नपिनो मज़दूरों की हड़ताल खत्म; मांग पत्र पर वार्ता और 40 निलंबित मज़दूरों को लेने पर सहमति

प्रबंधन ने हड़ताल तोड़ने के लिए कैंटीन, शौचालय, पानी की सप्लाई रोक दी। जबकि पुरुषों के साथ महिला मज़दूर भी थीं। उसके बावजूद मज़दूर 20 दिन से आंदोलन में डटे रहे।

गुड़गांव (हरियाणा)। मानेसर स्थित नपिनो ऑटो एण्ड इलैक्ट्रॉनिक लिमिटेड में 20 दिनों से चल रही मज़दूरों की हड़ताल मंगलवार 2 अगस्त को समझौते के बाद समाप्त हो गयी। मज़दूरों के 4 साल से लंबित मांग पत्र पर बातचीत करने और निलंबित 40 मज़दूरों को काम पर लेने की सहमति बनी।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रबंधन, मज़दूर यूनियन और प्रशासन के बीच मैराथन वार्ता के बाद समझौता सम्पन्न हुआ। इसके बाद यूनियन ने हड़ताल समाप्त कर दी।

20 दिन से जारी थी हड़ताल

मानेसर के सेक्टर 3 प्लॉट न 7 में स्थित नपीनों कंपनी में नपिनो ऑटो एण्ड इलैक्ट्रॉनिक लिमिटेड यूनियन (सम्बद्ध एटक) के नेतृत्व में स्थाई मज़दूर 14 जुलाई से लगातार हड़ताल पर थे और पुरुष व महिला मज़दूर रात-दिन प्लांट के अंदर-बाहर हड़ताल पर बैठे थे।

19 महिला मज़दूरों सहित करीब 241 मज़दूर फैक्ट्री के अंदर थे। बाकी 30 मज़दूर फैक्ट्री के बाहर थे क्योंकि जब हड़ताल शुरु हुई तो वे ड्यूटी पर नहीं थे। बाद में प्रबंधन ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। तब वे बाहर ही धरने पर बैठ गये।

हड़ताल पिछले चार साल से लम्बित सामूहिक मांग पत्र और 6 मज़दूरों के निलम्बन को लेकर शुरू हुई थी। इस दौरान प्रबंधन ने 40 मजदूरों को निलंबित कर दिया था।

प्रबंधन ने मज़दूरों की हड़ताल तोड़ने के लिए कैंटीन बंद करवा दी। महिला मज़दूरों की मौजूदगी के बावजूद उसने शौचालय बन्द कर पानी की सप्लाई रोक दी। प्रबंधन और प्रशासन ने महिला मज़दूरों तक को बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया।

उसके बावजूद मज़दूर भूखे-प्यासे आंदोलन में डटे रहे। जब प्रबंधन मज़दूरों के हौसले कों नहीं तोड़ पाया तो उसने भारी पुलिस बल बुलाकर हड़ताल का दमन करने की कोशिश की।

भारी पुलिस बल के बीच हुआ समझौता

मंगलवार की सुबह से ही कंपनी के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था और हड़ताली मजदूरों को बलपूर्वक कंपनी से बाहर लाने की स्थिति बन गई थी। लेकिन प्रबंधन, प्रशासन और नपिनो यूनियन के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से हड़ताल समाप्त हुई।

प्रबंधन हड़ताल के दौरान निलंबित इन सभी मज़दूरों की कार्यबहाली करने के लिए तैयार हो गया है। लेकिन अभी तक फैक्ट्री के नोटिस बोर्ड पर ऐसा कोई नोटिस चस्पा नहीं हुआ है।

अंततः 20 दिनों के जुझारू आंदोलन के बाद मांग पत्र पर वार्ता और 40 निलंबित मज़दूरों को अंदर लेने के आश्वासन के साथ हड़ताल खत्म तो गयी है।

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