लुधियाणा: मज़दूरों की जीत; एकजुट हड़ताल ने कंपनी को माँगें मानने पर किया मज़बूर

मज़दूरों को बकाया वेतन मिलेगा, हर महीने 10 तारीख को वेतन व वेतन पर्ची मिलेगी, पहचान पत्र जारी होगा, ईएसआई-ईपीएफ की काटी गई राशि जमा होगी, हड़ताल के दो दिन का पैसा मिलेगा आदि।

लुधियाणा (पंजाब)। लुधियाणा के फोकल प्वाइंट स्थित मार्शल मशीन लिमटेड के करीब सवा सौ मज़दूरों की कारखाना मज़दूर यूनियन के झंडे तले श्रम कानूनों को लागू करने के लिए जारी हड़ताल के चौथे दिन आखिर कंपनी को मज़दूरों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा है।

बीती 10 फरवरी की रात करीब 9 बजे कारखाने के सामने श्रम विभाग के अफ़सरों की मौजूदगी में लिखित समझौता हुआ। समझौता वार्ता में श्रम विभाग की ओर से लेबर इंस्पेक्टर नेहा गुप्ता, नरेश गर्ग आदि शामिल रहे। मज़दूरों ने विजयी नारों के साथ हड़ताल खत्म की।

हड़ताल का नेतृत्व मज़दूरों की चुनी हुई कमेटी ने किया। सभी मज़दूरों से सलाह-मशवरा करके और सहमती लेकर ही कमेटी ने समझौता वार्ता की प्रक्रिया चलाई और लिखित समझौते का मसविदा सभी मज़दूरों में पढ़ने के बाद सहमती लेकर ही हस्ताक्षर किए।

इस दौरान मज़दूरों को कारखाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविंदर और टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन के सचिव जगदीश ने संबोधित किया। मज़दूरों ने मालिकों और श्रम विभाग को समझौता लागू ना होने पर संघर्ष के मैदान में उतरने की चेतावनी दी है।

दरअसल, ‘सी.एन.सी. टर्निंग मशीन’ (यानी कंप्युटर से कंट्रोल खराद मशीन) बनाने वाली यह कंपनी आर्थिक संकट का सारा बोझ मज़दूरों पर डालना चाहती है। इसलिए वेतन महीना-महीना देरी से दिए जा रहे हैं। यही नहीं ईपीएफ और इएसआई मज़दूरों के वेतन से काटा जा रहा पैसा और अपना हिस्सा कंपनी संबंधित विभागों को जमा नहीं करवा रही। इसके अलावा अन्य कानूनी श्रम अधिकार भी पूरी तरह लागू नहीं किए जा रहे।

मज़दूरों ने कंपनी की इस बेइंसाफी के सामने सिर झुकाने की जगह संघर्ष की राह पकड़ी। सात फरवरी को हड़ताल कर दी। मज़दूर नेताओं के भेष में आए पूँजीपतियों के दलालों ने मज़दूरों को एकजुट संघर्ष के रास्ते से हटाने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन मज़दूरों ने अपनी जुझारू यूनियन कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब के झंडे तले संघर्ष जारी रखा और जीत प्राप्त की।

हड़ताल के दौरान पंजाब के स्थानीय और प्रवासी मज़दूरों में पूरी एकजुटता देखने में मिली। संघर्ष में टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन ने भी सहयोग किया।

लिखित समझौता:

श्रम अधिकारियों के समक्ष लिखित समझौते के मुताबिक-

  • मज़दूरों को हर महीने की 10 तारीख को वेतन दिया जाएगा और साथ ही वेतन पर्ची भी दी जाएगी। मज़दूरों के पहचान पत्र बनाए जाएँगे।
  • जिन मज़दूरों को ईएसआई और ईपीएफ की सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं, उन्हें यह सुविधाएँ दी जाएँगी।
  • मई 2022 से ईपीएफ और ईएसआई संबंधी कंपनी द्वारा मज़दूरों के वेतन से कटौती करके इक्टठा किया गया पैसा और कंपनी अपना हिस्सा सरकारी खजाने में जल्द जमा करवाएगी ताकि मज़दूरों को ये सहूलतें मिलने में कोई रुकावज पैदा न हो।
  • कंपनी ने जनवरी 2023 का पूरा वेतन ‘‘आर्थिक संकट’’ के कारण तुरंत देने से असमर्थ होने की बात कहते हुए लिखित तौर पर माना कि इसकी अदायगी तीन किश्तों में की जाएगी।
  • 20 फीसदी वेतन 11 फरवरी को दो बजे से पहले-पहले, 20 फीसदी 16 फरवरी को, बाकी 60 फीसदी 20 फरवरी को अदा किया जाएगा। चार दिनों की हड़ताल की दो दिनों का वेतन भी मज़दूरों को मिलेगा।
  • समझौते में लिखा गया कि संघर्ष में शामिल किसी भी मज़दूर के साथ कंपनी द्वारा किसी भी तरह की बदलाखोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  • समझौते के अनुसार मज़दूर 11 फरवरी की सुबह से काम पर लौटेंगे।

कंपनी द्वारा ईपीएफ और ईएसआई संबंधी की जा रहीं गड़बड़ियों संबंधी मज़दूरों द्वारा दोनों विभागों को भी शिकायत दर्ज करवाई गई है।

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