फ्रांस में विरोध के बीच कर्मचारी विरोधी पेंशन बिल पारित, दमन के बीच आंदोलन हुआ और उग्र

मनमाने तरीके से सेवानिवृत्त की आयु और पेंशन के लिए कार्यअवधि बढ़ाने वाले बिल के खिलाफ कर्मचारियों का जारी आंदोलन और तेज हो गया है। रेल रोकने में छात्र भी रहे शामिल।

फ्रांस में सरकार के खिलाफ पेंशन सुधार को लेकर प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच संसद में सोमवार, 20 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसमें मामूली अंतर से राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने विश्वास मत हासिल कर लिया और सरकार बमुश्किल बच गई। लेकिन जनता का भरोसा सरकार से उठ गया है।

संसद में मनमाने तरीके से सेवानिवृत्त की आयु और पेंशन आहर्ता बढ़ाने वाले बिल को लागू करने के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फैसले के खिलाफ कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इसमें फ्रांसीसी कचरा संग्रहकर्ता, रिफाइनरी कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं।

कार्निवल में एक महिला को ले जाते पुलिस कर्मी

उधर सप्ताह के शुरू में हुए कई सरकार विरोधी प्रदर्शनों की तरह, दक्षिणी फ्रांस के मार्सिले में आयोजित कार्नावल डे ला प्लेन संघर्ष के साथ समाप्त हुआ, क्योंकि फ्रांसीसी दंगा पुलिस ने कार्निवल में जाने वालों को रोक और अग्निशामकों ने जलते पुतलों के अवशेषों को बुझा दिया।

इस बीच आज बुधवार को राष्ट्रपति मैक्रों ने हठधर्मिता के साथ कहा कि पेंशन सुधार इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा।

रेल ट्रैक जाम; विद्यार्थी भी समर्थन में उतरे

इस बीच पेंशन सुधार के बाद फ्रेंच संसद द्वारा दो अविश्वास प्रस्तावों को खारिज होने पर आज बुधवार को राष्ट्रीय हड़ताल और विरोध के नौवें दिन की पूर्व संध्या पर रेलवे स्टेशन के सामने एक प्रदर्शन के दौरान हड़ताल पर बैठ गए।

इस दौरान हड़ताली कर्मचारी सीजीटी श्रमिक संघ के झंडे के साथ टीजीवी हाई स्पीड ट्रेन को रोकने के लिए रेलवे पटरियों पर टहलते रहे।

उधर विद्यार्थी भी कर्मचारी आंदोलन के साथ कंधा मिलकर चल रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर एक प्रदर्शन के दौरान टीजीवी हाई स्पीड ट्रेन को रोकने के लिए छात्र भी रेलवे ट्रैक पर चले गए।

कचरे के ढेर में लगाई आग, सैकड़ों लोग गिरफ्तार

बिल के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सेंट्रल पेरिस में कचरे की ढेर में आग लगा दी। पेरिस के सबसे प्रतिष्ठित जगहों में से एक जगह पर जलते हुए कचरे के ढेर को बुझाने के दौरान प्रदर्शनकारियों और फायरमैन में हाथापाई हो गई। पुलिसबल के साथ प्रदर्शनकारियों का चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है।

पेरिस पुलिस ने मंगलवार को कहा कि राजधानी में रात भर में 234 लोगों को सड़कों पर कचरे में आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि मैक्रों की पेंशन सुधार योजना के खिलाफ जनवरी के मध्य से ही फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा है। एक दिन लगभग 25 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उधर परिवहन और शिक्षा क्षेत्र में हड़तालों के कारण कामकाज बाधित रहा है। लेकिन अब इस बिल को पारित कराने के लिए अपनाए तरीके को लेकर विरोध और तेज हो गया है।

सरकार ने 9 मत से जीते अविश्वास मत, बिल पारित

16 मार्च को फ्रांस की नेशनल असैंबली में प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बॉर्न ने संवैधानिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए बिना वोटिंग के ही बिल पास करवा दिया था। पीएम ने आर्टिकल 49.3 का इस्तेमाल किया जिसके तहत बहुमत न होने पर सरकार के पास बिना वोटिंग के बिल पास कराने का अधिकार है।

इसके बाद विपक्षी नेता मरीन ले पेन ने इमैनुएल मैक्रों की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही थी। फ्रांस सरकार के खिलाफ दो अविश्वास प्रस्ताव लाए गए थे। सरकार दोनों अविश्वास मत जीत गई है। इसी के साथ सेवानिवृत्त की उम्र बढ़ाने वाला बिल अब कानून बन गया है। आसान शब्दों में कहें तो- अब कानूनी तौर पर सेवानिवृत्त की उम्र 62 से बढ़कर 64 हो गई है।

भारतीय समय के मुताबिक, सोमवार देर रात फ्रांस की संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। 278 सांसदों ने अविश्‍वास प्रस्‍ताव का समर्थन किया जो सफल होने के लिए आवश्यक 287 से सिर्फ नौ वोट ही कम है। अगर प्रस्ताव पास हो जाता तो मैक्रों सरकार गिर जाती और नया चुनाव करवाया जाता।

बिल का विरोध, राष्ट्रपति से इस्तीफा की माँग 

सेवानिवृत्त की उम्र बढ़ाने वाले बिल के कानून बनने के बाद भी लोगों का प्रदर्शन जारी है।

