जबलपुर: न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भीषण आग; 10 की मौत, कई गंभीर

आग से भगदड़ के बीच अस्पताल के भूतल स्थित ओपीडी से लोग बाहर आ गए, लेकिन पहली मंजिल स्थित आईसीयू से लोग बाहर निकल पाते कि आग ने विकराल रूप ले लिया।

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक निजी अस्पताल में भीषण अग्निकांड में 10 लोगों की मौत हो गई। वहीं 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आग की घटना से अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल में भर्ती मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।

आग गोहलपुर थाना क्षेत्र में दमोह नाका के पास न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे लगी। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के कारण यह आग लगी जो भूतल से शुरू हुई और देखते-देखते ऊपर की तीनों मंजिलों को इसने अपनी चपेट में ले लिया।

जबलपुर के एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आग लगने के बाद गंभीर रूप से झुलसने से 4 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनकी हालत नाजुक बनी हुई है। आधा दर्जन से ज्यादा और लोग भी घायल हैं। वहीं मृतकों की पहचान की जा रही है।

मृतकों में चार मरीज, अस्पताल के तीन कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति शामिल है, जो मरीज के साथ उसकी देखभाल करने के लिए आया हुआ था।

आग गोहलपुर थाना क्षेत्र में दमोह नाका के पास न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में दोपहर करीब ढाई बजे लगी। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के कारण यह आग लगी जो भूतल से शुरू हुई और देखते-देखते ऊपर की तीनों मंजिलों को इसने अपनी चपेट में ले लिया।

आग लगने के कारण अस्पताल के भूतल में स्थित बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में मौजूद लोग बाहर आ गए थे। लेकिन पहली मंजिल में स्थित आईसीयू वार्ड के लोग बाहर निकल पाते कि इसके पहले ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।

सूचना मिलने पर दमकल व पुलिस विभाग के कर्मी घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने आईसीयू से 13 व्यक्तियों को बाहर निकाला, जिनमें से कई आग से झुलस गए और कई धुएं के कारण सांस नहीं लेने के कारण बेहोश हो गए थे।

इन सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जिनमें से आठ व्यक्तियों की मौत हो गई तथा दो व्यक्तियों की हालत गंभीर है। तीन लोगों की हालत खतरे से बाहर है।

जबलपुर के जिलाधिकारी डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया और 30 बिस्तर वाले अस्पताल से सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब आग लगी थी, उस वक्त अस्पताल के अंदर करीब 20 से 25 लोग मौजूद थे।

जबलपुर के एक दमकल अधिकारी कुशरगरा ठाकुर ने कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि जब अस्पताल के अधिकारियों ने बिजली बंद होने के बाद जनरेटर चालू किया, तो वोल्टेज में उतार-चढ़ाव आया, जिसके परिणामस्वरूप चिंगारी निकली और आग लग गई।’

ठाकुर ने कहा कि आग ने ऊपरी मंजिलों तक फैलने से पहले भूतल पर स्थित फार्मेसी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अस्पताल का प्रवेश और निकास बिंदु अवरुद्ध हो गया।

उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के अंदर से सात लोगों को बचा लिया गया है, लेकिन सभी को बेहोशी की हालत में बाहर लाया गया था, जिन्हें गंभीर चोटें आई थीं. वे अस्पताल के गलियारों में पाए गए थे।’

अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल ने मार्च 2021 में एक अस्थायी एनओसी के लिए आवेदन किया था। लेकिन दिसंबर 2021 तक इसने स्मोक डिटेक्टर, हौज़ पाइप और पानी के टैंक जैसे अग्निशमन इंतजाम नहीं थे, वहां केवल पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र थे।

दिसंबर 2021 में अस्पताल के लाइसेंसिंग अथॉरिटी को फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने को लेकर नोटिस जारी किया गया था।

कलेक्टर ने कहा कि घटना की मजिस्ट्रियल स्तर की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और इसकी अध्यक्षता एक अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।

पुलिस ने अस्पताल को बैरिकेडिंग कर सील कर दिया है। फॉरेंसिक की टीम भी आग के कारणों की जांच कर रही है।

इसी बीच, अस्पताल के डायरेक्टर्स और मैनेजर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। डॉ. निशांत गुप्ता, डॉ. सुरेश पटेल, डॉ. संजय पटेल, डॉ. संतोष सोनी और मैनेजर राम सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और मैनेजर को हिरासत में लिया गया है.

इसके साथ ही अनुमति देने वाले सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। यदि उनकी भूमिका मिली तो उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।

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