जनविरोधी नीतियों के खिलाफ दुनिया भर में मज़दूर आंदोलनों की नई उभार

नव उदारवादी-जनविरोधी नीतियों के साथ कोविड-पाबंदियों नें आम मेहनतकश जन का जीवन तबाह कर दिया। ऐसे में यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशों में मज़दूर आंदोलन नई करवट ले रहा है…

यूरोप, अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक पूरी दुनिया में मज़दूर आंदोलन की बयार बह रही है। नव उदारवादी नीतियों के दुष्परिणाम, मंदी, छँटनी, बंदी, रोजगार के नए किस्मों से और तेज होते शोषण, तेजी से बढ़ती महँगाई आदि से मज़दूर आवाम के लिए मुश्किलें विकट हुई हैं। दो साल की कोविड महामारी की मार और फिर यूक्रेन पर रूसी हमले ने स्थितियों को और विकट बना दिया है।

कोविड महामारी और पाबंदियों के बीच जब सब तरफ बंदी का दौर था, तो सरकारें-पूँजीपति मज़दूरों के रोजगार पर डकैती डालती रहीं। जहाँ बड़े पूँजीपतियों के मुनाफे तेजी से बढ़ते रहे, वहीं इसकी सीधी मार मेहनतकश जन पर पड़ी, जिसने व्यापक संकट के रूप ले लिया।

आज दुनिया के ज्यादातर देशों में खाद्य पदार्थों व तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मध्य व निम्नवर्गीय परिवारों के लिए भी खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। यही कारण है कि मज़दूर व ट्रेड यूनियनें बेहतर स्थितियों की मांग उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। 

ऐसे में दुनिया के तमाम देशों के मज़दूर आंदोलन नई करवट के साथ व्यापक रूप ले रहा है। इसने मज़दूरों-मेहनतकशों के भीतर एक नई उम्मीद भी पैदा की है।

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मौजूद दौर के कुछ अहम मज़दूर आंदोलन-

यूरोप

यूरोप में विभिन्न क्षेत्रों के साथ परिवहन क्षेत्र के मज़दूर आंदोलन लगातार तेज होते जा रहे हैं।

हवाई अड्डा श्रमिकों-कर्मचारियों की हड़ताल

दुनियाभर में महामारी के दौरान अकेले उड्डयन क्षेत्र में 23 लाख नौकरियां चली गईं। ग्राउंड हैंडलिंग व सुरक्षा में लगे कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा गाज गिरी। बढ़ती महंगाई में लोगों की क्रय शक्ति लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में दो साल बाद जब गर्मियों की छुट्टियों का पहला खुला सीजन सामने आया है तो दो साल की खामोशी के बाद यूनियनें संघर्ष में उतर पड़ी हैं।

यूरोप के कई हवाई अड्डे पिछले कई दिनों से श्रमिकों-कर्मचारियों की हड़ताल की जद में हैं, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा है। बीते हफ्ते ऐसा पहली बार हुआ कि यूरोपीय संघ की राजधानी ब्रुसेल्स से सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा।

हीथ्रो हवाई अड्डे पर सैकड़ों ब्रिटिश एयरवेज कर्मचारियों ने वेतन को लेकर हड़ताल पर जाने के लिए मतदान किया है। यूनाइट और जीएमबी यूनियन के सदस्य, जो ज्यादातर चेक-इन स्टाफ हैं, ने गुरुवार को औद्योगिक कार्रवाई का समर्थन किया।

गर्मी की छुट्टियों के दौरान जब यात्रियों की मांग पूर्व-महामारी के स्तर के करीब होने की उम्मीद है, 700 कर्मचारी हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। यूनियनों ने कहा कि भयावह महँगाई और महामारी के चरम पर 10% वेतन कटौती ने स्थिति गंभीर बना दी है।

500 यूनाइट सदस्यों ने औद्योगिक कार्रवाई के पक्ष में 94.7% वोट दिए, जबकि जीएमबी के 95% सदस्यों ने कार्यबहिष्कार का समर्थन किया। हड़ताल की तारीखों की पुष्टि आने वाले दिनों में होगी।

बेल्जियम के अलावा स्पेन, फ्रांस व स्कैंडिनेवियाई देशों में हड़तालों की आशंका है। कर्मचारियों की कमी व श्रमिक हड़तालें गर्मियों से पहले भी लंदन, एम्सटर्डम, पेरिस, रोम व फ्रैंकफर्ट में असर दिखा चुकी हैं। शुक्रवार को रेयनएयर के भी कई केबिन क्रू बेल्जियम, स्पेन व पुर्तगाल में हड़ताल पर चले गए। फ्रांस व इटली में भी यही होने जा रहा है।

रेल कर्मियों की हड़ताल

ब्रिटेन में बीते एक हफ्ते में तीन बार वहां के रेल कर्मचारी 24-24 घंटे की हड़ताल पर जाकर रेल नेटवर्क को ठप कर चुके हैं। छह दिन में तीन बार रेल नेटवर्क ठप करने के बाद ब्रिटेन के रेल कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वेतन सुधारने और छंटनी रोकने को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ तो हड़ताल का दायरा फैल सकता है।

