बावल: रिको फैक्ट्री में क्रेन से गिरी डाई में दबकर ठेका मजदूर की दर्दनाक मौत

ठेका मजदूर सतेंद्र सिंह की मौत क्रेन से गिरी करीब 5-7 टन की डाई के नीचे दब जाने से हुई। हुक खराब होने के कारण दुर्घटना की आशंका जताने के बावजूद उन्हें काम पर लगाया गया था।

रेवाड़ी ज़िले के बावल औद्योगिक इलाके में स्थित रिको कंपनी में एक ठेका मज़दूर की ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों ने कंपनी में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और घोर लापरवाही का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, यूपी के फर्रुखाबाद निवासी सतेंद्र सिंह (27) बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित रिको कंपनी में बतौर ऑपरेटर कार्यरत था। सोमवार की रात वह नाइट शिफ्ट में कंपनी में पहुंचा था। मंगलवार तड़के ड्यूटी खत्म होने से पहले वह मशीन पर काम कर रहा था। इसी दौरान वह मशीन के अंदर फंस गया।

घटना के बाद वहाँ कार्यरत साथी श्रमिकों ने तुरंत मशीन बंद करके उसे बाहर निकाला और लहूलुहान अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

खराब क्रेन से जबरिया काम: डाई के नीचे दब गया

खबर के अनुसार ठेका मजदूर सतेंद्र की मौत क्रेन से गिरी करीब 5-7 टन की डाई के नीचे दब जाने से हुई। वो सोमवार की रात ड्यूटी गए थे। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एक रिश्तेदार जनवेश कुमार ने वर्कर्स यूनिटी को फोन करके बताया कि कंपनी की घनघोर लापरवाही के कारण ये मौत हुई है।

परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रोडक्शन मैनेजर ने सत्येंद्र सिंह को क्रेन से डाई लाने को कहा। लेकिन सतेंद्र सिंह ने हुक खराब होने के कारण दुर्घटना की आशंका जताई। फिर भी उन्हें डांट डपट कर काम करने का दबाव बनाया गया।

सत्येंद्र से मैनेजर ने जबरिया डाई लाने का दबाव बनाया। जब क्रेन के हुक में डाई को फंसाया गया तो उसमें लॉक था नहीं। इसलिए कुछ उंचाई पर पहुंचने के बाद ही हुक स्लिप हो गया और डाई सीधे सत्येंद्र सिंह के ऊपर गिरी जिसमें दबकर घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

परिजनों और मजदूरों का आरोप है कि सत्येन्द्र की मौत मौके पर ही हो गई थी फिर बावल के पुष्पांजलि अस्पताल में उसे ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे पहले से ही मृत घोषित कर दिया।

जनवेश कुमार का कहना है कि पुलिस को शिकायत किए जाने के बाद भी अभी तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई। पुष्पांजलि अस्पताल से पुलिस ने शव को नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिर वहां से सबको थाने चलने को कहा।

कंपनी में कैजुअल मजदूर के रूप में था कार्यरत

जनवेश कुमार ने बताया कि सत्येंद्र बीते सात आठ महीने से कंपनी में कैजुअल मजदूर के रूप में काम कर रहे थे। बीते एक महीने पहले वो लंबी छुट्टी ली थी और जब दोबारा आया उसे नई ज्वाइनिंग दी गई। सत्येंद्र सिंह को करीब 20,000 रुपये सैलरी मिलती थी।

परिजन ने बताया कि कंपनी में करीब 1000 से अधिक मजदूर काम करते हैं जिसमें अधिकांश कैजुअल और ठेका मजदूर हैं। परमानेंट वर्करों की संख्या काफी कम है और यहां यूनियन भी नहीं है।

पिछले साल भी हुई थी एक मज़दूर की मौत

यहां पिछले साल जून 2021 में मशीन पर काम करते हुए एक अन्य कैजुअल मजदूर की मशीन में आ जाने से मौके पर ही मौत हो गई थी। मजदूरों ने बताया कि उस मजदूर के परिजनों को मुआवजा मिला था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इतना दर्दनाक हादसा होने के बावजूद न तो मैनेजमेंट और ना ही पुलिस हमदर्दी दिखा रही है। मैनेजमेंट के दो लोग आए थे, लेकिन वो भी कुछ स्पष्ट बात नहीं कर रहे हैं।

मज़दूरों के साथ भयंकर अत्याचार

जनवेश ने आरोप लगाया कि कंपनी में मज़दूरों के साथ भयंकर अत्याचार होता है, ड्यूटी का कोई हिसाब किताब नहीं है और वर्करों के ऊपर बहुत प्रेशर डाला जाता है। इस प्रेशर में सतेंद्र सिंह ने अपनी जान गंवा दी।

खबर लिखे जाने तक मैनेजमेंट और मजदूरों के बीच बातचीत चल रही है। पुलिस मौके पर पहुंच गई है लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

औद्योगिक दुर्घटनाओं में भारी इजाफा

गौरतलब है कि बीते दो साल से औद्योगिक दुर्घटनाओं में भारी इजाफा हो रहा है। फैक्ट्रियों में सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कार्यस्थल पर सुरक्षा के उपायों को मैनेजमेंट के ऊपर छोड़ दिया गया है। फैक्ट्री जांच के लिए अब लेबर अधिकारी बिल्कुल भी नहीं जाते हैं।

मोदी सरकार जिन 44 श्रम कानूनों को खत्म कर लेबर कोड ला रही है उसमें सुरक्षा के नियमों को मालिकों के ऊपर छोड़ दिया गया है। उसमें ये भी नियम बना दिया गया है कि जो सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर मालिक के दावे को सरकार मान लेगी, उसकी समय समय पर जांच पड़ताल नहीं की जाएगी। इसी तरह हाजिरी रजिस्टर भी चेक नहीं किया जाएगा।

वर्तमान कानून रहते जब ये हालत हैं तो लेबर कोड के बाद जब नए कानून में सुरक्षा मानक ही खत्म होंगे और सारा काम ठेका व ट्रेनी से कराया जाएगा, तब हालात क्या होंगे, इसका अंदाज लगाया जा सकता है।

वर्कर्स यूनिटी के इनपुट के साथ

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