगारी दर लगातार चौथे महीने बढ़कर 8.11 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने 7.8 फीसदी थी.

फेडरेशन ने कहा कि मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2022-23 में वेंडरों के माध्यम से 177,000 नौकरियों को जोड़ते हुए अन्य क्षेत्रों में भी पिछले वर्ष के 230,000 श्रमिकों की तुलना में फ्लेक्सी कर्मचारियों की कुल मांग में कमी आई है.

भारतीय कंपनियों द्वारा वेंडरों के माध्यम से काम पर रखे गए फ्लेक्सी कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 1.4 मिलियन हो गई है, जिसमें एक-चौथाई महिला कर्मचारी भी शामिल हैं.

द वायर से साभार

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