फीस वृद्धि के खिलाफ आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की भूख हड़ताल

आईआईटी बॉम्बे प्रशासन द्वारा मौजूदा पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों के लिए जहां 7,450 रुपये, वहीं नए दाख़िले के तहत पोस्ट ग्रेजुएट के लिए 32,450 रुपये और स्नातक के लिए 9,950 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

पुणे: आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) बॉम्बे में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल बीते छह अगस्त से लगातार जारी है. प्रदर्शन का आयोजन कर रहे छात्रों के समूह ने कहा है कि वह जल्द हार नहीं मानेंगे.

फीस वृद्धि को लेकर हो रही हड़ताल को लेकर बने एक ट्विटर एकाउंट (@iitbfeehike) से बृहस्पतिवार को कहा गया, ‘आईआईटी बॉम्बे प्रशासन अपनी उदासीनता जारी रखे हुए है और हम फीस वृद्धि के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं. भूख हड़ताल छठे दिन भी जारी है.’

द क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार, विरोध करने वालों छात्रों ने इस दौरान शिक्षा के निजीकरण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए व्याख्यान और फिल्म स्क्रीनिंग भी आयोजित की.

इस प्रमुख संस्थान ने हाल ही में 35 प्रतिशत की शुल्क वृद्धि की घोषणा की थी, जिसने कथित तौर पर पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) छात्रों को नाराज कर दिया था. न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंदोलन जुलाई की शुरुआत में शुरू हुआ, जब आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने पहली बार अपने सभी पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए लगभग 35 प्रतिशत की फीस वृद्धि का प्रस्ताव रखा था.

विरोध करने वाले छात्रों द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा पारित एक प्रस्ताव में सालाना 5 प्रतिशत फीस वृद्धि की सिफारिश की गई थी, जिसके आधार पर यह विशेष फीस वृद्धि लागू की गई थी.

मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फीस वृद्धि को पहली बार 2020 में मंजूरी दी गई थी, इसे रोक दिया गया था क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण संस्थान गतिविधियां रुक गई थीं. इसके बाद यह मुद्दा 2022 में सामने आया, जब अधिकारियों ने पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा.

इतना ही नहीं संस्थान ने हॉस्टल फीस 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,700 रुपये कर दी है. प्रदर्शनकारियों ने इस बढ़ोतरी को छात्रों के लिए विवेक शून्य निर्णय करार दिया है.

मिंट के अनुसार, आईआईटी बॉम्बे ने पीएचडी छात्रों के लिए ट्यूशन फीस 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी है. इसके अलावा एमटेक की ट्यूशन फीस 5,000 रुपये प्रति सेमेस्टर से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति सेमेस्टर कर दी गई है.

इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने फीस वृद्धि समिति में छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल में पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी पाठ्यक्रमों के छात्र शामिल हैं, हालांकि अंडर ग्रेजुएट (स्नातक) पाठ्यक्रमों के छात्र इसमें शामिल नहीं है, जबकि फीस वृद्धि उन पर भी लागू है.

एक छात्र ने कहा, मौजूदा पोस्ट ग्रेजुएट (स्नातकोत्तर) और पीएचडी छात्रों के लिए शुल्क संरचना में ट्यूशन शुल्क के अलावा अन्य घटकों में वृद्धि देखी गई है. नए दाखिले के लिए ट्यूशन फीस में भारी वृद्धि के साथ यह वृद्धि महत्वपूर्ण है.

छात्रों के मुताबिक, मौजूदा पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों के लिए जहां 7,450 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं नए दाखिले के तहत पोस्ट ग्रेजुएट के लिए 32,450 रुपये और स्नातक के लिए 9,950 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, स्नातक कर रहे एक छात्र ने कहा, ‘मौजूदा अंडर ग्रेजुएट छात्रों के लिए शुल्क वृद्धि वही रहती है. यह 7,000 रुपये से थोड़ा अधिक है, जो कि हम छात्रों के लिए 1 लाख रुपये से अधिक की कुल फीस की तुलना में बहुत बड़ी राशि नहीं है.’

यह समझाने के लिए कि वे विरोध में शामिल क्यों नहीं हुए एक अन्य छात्र ने कहा, ‘लेकिन नए स्नातक प्रवेश के लिए शुल्क संरचना क्या होगी, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है.’

हालांकि आईआईटी बॉम्बे प्रशासन के अनुसार स्नातक प्रवेश की फीस संरचना में मौजूदा स्नातक छात्रों की तुलना में अधिक वृद्धि होने की संभावना नहीं है.

प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए ट्यूशन फीस केंद्रीय रूप से तय किया जाता है. इसमें बढ़ोतरी होने का कोई अपडेट नहीं है. मौजूदा स्नातक छात्रों के लिए आईआईटी-बॉम्बे द्वारा तय की गई फीस वृद्धि के मामले में, ट्यूशन फीस के अलावा अन्य घटकों में वृद्धि की गई है, जिसे नए प्रवेश के लिए भी दोहराया जाएगा.’

द वायर से साभार

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