इसी के साथ भूमिगत मेट्रो रेल कर्मियों की हड़ताल से ब्रिटेन का सार्वजनिक परिवहन ठप्प रहा।

यूरोप के अन्य देशों में हड़तालें

फ्रांस की यूनियनों ने भी 6 जुलाई को रेलवे कर्मचारी हड़ताल का आह्वान कर दिया है। फ्रांस की ट्रेड यूनियन सीजीटी ने शुक्रवार को तेल रिफाइनरियों के कर्मचारियों के लिए एक दिन की हड़ताल की।

बेल्जियम में तो बीते सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के कमर्चारियों ने देशव्यापी हड़ताल की थी और राजधानी ब्रसेल्स में 80 हजार कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। हड़ताल में परिवहन के अलावा स्कूलों, अस्पतालों व अन्य सार्वजनिक सेवाओं के कर्मचारी भी शामिल हुए।

वहां भी उनकी मांग वास्तविक वेतन में बढ़ोतरी करने की ही है।

ग्रीस में भी बीते बुधवार को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों ने 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल की।

मैसेडोनिया

उत्तरी मैसेडोनिया में सरकारी कर्मचारियों ने बुधवार, 22 जून को हड़ताल की। यूनियनों और देश की सरकार के बीच वेतन विवाद को लेकर जारी गतिरोध के बीच यह कर्मचारियों का प्रतिरोध था।

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, उत्तरी मैसेडोनिया में पुलिस संघों, स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और नगरपालिका कर्मचारियों सहित सरकारी अधिकारियों की हड़ताल ने सेवाओं को बाधित कर दिया। हालांकि देश में आवश्यक सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक सेवाओं का कार्य जारी रहा।

उत्तरी मैसेडोनिया की राजधानी स्कोप्जे में प्रदर्शनकारियों ने संसद के सामने 120 कुर्सियों को खाली छोड़ दिया, जिसका इस्तेमाल वे देश के सांसदों की संख्या दिखाने के लिए करते थे। एपी रिपोर्ट के अनुसार, एक संसदीय बजट समिति द्वारा प्रस्तावित वेतन समायोजन संबंधी यूनियन की मांगों को स्वीकार करने से इनकार करने के बाद हड़तालें की गईं।

अफ्रीका

Labor Strikes Are Becoming a Rising Concern across Africa

ट्यूनिस (ट्यूनीशिया)

उत्तरी अफ्रीकी राष्ट्र पहले से ही बिगड़ते आर्थिक संकट को झेल रहे हैं। ट्यूनीशिया में गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र की एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल से भूमि और हवाई परिवहन और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां पंगु हो गईं।

ट्यूनीशिया के शक्तिशाली जनरल लेबर यूनियन (यूजीटीटी) ने कार्यबहिष्कार की घोषणा की, जिसमें सामाजिक और आर्थिक मांगों को दबाने के खिलाफ 159 राज्य शामिल रहीं। संघ वेतन वृद्धि की मांग कर रहा है और सरकार के नियोजित आर्थिक सुधारों का विरोध कर रहा है।

बढ़ती कीमतों, उच्च बेरोजगारी और व्यापक गरीबी के बीच वर्ष की शुरुआत से ट्यूनीशियाई नागरिकों की क्रय शक्ति कम हो गई है। यूक्रेन में युद्ध ने वित्तीय संकट को और बढ़ा दिया है।

राष्ट्रपति कैस सैयद की सरकार ने पिछले सप्ताह बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वेतन बिल में कटौती करने की एक योजना की घोषणा की और कहा कि यह अगले साल से शुरू होने वाली ऊर्जा और खाद्य सब्सिडी को उत्तरोत्तर कम करेगा। सरकार ने कहा कि वह कम आय वाले परिवारों के लिए सब्सिडी को नकद हैंडआउट से बदल देगी।

जिम्बाब्वे

जिम्बाब्वे की नर्स यूनियनों ने गुरुवार को कहा कि उनके सदस्य खराब वेतन और काम करने की स्थिति के विरोध में अगले सप्ताह हड़ताल करेंगी। कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से नर्सों द्वारा यह दूसरा कार्य बहिष्कार है।

जिम्बाब्वे प्रोफेशनल नर्स यूनियन के अध्यक्ष रॉबर्ट चिदुकु ने परिरेनयातवा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स को संबोधित एक पत्र में कहा, “हमारे सदस्य सोमवार 20 जून से ड्यूटी पर नहीं आ पाएंगे।”

सरकार और स्वास्थ्य कार्यकर्ता वेतन को लेकर गतिरोध में हैं, क्योंकि जिम्बाब्वे में मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 131.7% हो गई। सभी की बचत को मिटा देने वाले इस महा मुद्रास्फीति की यह एक गंभीर प्रतिध्वनि है।

अमेरिका

Kellogg's Cereal plant workers demonstrate at the Battle Creek plant in Michigan

अटलांटिक सिटी

अटलांटिक सिटी में कैसीनो श्रमिक हड़ताल की तैयारी में हैं। स्थानीय सरकार कैसीनो श्रमिकों को अधिक भुगतान करके और उनमें से अधिक को काम पर रखकर संभावित हड़ताल से बचने के लिए अपने प्रमुख उद्योग से आग्रह कर रही है।

