एलाईयू की गाड़ी से इन्टरार्क मजदूर की मौत के बाद प्रदर्शन; मुआवजा आदि का समझौता

जुझारू संघर्ष के बाद साथी महेश प्रसाद की मौत के आरोपी एलाईयू इंस्पेक्टर पर मुकदमा दर्ज हुआ, आश्रित परिवार की विविध सहायता पर सहमति के बाद पार्थिव शरीर पैतृक गांव भेजा गया।

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। एलाईयू इंस्पेक्टर के वाहन से संघर्षरत इन्टरार्क मजदूर महेश प्रसाद की मौत से मज़दूरों में भारी आक्रोश उभरा, जो आंदोलन का रूप ले लिया। लगातार 20 घंटे की कई दौर की वार्ताओं के बाद अंततः 10 लाख रुपए सहायता राशि देने सहित विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी। उसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके पैट्रिक गाँव रवाना हुआ।

ज्ञात हो कि 16 जुलाई को इन्टरार्क मजदूर संगठन के सदस्य श्री महेश प्रसाद की सिडकुल क्षेत्र में सड़क दुर्घटना मे मृत्यु हो गई थी। घटना की खबर सुनते ही आनन-फानन में धरना स्थल पर उपस्थित मज़दूर जवाहरलाल नेहरू सरकारी अस्पताल रुद्रपुर में पहुंचे। किच्छा फैक्ट्री के धरना स्थल से लगातार मजदूरों का आना जारी रहा। दोपहर की शिफ्ट खत्म होने के बाद पंतनगर व किच्छा अस्पताल पहुँच गए।

यूनियन का कहना है कि यह ताकत उस बेइंतहा प्यार की थी जिसको स्वर्गीय महेश प्रसाद ने अपने साथियों के बीच में अपने जीते जी बांटा था। शरीर सुन्न पड़ गया दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। मानो जो घटना घटी है वह मुमकिन ही नहीं नि:शब्द और स्तब्ध होकर सभी मजदूर अस्पताल में एकत्रित हुए। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि हर समय मुस्कुराते रहने वाला हंस-हंसकर कठिनाइयों का सामना करने वाला अपने संघर्षों पर चलते चलते आज इतनी दूर चला गया कि वह कभी लौट कर वापस नहीं आ सकता। उनकी आकृति आंखों के आगे से हटने का नाम नहीं ले रही थी। ईश्वर को कोसते हुए मजदूर दुखी मन से रात 9:00 बजे तक जिला अस्पताल में खड़े रहे। परिवार जनों का हृदय विदारक चीत्कार सुन दिल बैठा जा रहा था।

अपने पीछे एक बेसहारा परिवार को छोड़कर चले जाने वाले महेश भाई  के लिए मजदूरों ने ठान लिया की परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

पुलिस प्रशासन जिला प्रशासन एवं तमाम सरकारी अमला व दूसरे पक्ष से लोहा लेते हुए मजदूर निराश्रित परिवार को न्याय दिलाने एवं उनकी सहायता के लिए डटे रहे। परिजनों की शिकायत पर महेश कुमार के आरोपी एलाईयू इंस्पेक्टर देवेन्द्र सिंह नेगी के विरुद्ध पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई। अगले दिन सुबह पोस्टमार्टम हो जाने के बाद उनका पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान रुद्रपुर के शिव नगर में ले जाया गया। सुबह 8:00 बजे से ही मजदूरों का जमावड़ा वहां लगा रहा। दोनों पक्षों की कई दौर की त्रिपक्षीय वार्ताओं के दौरान परिवार को सहयोग व सहारे के लिए, राहत के तौर पर समझौते की जद्दोजहद चलती रही।

लगभग 30 घंटे की जद्दोजहद के बाद दोनों पक्षों में कुछ बिंदुओं पर सहमति बनाई गई-

  1. आश्रित परिवार को दूसरे पक्ष के द्वारा 10,00000 रुपए की सहायता राशि दी जाएगी,
  2. बच्चों के शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी दूसरे पक्ष के द्वारा उठाई जाएगी,
  3. बालिग हो चुके बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

इसके अलावा कुछ अन्य बिंदुओं पर भी सहमति बनाई गई

इसके पश्चात पार्थिव शरीर को शिव नगर से स्वर्गीय महेश प्रसाद के पैतृक निवास स्थान बिहार के लिए अंतिम विदाई देते हुए मजदूरों ने व अन्य उपस्थित लोगों ने रवाना किया।

अंत में सभी मजदूरों ने एक संक्षिप्त शोक सभा के माध्यम से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की एवं शहीद के साथ रहे अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनके बारे में दो दो शब्द कहे।

मजदूरों का भाईचारा अमर रहने के साथ-साथ महेश प्रसाद तुम जिंदा हो हम सब के अरमानों में, के  नारों से मज़दूरों ने अपनी भवन प्रकट की।

वहां पर मुख्य रूप से इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश चंद्र भट्ट, दिनेश चंद्र, श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, बंगाली एकता मंच के अध्यक्ष सुब्रत विश्वास, इन्टरार्क मजदूर संगठन से अध्यक्ष दलजीत सिंह, राकेश सिंह, महामंत्री, सौरभ कुमार, पान मोहम्मद, विरेंद्र कुमार, शैलेंद्र पांडे, नरेंद्र मणि, शिवनारायण, हृदेश शाक्या, एवं अन्य सैकड़ों मजदूर उपस्थित रहे।

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