कोलकाता: मज़दूर आक्रोश रैली- “केंद्र-राज्य पर भरोसा छोड़ो, अपनी लड़ाई का खुद निर्माण करो!”

मज़दूर क्रांति परिषद् (MKP) द्वारा फासिस्ट भाजपा के देशभर में आक्रमण व राज्य की स्वेच्छाचारी व भ्रष्टाचारी तृणमूल कांग्रेस के कुशासन के खिलाफ रैली में भारी संख्या में श्रमजीवी जनता शामिल हुई।

कोलकाता। मेहनतकश जन की विभिन्न राजनीतिक माँगों के साथ आज 21 सितंबर को मजदूर क्रांति परिषद् (MKP) द्वारा श्रमजीवी जनता की आक्रोश रैली कोलकाता के रामलीला मैदान, मौलाली से धर्मतल्ला तक निकली गई। इस विशाल रैली में भारी संख्या में मेहनतकश आवाम ने भागीदारी की।

रैली के माध्यम से फासिस्ट आरएसएस-भाजपा के देशभर में आक्रमण के खिलाफ़ व राज्य की स्वेच्छाचारी व भ्रष्टाचारी तृणमूल कांग्रेस के कुशासन के विरुद्ध जोरदार प्रतिवाद कर आवाज बुलंद हुआ। कोलकाता की सड़कों पर जोरदार नारे गूँजे।

भाजपा सरकार देश की जनता की दुश्मन है

प्रदर्शन के दौरान यह सवाल उठा कि दुनिया का कोई भी सभ्य दल क्या दुष्कर्मियों को माथे पर लेकर नाच-कूद मचाता है? गले में फूल का माला देकर स्वागत करता है? जेल से निकलने के बाद ढोल-नगाड़ा बजाकर जुलूस निकालता है? हाँ, करता है। उस दल का नाम भारतीय जनता पार्टी है।

वक्ताओं ने कहा कि साल 2002 में गुजरात दंगो के समय में 21 साल की गर्भवती बिलकिस बानो को भाजपा के सहयोगी बजरंग दल के दुष्कर्मियों ने बलात्कार किया। बिलकिस के गर्भस्त संतान सहित परिवार के कुल 14 जन का खून किया। अदालत ने उन सभी को आजीवन कारावास की सजा दी।

पिछले 15 अगस्त को स्वाधीनता के ‘अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष में उन दुष्कर्मियों की सजा गुजरात सरकार ने माफ़ कर दी। जेल से निकलने के बाद उनके गले में माला पहनाकर भाजपा-बजरंगदल के सदस्यों ने उत्सव मनाया। लज्जा-घृणा के साथ पूरा देश हतप्रभ रह गया।

वक्ताओं ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा कभी नोटबंदी, या लॉकडाउन अथवा जैसे-तैसे एनआरसी/सीएए की घोषणा कर देश के कमाकर खाने वाली मेहनतकश जनता को परेशानी में झोंकती जा रही है। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मुद्दे पर हिन्दू-मुस्लिम सामुदाय को उकसाना-लड़ाना, सीमा पर भारत-पाकिस्तान के बहाने पूरे देश में शोरगुल मचाकर अस्थिरता पैदा करना इनका हथकंडा है।

जनता इन गैर मुद्दों में जब उलझी रहती है, तब निर्भीक होकर ये देश के प्रतिरक्षा, बैंक, बीमा, विमान, कोयला, तेल, इस्पात, रेल, टेलीकॉम सहित सभी संपत्तियाँ अडानी-अंबानी के हाथों बेच रहे होते हैं। उद्दयोगपतियों की सुविधा के लिये देश का श्रम कानून, कृषि कानून बदल रहे होते हैं।

हर किसी के बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपया भेजने का झूठा वादा साबित हुआ। देशवाशियों को न नौकरी मिली, न मजदूरी बढ़ी। दूसरी तरफ पेट्रोल, केरोसीन, रसोई गैस, सरसों का तेल, दाल के दाम दुगनी से भी ज्यादा हो गई। ये हत्यारी सरकार देश व देश-वासियों की दुश्मन है।

जनता पस्त, स्वेच्छाचारी व भ्रष्टाचारी तृणमूल सरकार मस्त

वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार की भी स्थिति बेहाल है। 34 साल के सीपीएम जमाने में पार्टीबाजी और एकदलीय शासन से परेशान होकर जनता ‘परिवर्तन की सरकार’ को लायी थी। रंगदारी-प्रोमोटरी-सिंडिकेट के जरिये कुछ नेता-दादा पिछले 10 सालों में फूल कर ढोल बन गए हैं। पिछले 10 सालों में राज्य की मेहनती जनता का जीवन और कठिन हो गया।

इमानदारी की प्रतिक तृणमूल का एक नेता गाय की तस्करी, गैर कानूनी बालू-पत्थर-खदान के मुक़दमों में फंस गया और एक अन्य शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार में करोड़ों-करोड़ रुपया न छुपा पाने के कारण जेल के भीतर है। बंगाल की राजनीति में एक सर्कस शुरू हुई है। आज एक तृणमूल छोड़ कर भाजपा में नाम लिखा रहा है तो कल दूसरा कोई भाजपा छोड़ कर तृणमूल में जा रहा है।

गरीब जनता जब स्वास्थ साथी कार्ड बनाने के लिये अथवा लक्ष्मी भंडार योजना की 500 रुपया के लिये परेशान है, उसी समय पर्यावरण का व्यापक नुकसान कर देओचा-पाचामी कोयला खदान अथवा फरक्का में राज्य सरकार अडानी के लिये जमीन छीनने पर उतारू है। चिटफण्ड और कटमनी के रुपए से शायद और नहीं चल रहा है, इसलिए कॉरपोरेट फंडों की ओर नजर पड़ा है। जितनी भी दुश्मनी रहे, इस प्रश्न पर भाजपा-तृणमूल भाई-भाई हैं।

दोहरी मार के ख़िलाफ़ जन आंदोलन के लिए आगे आओ!

वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली से पश्चिम बंगाल, केंद से राज्य तक ये अराजकता और कितने दिन चलेगा? अपनी मेहनत से कमाने-खाने वाले साधारण जन का पीठ दीवार पर टिक गया है। ऐसे में मजदूर क्रांति परिषद का आह्वान है कि बहुत हुआ, इस बार मुड़कर खड़ा होने का वक्त आया है।

शिक्षा की मांग, स्वास्थ की मांग, शिक्षित बेकारों की नौकरी की मांग, उपयुक्त मज़दूरी की मांग पर संघर्ष के रास्ते पर उतरने का समय आ गया है। सांप्रदायिक उकसावे के खिलाफ़ एकजुट होना ज़रूरी है।

प्रदर्शन के साथ जनता का आह्वान हुआ कि केंद्र की फासिस्ट सरकार और राज्य की तानाशाह-भ्रष्टाचारी सरकार की इस दोहरी मार के ख़िलाफ़ जन आंदोलन बनाने की जरूरत है। मेहनतकश जन की पुकार शासकों के कानों तक पहुँचाने के लिये कमर कसने की जरूरत है।