कम से कम पांच कैसीनो के खिलाफ जुलाई की शुरुआत में हड़ताल की समय सीमा का नोटिस देकर यूनाइट हियर यूनियन के स्थानीय 54 उन लोगों को बदलने के लिए नए अनुबंध की मांग कर रहे हैं जो 1 जून को समाप्त हो गए हैं।

यूनियन ने 1 जुलाई तक बोर्गटा और कैसर एंटरटेनमेंट के स्वामित्व वाले तीन कैसीनो -कैसर, हाराह व ट्रॉपिकाना तथा हार्ड रॉक संबंधी नए समझौते नहीं होने पर 3 जुलाई से हड़ताल की चेतावनी दी है।

चिली

दुनिया में तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक चिली की राज्य खनन कंपनी कोडेल्को के श्रमिकों ने प्रदूषण को कम करने के बहाने सरकार द्वारा एक फाउंड्री को बंद करने के विरोध में एक खुली हड़ताल शुरू की है।

बुधवार को हड़ताल शुरू होने के बाद कम से कम 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। श्रमिक देश भर में छह खनन सुविधाओं पर एकत्र हुए, प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर दिया और टायरों में आग लगा दी।

लक्षित सुविधाओं में वेंटानास फाउंड्री थी, जिसकी सरकार ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी, क्षेत्र में सल्फर डाइऑक्साइड विषाक्तता की एक श्रृंखला के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा।

इक्वाडोर

दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर की जनता लाखों की संख्या में, गुइल्लेर्मो लासो की दक्षिणपंथी सरकार और उसकी जन-विरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ 13 जून से, अनिश्चितकालीन राष्ट्रीय हड़ताल के हिस्से के तौर पर देशभर में लामबंद रही।

इस हड़ताल का आह्वान विभिन्न जनजातियों, किसानों एवं सामाजिक संगठनों के द्वारा किया गया था, जिनकी ओर से दस मांगों की एक सूची पेश की गई है जो इक्वाडोर की बहुसंख्यक आबादी की सबसे तात्कालिक जरूरतों को हल किये जाने से संबंधित है।

इन माँगों में ईंधन की कीमतों पर लगाम लगाने; रोजगार के अवसरों व काम की गारंटी; सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण प्रक्रिया के खात्मे; आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने वाली नीतियाँ लागू करने; सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बजट का प्रावधान; मादक पदार्थों की तस्करी, अपहरण और हिंसा के खात्मे; बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र से आम लोगों के लिए सुरक्षा के उपायों; कृषि उत्पादों पर उचित मूल्य; जनजातीय क्षेत्रों में खनन एवं तेल अवशोषण से जुडी गतिविधियों पर प्रतिबंध; जनजातीय और राष्ट्रीयताओं के 21 सामूहिक अधिकारों का सम्मान हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में आंदोलन की ताजा बयार

वैश्विक महामारी व पाबंदियों से तबाह और 2020 में पुलिस विरोधी हिंसा से हरकत में आए अमेरिकी मजदूर दशकों बाद अपने नियोक्ताओं के प्रति ज्यादा मुखर हुए हैं। अमेरिका में संगठित के साथ असंगठित मजदूर तेजी से संगठित हो रहे हैं, आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं।

पिछले दो साल के दौरान, अमेरिकी मज़दूरों में कुछ हरकत पैदा हुई। अमेरिकी सर्वेक्षण एजेंसी गैलप के मुताबिक 1965 के बाद पहली बार मजूदर यूनियनों ने अपार लोकप्रियता हासिल की है। अमेरिका में धड़ाधड़ यूनियन बनने लगी हैं। असंगठित मजदूर भी आगे बढ़ रहे हैं।

सांगठनिक लिहाज से पहले दुष्कर समझे जाने वाले स्टारबक्स, अमेजन और एपल जैसे संस्थानों में मजदूरों ने जबरदस्त जीत हासिल की है। मई में न्यूयार्क सिटी में 8300 कर्मचारियों वाले स्टेटन आइलैंड गोदाम पर अमेजन के मजदूरों ने यूनियन बनाने के लिए वोट डाले।

एक ऐतहासिक कदम में अमेरिका में पहली बार एप्पल स्टोर के कर्मचारियों ने संगठित होने के पक्ष में मतदान किया। अमेरिका के राज्य मैरीलैंड में टॉवसन शहर के इस ऐप्पल स्टोर के रीटेल कर्मचारियों ने यूनियन के प्रतिनिधित्व के पक्ष में मतदान किया है।

मजदूरों के और सक्रिय होने में जहाँ जनविरोधी नीतियाँ हैं, वहीं, 2020 का ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन है। काले लोगों की जिंदगियों की अहमियत की याद दिलाते इस आंदोलन में लाखों लोग जॉर्ज फ्लॉयड, ब्रिओना टेलर, अहमद आर्बरी और दूसरे कई लोगों की हत्याओं के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे।

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