लुधियाणा: मार्शल मशीन के मज़दूरों की आंशिक जीत; हक़ के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान

जनवरी का वेतन मिला, 14 मार्च तक फरवरी के वेतन का होगा भुगतान। मज़दूरों के कहा कि उन्होंने मज़बूत एकता कायम कर ली है और वायदों से मुकरने पर प्रबंधन को अंजाम भुगतना पड़ेगा।

लुधियाणा (पंजाब)। कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब के झंडे तले 11 दिन चली मार्शल मशीन लिमिटेड, लुधियाणा के मज़दूरों की हड़ताल आंशिक जीत हासिल करते हुए, मज़दूरों के जोशीले नारों के साथ 11 मार्च की सुबह समाप्त हो गई।

यूनियन द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार 10 मार्च की दोपहर कंपनी मालिकों द्वारा जनवरी के वेतन की पूरी अदायगी करने का भरोसा दिया गया और फरवरी के वेतन के लिए 16 मार्च तक का समय माँगा गया था। कंपनी द्वारा अधिकतर मज़दूरों के जनवरी के बकाया वेतन का भुगतान बीते दिन भी दिया गया लेकिन 38 मज़दूरों को सिर्फ पाँच-पाँच हजार रुपए ही प्राप्त हुए हैं।

पूरा भुगतान न होने के कारण मज़दूरों में काफी आक्रोश फैल गया और शनिवार सुबह कंपनी गेट पर काफी गर्म माहौल रहा। मज़दूरों ने कंपनी मालिक और मैनेजमैंट के खिलाफ़ जमकर नारेबाजी की। अब तक मज़दूरों का सामना करने से बचते रहे मालिक गौरव सरूप ने खुद गेट पर तुरंत पहुँचकर जनवरी का शेष वेतन सोमवार तक देने की बात कही है।

अब तक मालिक-मैनेजमैंट पैसा न होने, और मशीनों की बिक्री होने पर वेतन की बात कहते रहे हैं लेकिन अब पहली बार मालिक ने कहा है कि पैसे की व्यवस्था हो चुकी है लेकिन तकनीकी समस्या के कारण सोमवार को ही पैसे मज़दूरों के खातों में भेजे जा पाएँगे।

पहले मालिक-मैनेजमैंट ने फरवरी का वेतन 20 मार्च देने की बात कही, कल दोपहर 16 मार्च तक देने का भरोसा दिया। लेकिन आज सुबह कंपनी मालिक गौरव सरूप ने 14 मार्च तक फरवरी के वेतन का भुगतान करने का भरोसा भी दिया है।

मजदूरों ने यह भी ऐलान किया है कि जनवरी, फरवरी, और मार्च महीने के दौरान कंपनी मालिकों द्वारा मजबूर करने पर हुई हड़तालों के दिनों के वेतन भी वे लेकर रहेंगे। मैनेजमैंट और यूनियन ने यह मसला बातचीत से हल करने का फैसला किया है।

संघर्षरत मज़दूरों ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनी मालिक गौरव सरूप ने किए गए वादे पर अमल न किया और अगर कामबंदी के नाम पर की गई कटौती वापिस न ली गई तो मज़दूर इसका जवाब संघर्ष तीखा करके देंगे।

कंपनी मालिक-मैनेजमैंट द्वारा पहले भी अनेकों बार समझौता तोड़ा गया है, किए गए वायदों से मुकरा गया है। 10 फरवरी को श्रम विभाग के जरिए हुए लिखित समझौते को भी मालिक-मैनेजमैंट ने पूरी तरह लागू नहीं किया।

मज़दूरों का कहना है कि अब उन्होंने मज़बूत एकता कायम कर ली है और समझौता तोड़ने, वायदों से मुकरने के लिए मालिक-मैनेजमैंट को अंजाम भुगतना पड़ेगा।

इसके इलावा मज़दूरों ने वेतन, ई.एस.आई., ई.पी.एफ. हाजिरी, हादसों से सुरक्षा, बोनस आदि संबंधी कंपनी द्वारा श्रम कानूनों के उल्लंघन पर लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई को जोरदार ढंग से आगे बढ़ाने का भी ऐलान किया है।

गौरतलब है कि मार्शल मशीन लिमिटेड ‘सीएनसी टर्निंग मशीन’ (कंप्युटर से चलने वाली खराद मशीन) बनाने वाली कंपनी है। इस कंपनी द्वारा आर्थिक संकट का सारा बोझ मजदूरों पर डालने की कोशिश की जा रही है। कंपनी कहती रही है कि जब मशीनों की बिक्री से कमाई होगी तभी वेतन दिए जाएँगे।

मज़दूरों ने इस नाइंसाफी के खिलाफ संघर्ष का झंडा उठाते हुए स्पष्ट ऐलान किया है कि मशीनों के बनने या बिकने से उनके वेतन के भुगतान को जोड़ने को वे हरगिज नहीं मानेंगे, वेतन का भुगतान तो कंपनी को करना ही होगा।

मजदूरों ने पिछले महीने संघर्ष से ई.एस.आई. कार्ड बनवाए हैं, उन्हें पे-स्लिप मिलने लगी है। कंपनी ने यह भी भरोसा दिया है कि सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र भी जल्द ही दिया जाएगा।

इस तरह मार्शल मशीन लिमिटेड के मज़दूर अपनी एकता से शोषक मालिकों से अपने अधिकार लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्होंने आंशिक जीते हासिल की हैं।

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