बढ़ती महिला हिंसा व उत्पीड़न के विरुद्ध प्रगतिशील महिला एकता केंद्र का सफल सम्मेलन सम्पन्न

सम्मेलन में मजदूर-मेहनतकश महिलाओं को एकजुट होकर अपने साथ होने वाले हर उत्पीड़न-शोषण के खिलाफ संघर्ष करने संकल्प बंधा और जोशीले जुलूस के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

हल्द्वानी (उत्तराखंड)। नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र का दो दिवसीय सम्मेलन रविवार 25 सितंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन के बंद सत्रों के सफलतापूर्वक समापन के पश्चात खुले सत्र का आयोजन किया गया। जोशीले जुलूस के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

खुले सत्र की सुरुआत में संगठन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष बिंदू गुप्ता ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रगितशील महिला एकता केंद्र का यह सफल सम्मेलन समाज में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों तथा उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष को और तेज करेगा। यह केंद्र देश में महिलाओं के साथ-साथ तमाम मजदूर मेहतनकश आवाम के साथ हो रहे शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष तथा नए समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध तथा अपनी पूरी क्षमता के साथ इस सफर को आगे बढ़ाएगा।

खुले सत्र में भाग ले रहे विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रगतिशील महिला एकता केंद्र को उसके सफल सम्मेलन के लिए बधाई देते हुए तथा उसके संघर्षों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा महिला गुलमी को तोड़ने के लिए शुरु किया गया यह संघर्ष आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाईयों में से एक है। महिलाओं के साथ विभिन्न तबकों के संघर्षों में भागीदारी का उनका यह निर्णय साझे संघर्षों को आगे बढ़ाएगा।

खुले सत्र में प्राचीन समय की सामंती दासता और पूंजीवादी उपभोक्तावादी संस्कृति के दोहरे शोषण से महिलाओं की मुक्ति के सवाल को मज़दूर वर्ग की मुक्तिकमी संघर्ष के हिस्से के तौर पर महिला मुक्ति का सवाल सिद्दत से उठा।

मज़दूर-मेहनतकश महिलाओं को हर उत्पीड़न-शोषण के खिलाफ मोर्चा लेना होगा!

24 सितंबर को ध्वजारोहण के साथ प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र ने अपने तीसरे सम्मेलन की शुरुआत की। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने शीला शर्मा ने भाषण के साथ सम्मेलन के औपचारिक सत्र की शुरुआत की। सम्मेलन के दौरान मजदूर-मेहनतकश महिलाओं को एकजुट होकर अपने साथ होने वाले हर उत्पीड़न-शोषण के खिलाफ संघर्ष करने की जरूरत पर जोर रहा।

पूरे दिन चली चर्चा में सम्मेलन ने विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा की गई। सम्मेलन ने इस बात पर चर्चा की जहां पहले ही दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं संकट में थीं, वहां कोरोना महामारी ने आम जनता का जीवन और भी ज्यादा संकटग्रस्त हो गया है।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि जहां महिलाओं का जीवन पहले से ही संकटपूर्ण था कोविड महामारी ने इस संकट को कई गुना बढ़ा दिया। कोरोना महामारी के दौरान जो महिलाएं बेरोजगार हुईं वह अभी तक अपनी नौकरियों में नहीं लौट पाई हैं।

इस बात पर भी चर्चा हुई कि समय के साथ महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। समाज में चल रही अश्लील संस्कृति महिलाओं को एक भोग की वस्तु बनाकर पेश करती है जिसकी फलस्वरूप बलात्कार के बाद हत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

बढ़ती हुई मंहगाई और बेरोजगारी ने महिलाओं पर बड़ा कुप्रभाव डाला। लॉकडाउन के समय घरों में कैद महिलाओं पर न सिर्फ घरेलू काम का बोझ बढ़ा बल्कि घरेलू हिंसा पर बड़े स्तर पर इजाफा हुआ। आज पूरी दुनिया में हर तीसरी महिला किसी न किसी प्रकार की हिंसा की शिकार है।

महिला मुक्ति के संघर्ष को और मजबूत करना होगा

सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिनिधियों ने महिला मुक्ति के अपने संघर्ष को और मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर चर्चा की। प्रतिनिधियों का मानना था कि महिला मुद्दों पर लड़ाई को और मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाओं को संगठन से जोड़ने की जरूरत है। सम्मेलन इस बात पर सहमत दिखा कि समाज में महिला उत्पीड़न और हिंसा के विरुद्ध संघर्ष करने के साथ-साथ समाज में पितृसत्तामक मूल्यों तथा महिलाओं से जुड़े अंधविश्वासों तथा भ्रांतियों को भी तोड़ने की जरूरत है।

सम्मेलन के दूसरे दिन सभी प्रतिनिधियों ने अगले चार साल के लिए अपने नेतृत्वकारी निकायों तथा पदाधिकारियों का भी चुनाव किया। सम्मेलन ने सर्वसम्मति के साथ बिंदु गुप्ता को संगठन का अध्यक्ष तथा नीता गहलोत को उपाध्यक्ष व रजनी जोशी संगठन की महासचिव चुना।

खुले सत्र में सम्मेलन के प्रतिनिधियों के साथ मजदूर सहयोग केंद्र, इन्कलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकमी छात्र संगठन, प्रगतिशील भोजन माता संगठन, भगत सिंह छात्र मोर्चा, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, बढ़ते क़दम पत्रिका आदि विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध जनों तथा आम समाज के नागरिकों व महिलाओं ने भागीदारी की।

सम्मेलन के दौरान संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

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