लुधियाना: संगठित संघर्ष से सामने झुकी पुलिस, मज़दूर नेताओं पर दर्ज झूठा केस रद्द किया

डीसी हार्डवेयर और गंगा डेयरी के मालिकों द्वारा बकाया वेतन माँगने पर बाल मज़दूर की पिटाई के विरुद्ध संघर्ष; टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन नेताओं पर फर्जी मुक़दमें लगे थे।

लुधियाना (पंजाब)। धन्नासेठ मालिकों द्वारा मारपीट का शिकार बाल मज़दूर को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्षशील टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह और सचिव जगदीश पर दर्ज झूठा केस आज शनिवार को लुधियाना पुलिस ने रद्द कर दिया है।

टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन और कारखाना मज़दूर यूनियन ने पुलिस और धन्नासेठ मालिकों के गठजोड़ के खिलाफ़ डिवीजन नं. 7 थाने पर 30 अक्टूबर को धरने का ऐलान किया था। मज़दूर संगठनों के धरने से एक दिन पहले पुलिस को हक, सच, इंसाफ की एकजुट आवाज़ के सामने झुकना पड़ा है, संगठित संघर्ष को जीत मिली है।

ज्ञात हो कि लुधियाना के ताजपुर रोज स्थित डीसी हार्डवेयर और गंगा डेयरी के मालिकों ने 23 जून को बाल मज़दूर द्वारा पाँच महीने के रोके गए वेतन माँगने पर बुरी तरह मारपीट की थी। टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन द्वारा दोषियों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष किया गया। थाने पर धरना लगाया गया। पुलिस को इस संघर्ष के दबाव में दोषियों पर एफ.आई.आर. दर्ज करनी पड़ी।

संगठन और पीड़ितों को सबक सिखाने के लिए संगठन के नेताओं जगदीश और गुरदीप समेत बाल मज़दूर राजू, उसके माता-पाता और मामा पर गैर-जमानती धाराओं के तहत क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई थी। अब संगठित संघर्ष के दबाव में मजदूर नेताओं पर दर्ज झूठा केस रद्द कर दिया गया है।

सहायक पुलिस कमिश्नर गुरदेव सिंह ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित बाल मज़दूर और उसके परिवार को इंसाफ दिया जाएगा। संगठनों ने कहा है कि पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

मज़दूर नेताओं पर थोपे झूठे पुलिस केस के रद्द होने और सहायक पुलिस कमिश्नर द्वारा दिए गए भरोसे के बाद संगठनों ने 30 अक्तूबर का धरना रद्द कर दिया है।

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