बंगलुरु: ऑटो रिक्शा यूनियनों ने 29 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन का किया ऐलान

ऐप-आधारित परिवहन कंपनियां यात्रियों और ड्राइवरों को ऑफ़र और प्रोत्साहन के साथ आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिसके कारण सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बर्बादी के कगार पर है।

बेंगलुरु: कई रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार द्वारा ई-बाइक टैक्सी सेवाओं को जारी किए गए परमिट के विरोध में बेंगलुरु भर के ऑटो रिक्शा यूनियनों ने 29 दिसंबर को एक दिन के विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। हालांकि हड़ताल की संभावना से इंकार नहीं किया गया था, ऑटो रिक्शा ड्राइवर यूनियन (एआरडीयू) के सदस्यों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि इस हड़ताल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। ऑटो चालक सिटी रेलवे स्टेशन से विधान सौधा (राज्य विधानसभा) तक मार्च करने की योजना बना रहे हैं। क़रीब पांच हज़ार ऑटो चालकों के शामिल होने की संभावना है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि 16 दिसंबर को, कर्नाटक राज्य परिवहन प्राधिकरण ने ‘विकेड राइड’ नामक कंपनी को पांच साल की अवधि के लिए 100 ई-बाइक टैक्सी संचालित करने की अनुमति दी। इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी पॉलिसी की कल्पना बेंगलुरु में यात्रियों को फर्स्ट एंड लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के साधन के रूप में की गई थी। इस परमिट के तहत ई-बाइक टैक्सी एक बार में 10 किमी तक जाने की पेशकश कर सकती हैं।

एक प्रेस विज्ञप्ति में ऑटो यूनियनों के फेडरेशन ने कहा कि “ऐप-आधारित परिवहन कंपनियां यात्रियों और ड्राइवरों को ऑफ़र और प्रोत्साहन के साथ आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जिसके कारण सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बर्बादी के कगार पर है। पिछले दो वर्षों में, अनधिकृत व्हाइटबोर्ड बाइक टैक्सी प्लेग की तरह फैल गई हैं और सरकार उन्हें नियंत्रित करने में असमर्थ है।” व्हाइटबोर्ड निजी तौर पर पंजीकृत बाइक्स है, जिनके पास वाणिज्यिक सेवा देने की अनुमति नहीं है। केवल पीली लाइसेंस प्लेट वाले वाहन ही टैक्सी सेवा प्रदान कर सकते हैं। ऑटो चालकों का कहना है कि ये अनधिकृत बाइक टैक्सी उनकी कमाई में सेंध मार रही हैं।

2021 में अवैध रूप से टैक्सी सेवा प्रदान करने को लेकर परिवहन विभाग द्वारा कई ‘व्हाइटबोर्ड’ बाइक टैक्सियों (रैपिडो से संबद्ध) को ज़ब्त कर लिया गया था। यूनियनों का कहना है कि बाइक टैक्सी का इस्तेमाल ऑटो चालकों की कमाई की लूट बन जाता है। यूनियनों ने मुख्य रूप से ‘रेपिडो’ बाइक टैक्सी कंपनी की आलोचना की। हालांकि, उबर भी बेंगलुरु में बाइक टैक्सी सेवा देती है।

अक्टूबर में राज्य सरकार ने उबर, ओला और रैपिडो द्वारा दी जाने वाली ऑटो सेवाओं पर रोक लगा दी थी। न्यूनतम किराए पर सरकारी नियमों के कथित उल्लंघन के कारण इन सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऑटो का न्यूनतम किराया पहले दो किलोमीटर के लिए 30 रुपये, जिसके बाद 15 रुपये प्रति किलो मीटर का शुल्क है। हालांकि, ऐप-आधारित सेवाएं इन नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। कैब कंपनियों ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, जिसके बाद उसने प्रतिबंध पर रोक लगा दी। फ़िलहाल, सभी ऐप-आधारित कैब कंपनियां बेंगलुरु में ऑटो सेवा दे रही हैं, जबकि रैपिडो और उबर बाइक टैक्सी सेवा भी देती है।

नरसिम्हा मूर्ति एआरडीयू यूनियन (सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन से संबद्ध) के बेंगलुरु के सचिव हैं। उन्होंने कहा कि ‘विकेड राइड’ को परमिट देने से सार्वजनिक परिवहन प्रणाली चौपट हो जाएंगी और बाइक टैक्सियों की बाढ़ आ जाएगी। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, उन्होंने कहा, “यदि कोई ऑटो चालक हर दिन वाहन सड़क पर 80 किमी चलाता है, तो वह कम से कम 30 किमी तक यात्रियों के बिना ही वाहन दौड़ाता है। हमें गैस पर 300 रुपये प्रतिदिन और किराए पर 200 रुपये प्रतिदिन ख़र्च करने पड़ते हैं। हमारे पास 200-300 रुपये बचते हैं। क्या हम इन पैसों से अपना परिवार चला सकते हैं?”

मूर्ति ने व्हाइटबोर्ड बाइक टैक्सियों के ख़िलाफ़ तेज़ी से कार्रवाई नहीं करने के लिए परिवहन मंत्री बी श्रीरामुलु को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “भाजपा केवल बड़े कॉर्पोरेटों को कारोबार करने में मदद करने के लिए ही सत्ता में है। श्रीरामुलु को ऑटो चालकों या उनकी पीड़ा की कोई परवाह नहीं है। बाइक टैक्सी बाज़ार पर क़ब्ज़ा करने के लिए कई कंपनियां इंतज़ार कर रही हैं। एक-एक करके सभी को आने दिया जाएगा।”

एआरडीयू बेंगलुरु में सबसे बड़ा ऑटो यूनियन होने का दावा करता है जिसमें 38000 ऑटो चालक हैं। मूर्ति का कहना है कि एआरडीयू ने यूनियनों का एक फेडरेशन बनाने की पहल की और अन्य सभी यूनियन नेताओं को दिसंबर में बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। फेडरेशन ने जुलाई 2021 में राज्य सरकार द्वारा घोषित इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी नीति को वापस लेने की मांग की। उन्होंने मांगों को नज़रअंदाज़ करने पर हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

न्यूजक्लिक से साभार

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