अविश्वास मत की विफलता की घोषणा होने पर वामपंथी ला फ्रांस इंसूमिस (LFI, फ्रांस अनबोड) के सांसदों ने चिल्लाया- इस्तीफा…इस्तीफा…. उन्होंने कार्ड बोर्ड में लिखा, हम सड़कों पर मिलेंगे। LFI के संसदीय समूह के प्रमुख मथिल्डे पनोट ने कहा कि कुछ भी हल नहीं हुआ है, हम वह सब करना जारी रखेंगे, जिससे इस सुधार को वापस लिया जा सके और भी हड़ताल करेंगे।

विपक्ष का कहना है कि ये मैक्रों के पेंशन बिल पर एक संसदीय वोट को दरकिनार करने के फैसले को दर्शाता है, जिसने अविश्वास प्रस्ताव को गति दी। इसका परिणाम यह रहा कि मैक्रों के सुधारवादी एजेंडे को कमजोर कर दिया है और उनके नेतृत्व को कमजोर कर दिया।

क्या है नया बिल?

नए पेंशन बिल में कर्मचारियों को 62 की जगह 64 साल की उम्र तक काम करना होगा। पूरी पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम सेवाकाल की अवधि भी बढ़ जाएगी। अब पूरी पेंशन लेने के लिए 42 की जगह 43 साल काम करना जरूरी होगा। कर्मचारी इसके लिए तैयार नहीं हैं और लगातार विरोध कर रहे हैं।

‘फ्रांस 24’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नई पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्त की उम्र बढ़ाने के साथ पूरी पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा काल की अवधि भी बढ़ा दी गई है। प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बोर्न ने बताया कि नई पेंशन योजना के प्रस्तावों के तहत 2027 से लोगों को पूरी पेंशन लेने के लिए कुल 43 साल काम करना होगा। अभी तक ये न्यूनतम सेवा काल 42 साल था।

सरकार इसे फ्रांस की शेयर-आउट पेंशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में बता रही है। सरकार की दलील है कि काम करने वालों और सेवानिवृत्त लोगों के बीच का अनुपात तेजी से कम हो रहा है। जिसे देखते हुए सेवानिवृत्त की उम्र बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

सरकार की कठदलीली यह कि ज्यादातर यूरोपीय देशों ने सेवानिवृत्त उम्र बढ़ाई है। इटली और जर्मनी में सेवानिवृत्त की उम्र 67 साल है। स्पेन में ये 65 साल है। ब्रिटेन में सेवानिवृत्त की उम्र 66 साल है।

जबकि ट्रेड यूनियनें और विपक्षी दल इसे सरकार का कुतर्क और कर्मचारी हितों पर बड़ा हमला बता रहे हैं। इसीलिए व्यापक विरोध प्रदर्शन व हड़ताल जारी हैं।

दमन, गिरफ्तारियों के बीच आंदोलन तेज

न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार इमैनुएल मैक्रों के इस कदम से देश में भारी नाराजगी है। सोमवार देर रात प्रदर्शन और तेज हो गया। ज्यादातर छोटे, बिखरे हुए विरोध प्रदर्शन फ्रांस के आसपास के शहरों में आयोजित किए गए।

हड़ताल के 16वें दिन कचरा संग्रहकर्ताओं के छोटे-छोटे समूहों ने पेरिस में कचरे के ढेर में आग लगा दी। जबकि पुलिस दमन पर उतारू हो गई है।

पेरिस पुलिस ने मंगलवार को कहा कि राजधानी में रात भर में 234 लोगों को सड़कों पर कचरे में आग लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

पेरिस पुलिस के प्रीफेक्ट लॉरेंट नुनेज ने कहा कि हिंसा 300 लोगों के समूह द्वारा राजधानी से तेजी से आगे बढ़ने के कारण हुई। नुनेज ने बताया कि हिंसा के बाद उन्होंने एक आंतरिक जांच का आदेश दिया।

हालांकि फ्रेंच सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में देखा गया कि एक अधिकारी पीछे की ओर चल रहे एक व्यक्ति को घूंसा मार रहा था, जिससे वह जमीन पर गिर गया था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले 16 मार्च को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे थे। यूनियनों और विपक्षी दलों ने कहा कि वे यू-टर्न लेने की कोशिश करने के लिए विरोध प्रदर्शन तेज करेंगे।

सरकार की हठधर्मित जारी, विपक्ष की चेतावनी

फ्रांस की प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बोर्न ने हाल के दिनों में घायल हुए 400 पुलिस अधिकारियों के प्रति सरकार की ‘एकजुटता’ व्यक्त की। इसमें से 42 पुलिस वाले एक रात में घायल हुए हैं। वहीं दो अविश्‍वास प्रस्‍तावों के बावजूद सरकार बने रहने के बाद मैक्रों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री संसदीय नेताओं और अपने मध्यमार्गी गठबंधन के सांसदों के साथ राजनीतिक बैठकों की एक योजना बनाई है।

मंगलवार को संसद के निचले कक्ष में बोलते हुए बोर्न ने समझौता करने और सांसदों के साथ काम करने सहित फ्रांसिसियों की चिंताओं के लिए सबसे अच्छी प्रतिक्रिया की तलाश करने के लिए आने वाले महीनों में काम जारी रखने की कसम खाई।

लेकिन वामपंथी सांसद मैथिल्डे पनोट ने बोर्न को चेतावनी दी और कहा कि आप झुकेंगे।

फिलहाल दमन के बीच फ्रांस में आंदोलन लगातार तेज और उग्र होता जा रहा है।

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