सुप्रीम कोर्ट द्वारा भगवती-माइक्रोमैक्स आदेश पर स्टे, प्रबंधन को ₹5 करोड जमा करने का निर्देश

स्टे तभी प्रभावी होगा जब उक्त धनराशि कंपनी सर्वोच्च अदालत में जमा कर देगी। अवैध छँटनी के संबंध में ट्रिब्यूनल व हाईकोर्ट से जीत के बाद मज़दूरों की यह एक और महत्वपूर्ण जीत है।

दिल्ली। भगवती-माइक्रोमैक्स के 303 श्रमिकों की गैर कानूनी छँटनी के संबंध में जारी आदेश और सहायक श्रम आयुक्त द्वारा रुपए 154959910  के जारी नोटिस पर आज 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्थगनादेश के साथ प्रबंधन को 5 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया है। यह स्थगनादेश (स्टे) तभी प्रभावी होगा जब उक्त धनराशि कंपनी माननीय उच्चतम न्यायालय में जमा कर देगी।

उल्लेखनीय है कि माइक्रोमैक्स प्रोडक्ट बनाने वाली भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रबंधन ने 27 दिसंबर 2018 को 303 श्रमिकों की गैरकानूनी छँटनी कर दी थी। जिसके संबंध में औद्योगिक न्यायाधिकरण हल्द्वानी ने 2 मार्च 2020 के अपने आदेश में छँटनी को अवैध घोषित किया था और समस्त 303 श्रमिकों के सभी प्रकार के देयकों को पाने का अधिकारी बताया था।

प्रबंधन ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय नैनीताल में रिट दायर की। 5 अप्रैल 2022 को उच्च न्यायालय की पीठ ने न्यायाधिकरण के आदेश को सही ठहराया था। इस तरह से मज़दूरों को लगातार जीत हासिल हुई थी।

संघर्ष के बीच मामले को कई बार लटकाने के बाद एएलसी ने 10 अगस्त 2022 को 15 दिन के भीतर समस्त श्रमिकों की कार्यबहाली का निर्देश पत्र जारी किया। उसके पश्चात 18 अगस्त को 27 दिसम्बर 2018 से 27 मई 2022 तक के बकाया वेतन 15 करोड़ 49 लाख 59 हजार 610 रुपए की अदायगी के संबंध में नोटिस जारी किया था।

इस बीच प्रबंधन ने उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर की। इसी के साथ उसने उक्त राशि पर स्थगन आदेश लगाने का आवेदन किया था।

सोमवार को उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की 2 सदस्यों की खंडपीठ ने सुनवाई की। जहाँ श्रमिक पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजेश त्यागी ने जोरदार पैरवी की। यह एक क़ानूनी मामला होने के कारण पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया।

पीठ ने मज़दूरों के बकाया वेतन के संबंध में जारी आदेश सहित पूरे मामले पर इस शर्त के साथ स्थगनादेश (स्टे) दिया कि प्रबंधन रुपए 5 करोड़ अदालत में जमा करेगा। जबतक उक्त धनराशि कंपनी जमा नहीं करेगी स्टे प्रभावी नहीं होगा। यह निर्देश मज़दूरों की बकाया राशि के संबंध में जारी नोटिस के सापेक्ष है। इस तरीके से सर्वोच्च अदालत में कार्यवाही गतिमान हो गई।

मज़दूरों की यह एक और महत्वपूर्ण व बड़ी जीत है। प्रबंधन जिस प्रकार से पूरे मामले को उलझा रहा है, अब उसे मज़दूरों के बकाया वेतन के संबंध में 5 करोड़ रुपए की राशि जमा करनी पड़ेगी।

निश्चित ही मज़दूरों की छँटनी गैरकानूनी है तो सर्वोच्च अदालत में भी मज़दूरों को ही जीत मिलेगी। यह जरूर हुआ है कि यह मामला कुछ दिनों के लिए और भी लंबित हो गया है।

इस बीच 44 माह से मज़दूरों का संघर्ष जारी है और श्रम भवन रुद्रपुर में धरना लगातार चल रहा है। अंतिम जीत तक मज़दूर ज़मीनी व क़ानूनी लड़ाई जारी रखने के लिए कृत संकल्प हैं।