नोटबन्दी के बाद से दो हजार के नकली नोटों की संख्या में 107 गुने की वृद्धि

2019 और 2020 के बीच, 2,000 रुपये के नकली नोटों की संख्या में 170 प्रतिशत की वृद्ध हुई है, जबकि बैंकिंग प्रणाली में नकली नोटों का पता लगाने की संख्या में कमी आई है।

नई दिल्ली: लोकसभा में दिए सरकार के एक लिखित जवाब से खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बावजूद भी देश में जाली मुद्रा का बाजार फल-फूल रहा है.

ट्रिब्यून इंडिया ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत किए गए एक लिखित जवाब के हवाले से बताया है कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच 2,000 रुपये के नकली नोटों की संख्या में 107 गुना वृद्धि हुई है.

पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में प्रस्तुत किए अपने जवाब में बताया कि 2016 में 2,000 रुपये के 2,272 जाली नोट पकड़े गए थे, जबकि 2017 में 74,898, 2018 में 54,776, 2019 में 90,566 और 2020 में 24,4834 जाली नोट जब्त किए गए.

2018 को छोड़ दें, तो 2016 के बाद से यह संख्या लगातार बढ़ रही है. 2019 और 2020 के बीच, 2,000 रुपये मूल्यवर्ग के नकली नोटों की संख्या में 170 प्रतिशत की वृद्ध हुई है. दूसरी ओर, बैंकिंग प्रणाली में नकली नोटों का पता लगाने की संख्या में कमी आई है.

राज्यमंत्री ने कहा, ‘बैकिंग प्रणाली में पहचाने गए ऐसे नोटों की संख्या में वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक कमी देखी गई. 2021-22 में, इनकी संख्या 13,604 थी, जो प्रचलन में मौजूद 2,000 रुपये के बैंक नोटों की कुल संख्या का 0.000635 प्रतिशत है.’

मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय मुद्रा के जाली नोटों (एफआईसीएन) का प्रसार रोकने के लिए सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम-1967 लागू किया है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का गठन किया है और एफआईसीएन समन्वय समूह (एफसीओआरडी) का गठन किया है. इनका काम केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी और सूचना साझा करना है.

साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार ने एनआईए के भीतर आतंकी फंडिंग और जाली मुद्रा (टीएफएफसी) इकाई का भी गठन किया है, ताकि आतंकी फंडिंग और जाली मुद्रा की गहनता से जांच की जा सके.

उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक संयुक्त कार्यबल सूचनाओं के आदान-प्रदान और एफसीआईएन तस्करों की छानबीन के लिए विश्वास और सहयोग बनाने की दिशा में काम कर रहा है.

चौधरी ने लोकसभा को बताया, ‘बांग्लादेश के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो कि नकली नोटों के प्रसार और उनकी तस्करी रोकने के लिए है.’

द वायर से साभार

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